जालंधर नगर निगम के अधिकारियों के भ्रष्टाचार की खुलेगी पोल, पंजाब मीडियम इंडस्ट्री बोर्ड के पूर्व चेयरमैन लक्की चलाएंगे अभियान

पंजाब मीडियम इंडस्ट्री बोर्ड के पूर्व चेयरमैन मनविंदर सिंह लक्की ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

पंजाब मीडियम इंडस्ट्री बोर्ड के पूर्व चेयरमैन मनविंदर सिंह लक्की ने निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लक्की ने निगम में भ्रष्टाचार व भ्रष्ट अधिकारियों की पोल खोलने के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू करने का एलान कर दिया है।

Rohit KumarSun, 07 Mar 2021 08:33 AM (IST)

जालंधर, मनोज त्रिपाठी। पंजाब मीडियम इंडस्ट्री बोर्ड के पूर्व चेयरमैन मनविंदर सिंह लक्की ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। निगम अधिकारी के साथ हुई धक्कामुक्की के चलते लक्की की चेयरमैनी की कुर्सी चली गई और कांग्रेस भी उनके साथ खड़ी नहीं हुई। नतीजतन कुछ दिनों तक शांत रहने के बाद लक्की ने निगम में भ्रष्टाचार व भ्रष्ट अधिकारियों की पोल खोलने के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू करने का एलान कर दिया है।

अगर यह हस्ताक्षर अभियान लंबा चल गया तो लक्की का सियासी कद तो बढ़ेगा ही, साथ ही नगर निगम के तमाम भ्रष्ट अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पोल भी खुलनी तय है। निगम की कारगुजारी को लेकर चुप्पी साधे बैठे तमाम कांग्रेस पार्षदों सहित अन्य नेता भी अभियान के लपेटे में आ सकते हैं। इसमें से कई चुनावी मुद्दे भी निकलना तय है। यही वजह है कि मेयर ने लक्की के अभियान पर नजर रखनी शुरू कर दी है।

बांके-बिल्लू की दोस्ती में दरार
मामला भाजपा के दो दिग्गज नेताओं से जुड़ा हुआ है। कभी जिगरी दोस्त के रूप में पहचान रखने वाले ये दोस्त आज एक दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते हैं। नार्थ हलके से संबंधित दोनों दोस्तों की दोस्ती में काफी दिनों से दरार आ गई है। क्रिकेट की एक ही टीम से दोनों की शुरू हुई राजनीति ने पहले एक को हलके की नुमाइंदगी दी तो दूसरे को शहर की नुमाइंदगी मिली।

बांके व बिल्लू के नाम मशहूर जोड़ी के बीच किस बात को लेकर दरार आई है, इसकी खोजबीन सत्ता के गलियारों में तेजी के साथ सियासी पंडित कर रहे हैं, लेकिन कुछ तो ऐसा हुआ है जिससे दोनों एक दूसरे से दूरी बना रहे हैं। मामला बीते दिनों एक शादी समारोह में खुला, जब दोनों का आमना सामना हुआ और दोनों ने एक दूसरे से नजरें फेर लीं। इसके बाद सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई।

जीपीएस कनेक्शन कमजोर, अधिकारी का तबादला
मामला खाकी की सियासत से जुड़ा हुआ है। जालंधर में कुछ समय पहले तैनात हुए एक बड़े पुलिस अधिकारी का तबादला पुलिस हेडक्वार्टर कर दिया गया है। विवादों के नरेश रहे उक्त अधिकारी के तबादले के पीछे विवादों को ही कारण माना जा रहा है। हालांकि इसकी हकीकत कुछ और ही है। तबादले के बाद पुलिस मुख्यालय में बहस चल रही है कि जिस अधिकारी को मजबूत जीपीएस कनेक्शन के चलते जालंधर में पोस्टिंग मिली थी, आखिर उनका कनेक्शन इतना कमजोर कैसे पड़ गया।

खबरनवीस ने भी इस बाबत चल रही खुसुर-फुसुर को सुना और जीपीएस कनेक्शन के पुराने आंकड़ों की पड़ताल की तो मामले की पोल खुल गई। जांच में पता चला कि साहब विवादित अधिकारी से खुश नहीं थे और इसकी आंच साहब पर भी आने लगी थी। यही कारण रहा कि साहब ने विवादों के नरेश से छुटकारा पाना ही बेहतर समझा और उनका तबादला हो गया।

कमिश्नर के मुंह पर लगा ताला
निगम में बीते दिनों विज्ञापन घोटाला सामने आने के बाद से मेयर जगदीश राज राजा और निगम कमिश्नर आमने-सामने चल रहे हैं। प्रशासनिक व्यवस्था संभालने में माहिर कमिश्नर को मेयर तमाम कोशिशों के बाद जालंधर लाए थे। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, लेकिन अचानक से विज्ञापन घोटाले को लेकर दोनों आमने-सामने हो गए। मेयर ने हाउस की बैठक बुलाकर प्रस्ताव पास करके कार्रवाई के लिए सरकार को फाइल भेज दी, लेकिन कमिश्नर ने फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए।

अब मामला चंडीगढ़ दरबार में है और कमिश्नर की साख भी दांव पर लग गई है। अगर मेयर कार्रवाई करवा लेते हैं तो कमिश्नर की फजीहत होनी तय है। अगर नहीं करवा पाते हैं तो आने वाले चुनाव में भी यह बड़ा मुद्दा बनेगा और तमाम पार्षद इस मुद्दे के साथ खड़े होकर सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। कमिश्नर ने अभी तक इस मामले में मुंह नहीं खोला है।

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