बेटी ने बढ़ाया माता-पिता का मान, विपरीत परिस्थितियों में भरी उड़ान

जिस बेटी के जन्म होने पर घरवालों को अफसोस हुआ था आज उसी बेटी पर उन्हें गर्व है। गुंजन अरोड़ा ने जालंधर की पहली महिला कामर्शियल पायलट बनकर उन लोगों को आइना दिखाया है जो बेटी के साथ भेदभाव करते हैं।

JagranThu, 07 Oct 2021 05:00 AM (IST)
बेटी ने बढ़ाया माता-पिता का मान, विपरीत परिस्थितियों में भरी उड़ान

प्रियंका सिंह, जालंधर

जिस बेटी के जन्म होने पर घरवालों को अफसोस हुआ था, आज उसी बेटी पर उन्हें गर्व है। गुंजन अरोड़ा ने जालंधर की पहली महिला कामर्शियल पायलट बनकर उन लोगों को आइना दिखाया है जो बेटी के साथ भेदभाव करते हैं। गुंजन अपने माता-पिता का अभिमान बनने के साथ-साथ आज उनका मान सम्मान भी बढ़ा रही हैं। लोगों की बातों को नजरअंदाज कर विपरीत परिस्थितियों का सामना कर उसने न केवल बचपन के सपने को पूरा किया बल्कि कामर्शियल पायलट बन लड़कियों के लिए भी मिसाल बनीं। अब तक वह 1500 घंटे की उड़ान भर चुकी है। 200 घंटे की उड़ान ट्रेनिग और 1000 घंटे की उड़ान एक साल तीन महीने के भीतर भरी। 200 घंटे की उड़ान सीएफआई कैप्टन मयंक गर्ग के साथ भरी। गुंजन ने कभी भी अपने मां-बाप को बेटे की कमी महसूस नहीं होने दे। उन्होंने जो कर दिखाया है, शायद वह बेटा भी ना कर पाता। आज तानों की जगह तारीफ ने ले ली

पिता चंद्रशेखर और माता वीणा अरोड़ा के घर जन्मीं गुंजन अरोड़ा ने बताया कि शुरू से ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पर उसने अपना गोल बचपन में ही निर्धारित कर लिया था। पायलट बनने का जुनून उस पर इस कद्र सवार था कि उसने कोई भी ताना हावी नहीं होने दिया। आसपास के लोग व रिश्तेदार कहते थे कि लड़कियां पायलट नहीं बनती लेकिन गुंजन ने उनको पायलट बनकर दिखाया। गुंजन ने कहा कि उसने शुरुआत में ही सोच रखा था कि एक दिन अपने मुकाम पर पहुंचकर सबका मुंह बंद करना है। उसने बताया कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए एयर होस्टेस बनी उनकी बुआ की बेटी ने उसे प्रेरित किया। इन विमानों से भरी उड़ान

गुंजन ने स्कूली पढ़ाई जालंधर के सेंट जोसेफ कान्वेंट स्कूल से की। दसवीं और बारहवीं मेडिकल स्ट्रीम में एमजीएम कालेज से की। इलेक्ट्रानिक और कम्युनिकेशन में बीटेक पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से की। कुछ समय बाद वहीं पर उन्हें कंप्यूटर लाइन में नौकरी मिली लेकिन दिलचस्पी न होने के कारण नौकरी छोड़ दी। अब तक वह एयरबस ए 320, सेसना 172, सेसना 152, सेसना 310 से उड़ान भर चुकी है। बीमार हुई लेकिन हार नहीं मानी

एयर होस्टेस के एग्जाम के दौरान गुंजन ने गंभीर बीमार रहते हुए भी एग्जाम दिए। पहले प्रयास में ही टेस्ट पास कर लिया। ट्रेनिंग में 200 घंटे फ्लाइट उड़ाने का टास्क दिया गया। उनसे कानपुर के गर्ग एविएशन से यह उड़ान पूरी की। जो कुछ भी हूं, मां की वजह से हूं

गुंजन का कहना है कि एक बेटी घर से निकलकर तब ही कोई मुकाम हासिल कर सकती है जब उसके साथ उसकी मां हो। मेरी मां ने हर जगह मेरा साथ दिया। मेरी मां है रोल मॉडल है। अगर उन्होंने मुझे समझा नहीं होता तो खास मैं इस मुकाम पर ना होती। मुझ में आज जो इतनी हिम्मत है वह मेरी मां के कारण ही है। उन्होंने मुझे आजादी दी तो मैंने उन्हें मान सम्मान।

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