जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन पर वर्षों बाद भी नहीं बढ़ सका प्लेटफार्म शेड, बारिश में उतरते हैं शताब्दी के यात्री

जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक के ऊपर बेहद कम हिस्से में ही शेड उपलब्ध है बाकी का हिसाब खुला ही पड़ा हुआ है। ट्रेनों में लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा कोच लगे होने की वजह से ट्रेनों का अधिकतर हिस्सा बिना शेड प्लेटफार्म पर खड़ा होता है।

Pankaj DwivediThu, 23 Sep 2021 04:59 PM (IST)
जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन पर बारिश में उतरते हुए शताब्दी के यात्री। जागरण

मनुपाल शर्मा, जालंधर। सवा छह करोड़ रुपये का खर्च और सिटी रेलवे स्टेशन को स्मार्ट बनाए जाने के तमाम दावों के बीच प्रतिष्ठित शताब्दी समेत अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों के यात्री खुले आसमान के तले बारिश में उतरते को मजबूर हैं। कड़कती धूप या बरसते बादलों में यात्रियों को सामान समेत पैदल चलकर शेड के नीचे पहुंचना पड़ता है। स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर एक के ऊपर बेहद कम हिस्से में ही शेड उपलब्ध है। बाकी का हिसाब खुला है। ट्रेनों में लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा कोच लगे होने की वजह से उनका अधिकतर हिस्सा बिना शेड वाले प्लेटफार्म पर खड़ा होता है। शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का ठहराव भी बेहद कम समय के लिए होता है और यात्रियों को बारिश और धूप की परवाह किए बिना तत्काल ट्रेन से नीचे उतरना होता है। 

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जो यात्री ट्रेन के पिछले कोच में सफर कर रहे होते हैं उन्हें तो लंबा रास्ता बिना शेड के ही तय करना पड़ता है। बारिश होने पर वे बुरी तरह से भीग जाते हैं। बीते तीन दिन से हो रही बरसात के चलते सिटी रेलवे स्टेशन उतरने वाले यात्रियों को भीगते हुए ही रेलवे स्टेशन के बाहर आना पड़ा है। बता दें कि लंबे अरसे से मांग उठाई जाती रही है कि सिटी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक के ऊपर प्लेटफार्म शेड को बढ़ाया जाए। काम पूरा होने के बजाय बयानों और फाइलों में उलझा नजर आ रहा है।

प्लेटफार्म शेड न होने से यात्री नाराज

कंवल संधू और रितेश शर्मा।

सिटी रेलवे स्टेशन पर बारिश में भीगते हुए बाहर आए यात्री कंवल संधू ने कहा कि कई सालों से हर बरसात में ऐसा ही होता है। बाहर पुराना फुटपाथ उठाकर नया बना देते हैं, जिससे यात्रियों को कोई फायदा नहीं होता। रेलवे यात्रियों से किराया ले रहा है, प्लेटफार्म फीस भी वसूल रहा है। बावजूद इसके शेड उपलब्ध न कराया जाना बेहद शर्मनाक है। साफ्टवेयर इंजीनियर रितेश शर्मा ने कहा कि ग्लोबलाइजेशन के दौर में स्मार्ट बताए जाने वाले रेलवे स्टेशन पर शेड न होना रेलवे अफसरशाही और राजनीतिज्ञों की कारगुजारी सामने लाता है। उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है और बातें बुलेट ट्रेन चलाने की हो रही हैं।

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