जालंधर के दलित विधायकों का मंत्री बनने का सपना हो सकता है पूरा, चौधरी और सुशील रिंकू दौड़ में आगे

चरणजीत सिंह चन्नी के पंजाब के मुख्यमंत्री बनने के बाद दोआबा सबसे मजबूत गढ़ बनकर उभरा है। इसके साथ ही मंत्री पद के लिए होशियारपुर से डा. राजकुमार चब्बेवाल जालंधर से सुशील रिंकू चौधरी सुरिंदर सिंह और कपूरथला (फगवाड़ा) से बीएस धालीवाल के नाम आगे आ गए हैं।

Pankaj DwivediSun, 19 Sep 2021 08:41 PM (IST)
जालंधर से कांग्रेस विधायक सुरिंदर सिंह और सुशील रिंकू की फाइल फोटो।

मनोज त्रिपाठी, जालंधर। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद चरनजीत सिंह चन्नी के लिए पंजाब में सबसे ज्यादा दलित वोट बैंक वाले दोआबा में कांग्रेस को मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। पंजाब में पहली बार दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाने के बाद अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में दोआबा में कांग्रेस का प्रदर्शन चन्नी का भविष्य तय करेगा। फिलहाल उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद जालंधर को मंत्रिमंडल में नुमाइंदगी मिलना तय माना जा रहा है।

कैप्टन अमरिंदर को हटाने को लेकर जिस प्रकार पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू व परगट सिंह ने कवायद की थी उससे यही माना जा रहा था कि सिद्धू के मुख्यमंत्री बनने के बाद परगट का मंत्री बनना तय है। साथ ही युवा नेता के रूप में जालंधर के बाबा हैनरी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती थी। अब चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पलटी कांग्रेस की सियासत में अचानक दोआबा सबसे मजबूत गढ़ बनकर उभरा है।

पंजाब में सबसे ज्यादा दलित वोट बैंक यहीं पर है। जालंधर से लेकर होशियारपुर व रुपनगर इसके सबसे बड़े गढ़ माने जाते हैं। 2007 से लेकर 2017 तक अकाली-भाजपा गठबंधन के कार्यकाल में यहां से कांग्रेस सूफड़ा साफ हो गया था। उसके बाद 2017 में भले ही कांग्रेस ने वापसी कर सत्ता हासिल की, लेकिन अकाली-भाजपा के वोट शेयर में कटौती नहीं कर पाई थी। अभी भी जालंधर में 9 में से 3 विधायक अकाली दल के हैं।

चन्नी अगर पार्टी की नीतियों के हिसाब से दलित वोट बैंक की राजनीति पर विधानसभा चुनाव को लेकर फोकस करेंगे तो उन्हें मंत्रिमंडल में दलितों को स्थान भी देना पड़ेगा। इन हालातों में जालंधर व होशियारपुर तथा कपूरथला से दलित विधायकों में से किसी का भी नंबर मंत्री बनने के लिए लग सकता है।

फिलहाल, होशियारपुर से डा. राजकुमार चब्बेवाल, जालंधर से सुशील रिंकू, चौधरी सुरदर सिंह और कपूरथला (फगवाड़ा) से बीएस धालीवाल के नामों पर चन्नी विचार कर सकते हैं। डा. चब्बेवाल गरीब परिवार से होने के बाद भी यहां तक पहुंचे हैं और अपने क्षेत्र अच्छी पकड़ रखते हैं। यही हाल सुशील रिंकू का भी है। रिंकू भी गरीब परिवार से थे, पिता ने सियासी पृष्ठभूमि तैयार की थी, उसके बाद पार्षद बने और अब विधायक हैं। चौधरी सुरिंदर सिंह जगजीत सिंह के बेटे हैं। इसलिए उनका भी नंबर लग सकता है। फगवाड़ा से विधायक बीएस धालीवाल के नाम पर भी विचार किया जा सकता है।

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