कोरोना काल में बिन ऑक्सीजन छटपटा रही इंडस्ट्री, उद्योगपति दे रहे सांसों की दुहाई

दस दिन से इंडस्ट्री को ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से बंद है।
Publish Date:Tue, 22 Sep 2020 09:29 AM (IST) Author: Vikas_Kumar

जालंधर, [मनुपाल शर्मा]। कोरोना संक्रमण के इस दौर में मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी सांस की हो रही है। इस कारण ऑक्सीजन की मांग अस्पतालों में चार से पांच गुणा बढ़ गई है। दूसरे राज्यों की तरह पंजाब में भी कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन की कमी न हो जाए, इसके लिए सरकार ने इंडस्ट्री के बजाय अस्पतालों को पूरी आपूर्ति देने का फैसला किया। इसके लिए ऑक्सीजन प्लांट पर बाकायदा खाद्य एवं आर्पूित विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वे प्रत्येक ऑक्सीजन सिलेंडर का रिकॉर्ड रख रहे हैं। इसका यह नतीजा तो अच्छा रहा कि अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन की फिलहाल कमी नहीं है पर इधर इंडस्ट्री छटपटाने लगी है। दस दिन से इंडस्ट्री को ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से बंद है। उद्योगपति दुहाई दे रहे हैं कि इंडस्ट्री को पूरी सप्लाई न रोकी जाए, इससे एक्सपोर्ट तक प्रभावित होने लगा है। इंडस्ट्री की सांसों का भी ध्यान रखें ।

कोरोना ने नेता डॉक्टर बना डाले

राजनीति में मुद्दा मिलना बहुत जरूरी है। आम आदमी पार्टी को अब कोरोना काल में लोगों का ऑक्सीजन स्तर जांचने का ही मुद्दा मिल गया है। आप ने सूबे में ऑक्सीमीटर बांटने की मुहिम शुरू कर डाली। पहले तो यह मात्र मीडिया की र्सुिखयों तक ही सीमित रहा, लेकिन हद तो तब हो गई जब नेता खुद बाजार में लोगों का ऑक्सीजन स्तर जांचने निकल पड़े। लोगों का ऑक्सीजन स्तर डॉक्टर की तरह जांचा गया। हालांकि इसे ऑक्सीमीटर मुहिम की शुरुआत बताया गया, लेकिन कोई ये समझ नहीं पाया कि ऑक्सीजन का स्तर जांचने के बाद नेताओं ने क्या किया? कितने लोगों को ऑक्सीजन स्तर कम होने पर अस्पताल ले जाकर चेक करवाया गया? दूसरे दल कह रहे हैं किइससे तो लोगों में डर ही फैलाया गया होगा। अब आप ने घोषणा की है कि वह गरीब मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया करवाएगी। देखते हैैं इस कवायद से आप को कितनी सियासी आक्सीजन मिलती है।

पॉजिटिव मुलाजिम बरने चिंता

अनलॉकिंग प्रक्रिया के दौरान बसें चलाने की अनुमति यात्रियों के लिए राहत समझी जा रही थी, लेकिन पंजाब रोडवेज को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पाए। अब उनके सामने मुलाजिमों को वेतन देने और बसों में डीजल डालने के लिए पैसे की चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि बीते सप्ताह से रोडवेज अधिकारियों का ध्यान अब यात्रियों से शिफ्ट होकर अपने मुलाजिमों पर आ टिका है। वजह यह है कि रोडवेज के कई मुलाजिम संक्रमित होते जा रहे हैं। मुलाजिमों के पॉजिटिव पाए जाने की बढ़ती संख्या को देखकर पंजाब रोडवेज मुख्यालय अब हर डिपो में मुलाजिमों की कोरोना टेस्टिंग को सुनिश्चित बनाने जा रहा है। पंजाब रोडवेज डिपो के संबंधित जीएम स्वास्थ्य विभाग को रोडवेज मुलाजिमों की कोरोना टेस्टिंग के लिए पत्र लिख रहे हैं। यात्रियों की संख्या पूछने पर अधिकारी जवाब दे रहे हैं कि मुलाजिम ठीक होने जरूरी हैं, यात्री तो फिर इकट्ठे कर लेंगे।

आंकड़ों के खेल में इंडस्ट्री फेल

लॉकडाउन के बाद इकोनॉमी और इंडस्ट्री में तेजी से हो रही ग्रोथ बताने के लिए आंकड़ों के खेल में इंडस्ट्री फेल होती दिख रही है। कहा जा रहा है कि इंडस्ट्री पटरी पर लौट रही है। हालांकि असलियत यह है कि इंडस्ट्री क्षमता का 50 फीसद लक्ष्य भी तय नहीं कर पाई है। इंडस्ट्री के पास पर्याप्त ऑर्डर नहीं हंै। अगर ऑर्डर आ भी जाता है तो माल भिजवाना मुश्किल नजर आता है। माल भिजवा दिया तो पेमेंट नहीं मिल पा रही है। बाकी कसर राज्य सरकार ने पूरी कर दी है। सी फार्म जमा कराने का अल्टीमेटम तो दिया ही, साथ ही लॉकडाउन की अवधि के लिए भी बिजली के फिक्स्ड चार्जेस जमा कराने का फरमान सुना दिया। अभी उद्योगपति इन समस्याओं से जूझ ही रहे थे कि ऑक्सीजन बंद हो गई। इतनी सारी समस्याएं हैं, लेकिन बताया फिर भी यही जा रहा है कि इंडस्ट्री ग्रोथ पर है।

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