पंजाब में बेटी का इलाज कराने आए मुंबई के हिंदूू परिवार को बनाया ईसाई, मौत हुई तो पास्टर ने कहा- एक लाख दो.. जिंदा कर दूंगा

ब्राह्मण से ईसाई बने परिवार को जनेऊ पहनवाने के साथ-साथ रुद्राक्ष की माला से लेकर तमाम रस्में पूरी की गई।

जालंधर के चर्च में बेटी के असाध्य रोग का उपचार करवाने पहुंचा ब्राह्मण परिवार अपनी बेटी को तो नहीं बचा सका लेकिन जिले के हिंदू संगठनों ने मतांतरण कर ब्राह्मण से ईसाई बने इस परिवार की घर वापसी करवा ली।

Vikas KumarSat, 17 Apr 2021 12:33 PM (IST)

जालंधर, जेएनएन। फेफड़ों के कैंसर की बीमारी से जूझ रही बेटी के शर्तिया इलाज के नाम पर जालंधर के एक पादरी ने मुंबई के हिंदूू परिवार के तीन सदस्यों शुभम, उसकी बहन नंदिनी और मां मीना का मतांतरण करवाकर उन्हें ईसाई बना दिया। इसके बावजूद नंदिनी नहीं बच सकी। परिवार ने पुलिस में शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा परिवार ने कुछ हिंदूू संगठनों की मदद ली। शनिवार को हिंदूू संगठनों ने पूरे परिवार की विधि विधान से घर वापसी करवाई।

मुंबई के वाशी इलाके के सेक्टर-19 स्थित प्लाट नंबर आठ के सब्जी विक्रेता शुभम ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बहन नंदिनी फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थी। उसका मुबंई के टाटा अस्पताल में इलाज चल रहा था। वहां जालंधर के एक चर्च से संबंध रखने वाली महिला स्वर्णा खेड़ा उनके संपर्क में आई। स्वर्णा ने उन्हें यूट्यूब पर कुछ वीडियो बताए और दावा किया कि चर्च के पास्टर मरे हुए लोगों को जीवित कर देते हैं। उसने नंदिनी को भी प्रार्थना के माध्यम से ठीक करने का दावा किया। स्वर्णा ने उन्हें 14 फरवरी को चंडीगढ़ स्थित उनके सेंटर में जाने की सलाह दी। नंदिनी का परिवार चंडीगढ़ पहुंचा तो पता चला कि पास्टर जालंधर में हैं।

जालंधर में ब्राह्मण से ईसाई बने परिवार की घर वापसी करवाते हिंदू संगठनों के सदस्य।

पास्टर ने वीडियो काल के माध्यम से करवाई प्रार्थना, एक दिन बाद मौत

चंडीगढ़ में उनसे पांच हजार रुपये लेकर चर्च में मिलने का समय दिया गया। यहां पर प्रबंधकों ने पास्टर से परिवार की वीडियो काल से बात करवाई और एक लाख रुपये जमा करवाने को कहा। परिवार के पास 40 हजार रुपये ही थे। इस पर पास्टर ने परिवार को मतांतरण करने के बाकी पैसे छोड़ने की पेशकश की। शुभम के मुताबिक उन्होंने अपनी चोटी कटवा दी और जनेऊ व रुद्राक्ष की माला भी उतार दी। इसके बदले उन्हें एक तेल की शीशी व बाइबल देकर मुंबई भेज दिया गया। 20 दिनों के बाद नंदिनी के टेस्ट करवाने को कहा। जब टेस्ट करवाए तो कैंसर पहले से भी बढ़ गया था। उन्होंने चर्च से दोबारा संपर्क किया तो परिवार को जालंधर बुला लिया। 11 अप्रैल को वह चर्च पहुंचे। यहां परिवार की पास्टर के साथ वीडियो काल के माध्यम से प्रार्थना करवाई गई। 12 अप्रैल को नंदिनी की मौत हो गई। परिवार रोने लगा तो पास्टर ने एक लाख रुपये मांगे और कहा कि वह नंदिनी को जीवित कर देगा। विरोध किया तो प्रबंधकों ने उन्हें बाहर निकाल दिया।

हिंदूू संगठनों ने किया अंतिम संस्कार, करवाई घर वापसी

पीड़ित परिवार ने कुछ हिंदूू संगठनों से संपर्क किया। उन्होंने नंदिनी का अंतिम संस्कार करवाया। इसके बाद शुभम व उसकी मां मीना पंडित को श्री कृष्ण मुरारी मंदिर (गोपाल नगर) में विधिवत रूप से हिंदूू धर्म में वापस शामिल किया गया। हिंदू क्रांति दल के अध्यक्ष मनोज नन्हा ने कहा कि इसाई मिशनरी लोगों को गुमराह कर मतांतरण करवा रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से कार्रवाई की मांग की।

आरोपितों को थाने बुलाया, कार्रवाई करेंगे: पुलिस

नंदिनी के भाई शुभम ने 12 अप्रैल एसएसपी संदीप गर्ग को शिकायत दी थी। इसकी जांच एसपीडी मनप्रीत सिंह ढिल्लों को दी गई है। दूसरी शिकायत हंिदूू नेता कुणाल कोहली व आशीष अरोड़ा ने दी। इसमें चर्च की ओर से लोगों को गुमराह करने की बात कही गई है। इसके बावजूद आरोपितों पर कार्रवाई नहीं की गई। मनप्रीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि मामले की जांच जारी है। आरोपित व पीड़ित परिवार को सोमवार को बुलाया गया है। इसके बाद की कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में चर्च का पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया।

 

 

 

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