अपराधियों को ही नहीं, ट्रैफिक को भी सुधारेगी तीसरी आंख

अपराधियों को ही नहीं, ट्रैफिक को भी सुधारेगी 'तीसरी आंख'

अपराध व जगह-जगह जाम झेल रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगने वाले सीसीटीवी कैमरे न सिर्फ अपराध पर अंकुश लगाएंगे बल्कि ट्रैफिक सिस्टम भी सुधारेंगे। सब कुछ ठीक रहा तो जनवरी 2022 में इस प्रोजेक्ट के तहत काम भी शुरू हो जाएगा।

JagranMon, 01 Mar 2021 06:35 AM (IST)

जागरण संवाददाता, जालंधर : अपराध व जगह-जगह जाम झेल रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगने वाले सीसीटीवी कैमरे न सिर्फ अपराध पर अंकुश लगाएंगे बल्कि ट्रैफिक सिस्टम भी सुधारेंगे। सब कुछ ठीक रहा तो जनवरी 2022 में इस प्रोजेक्ट के तहत काम भी शुरू हो जाएगा। दरअसल, शहर की सुरक्षा से जुड़े इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर प्रोजेक्ट से सीसीटीवी के अलावा कई अन्य प्रोजेक्ट जोड़े गए हैं। उनके तहत कैमरों के जरिए न केवल अपराध पर नजर रखी जाएगी बल्कि ट्रैफिक सिस्टम में बदलाव लाया जाएगा। लोगों तक जरूरी संदेश तुरंत पहुंचाना, पर्यावरण संरक्षण के लिए उपकरण और सेंसर लगाने जैसे प्रोजेक्ट भी इसी में शामिल किए गए हैं। नेशनल इंमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम, ई-गवर्नेंस, हेल्प डेस्क को भी जोड़ा गया है। प्रोजेक्ट का मुख्य फोकस क्राइम खासकर महिलाओं और बच्चों के प्रति होने वाले अपराध को कंट्रोल करना रहेगा लेकिन इसके सहयोगी प्रोजेक्ट के साथ कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी।

चार शहरों के लिए एक ही प्रोजेक्ट, नौ महीने में पूरा करना होगा काम

स्मार्ट सिटी कंपनी के इस प्रोजेक्ट के लिए जालंधर, अमृतसर और सुल्तानपुर लोधी के लिए एक ही प्लान बनाया गया है जबकि लुधियाना के लिए अलग टेंडर लगाया गया है। कैमरों से मानिटरिग के लिए हर शहर में एक कंट्रोल रुम होगा और इन चारों शहरों की एक साथ मानिटरिग के लिए मास्टर कंट्रोल रुम तय किया गया है। तीन शहरों के इस प्रोजेक्ट पर 250 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। जालंधर शहर में लगेंगे 1250 कैमरे

जालंधर में करीब 1250 कैमरे लगाए जाने हैं। पहले जालंधर का प्रोजेक्ट 116 करोड़ का था लेकिन बाद में सभी शहरों के लिए एक जैसा प्रोजेक्ट बनाया गया है। इससे तीनों शहरों में प्रोजेक्ट लागत 50 करोड़ रुपये कम होगी। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनियों से प्रपोजल मांगी गई है। प्री-बिड मीटिग 5 मार्च को होगी जबकि टेंडर 24 मार्च को खोला जाएगा। जिस भी कंपनी को काम अलाट होगा उसे 9 महीने में प्रोजेक्ट का काम निपटाना होगा। कंपनी को 5 साल के लिए आपरेशन और मरम्मत का काम भी संभालना होगा। --------

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के लिए मुलाजिमों को देंगे ट्रेनिग

इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े विभागों के मुलाजिमों को भी तैनात किया जाएगा। इसके लिए सभी विभागों के मुलाजिमों को कंट्रोल रुम से जुड़े कामकाज, साफ्टवेयर की ट्रेनिग दी जाएगी। तय किया गया है कि सिविल पुलिस के 50, ट्रैफिक पुलिस 150, नगर निगम 50, जिला प्रशासन 10, स्मार्ट सिटी कंपनी और कंसलटेंट के 50 मुलाजिमों के अतिरिक्त अन्य विभागों के 20 समेत कुल 330 मुलाजिमों को प्रशिक्षित किया जाना है। -------------

इन क्षेत्रों में ऐसे काम करेगा प्रोजेक्ट सुरक्षा : पीटीजेड और बुलेट कैमरों से शहर पर नजर रहेगी। इसके लिए पुलिस की दी गई लोकेशन पर कैमरे लगाए जाने हैं। क्राइम के लिहाज से सेंसटिव इलाकों में सर्वे करके लोकेशन तय की गई है। इसकी 24 घंटे मानिटरिग होगी।

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ट्रैफिक मैनेजमेंट : प्रोजेक्ट पूरा होने पर ट्रैफिक सिस्टम में सुधार होगा। ई-चालान होंगे। पार्किंग वायलेशन, ट्रैफिक जाम, रेड लाइट जंप, गलत से दिशा से आने समेत कई गतिविधियों पर नजर रहेगी। ट्रैफिक लाइटस को कंट्रोल रुम से कंट्रोल कर सकेंगे।

--------- मैसेज सिस्टम : इसके तहत शहर के तय स्थानों पर मैसेज देने के लिए स्क्रीन लगाई जाएंगी। शहर में किस इलाके में ट्रैफिक जाम, एक्सीडेंट यह कोई अन्य कारण से ट्रैफिक में बाधा की सूचना लोगों को स्क्रीन पर दी जाएगी।

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पर्यावरण : लोगों को बेहतर वातावरण देने के लिए प्रदूषण नियंत्रण पर काम होगा। उपकरण लगाकर मानिटरिग होगी। रोजाना डाटा संबंधित विभागों को भेजा जाएगा और जरूरत के मुताबिक वातावरण संरक्षण के लिए एक्शन लिया जाएगा।

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रिस्पांस सिस्टम : शहर में किसी भी शिकायत के लिए एक नंबर जारी होगा। 24 घंटे सुनवाई होगी। एक्सीडेंट, आग लगने जैसी घटनाओं में तुरंत सहायता उपलब्ध करवाएंगे। एबुंलेंस, पीसीआर, फायर ब्रिगेड से कनेक्ट रहेंगे।

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ई-गवर्नेंस : नगर निगम की सभी सेवाओं को साथ जोड़ा जाएगा। अवैध निर्माण, पानी के बिल, प्रापर्टी टैक्स, जन्म एवं मृत्यु प्रमाणापत्र शाखा, लाइसेंस ब्रांच समेत सभी ब्रांचों के काम पर नजर रहेगी।

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