Punjab Minister Portfolios: शिक्षा मंत्री परगट सिंह की पहली चुनौती जालंधर के सरकारी स्कूलों में शिक्षक पूरे करना

नए शिक्षा मंत्री परगट सिंह के लिए सबसे बड़ी चुनौती तो जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरा करना होगा। इसके बाद शहरी स्कूलों में स्पोर्ट्स ग्राउंड की कमी एडिड स्कूलों की बुरी हालत और विरोध कर रहे कर्मचारियों को मनाना शामिल है।

Pankaj DwivediTue, 28 Sep 2021 03:43 PM (IST)
पंजाब के नए खेल और शिक्षा मंत्री परगट सिंह। फाइल फोटो

अंकित शर्मा, जालंधर। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भारतीय हाकी टीम के पूर्व कैप्टन परगट सिंह को खेल मंत्री बनाया गया है, जिनकी इच्छी भी इसी में थे। मगर उन्हें शिक्षा विभाग भी दिया गया है, जिसे लेकर उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जिनमें पांच तो सबसे ही अहम है। जिन्हें लेकर उन्हें विरोध का सामना भी निरंतर अब करना पड़ेगा। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती तो जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरा करना होगा। इसके बाद शहरी स्कूलों में स्पोर्ट्स ग्राउंड की कमी, एडिड स्कूलों की बुरी हालत और विरोध कर रहे कर्मचारियों को मनाना शामिल है। 

पहली चुनौती: जालंधर के स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद भरना

अपनी होम ग्राउंड यानीकि अपने जिले जालंधर के सरकारी स्कूलों में लगभग 30 फीसद शिक्षकों की कमी है। ऐसे में शिक्षकों की कमी को पूरा कर खाली पदों को भरना सबसे अहम हैं। रूरल बेल्ट में शिक्षकों की कमी का रेशो 40 से 45 फीसद तक पहुंच जाता है। रूरल बेल्ट में में नकोदर, फिल्लौर, लोहियां, शाहकोट, फिल्लौर, नूरमहल आदि शामिल हैं।

दूसरी चुनौती: शहरी स्कूलों में ग्राउंड की समस्या

परगट सिंह को खेल मंत्री भी बनाए जाने से स्कूलों से ही खेल का स्तर बेहतर बनेंगा, क्योंकि स्कूलों में खेल को सुधारने के लिए ग्राउंड्स बनाई जा रही हैं, मगर चुनौती यह हैं कि अधिकतर शहरी स्कूलों में जगह कम होने की वजह से वहां ग्राउंड ही नहीं हैं।

तीसरी चुनौती: एडिड स्कूलों को बचाने का विरोध, सबसे ज्यादा यहीं

पंजाब में करीब 400 एडिड स्कूल हैं और इनमें 50 जालंधर में हैं। इन स्कूलों में 2003 के बाद से शिक्षकों की भर्ती बंद हुई पड़ी हैं। जिस वजह से अधिकतर स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। पंजाब एडिड स्कूल कर्मचारियों की प्रिंसिपल से लेकर दर्जाचार कर्मचारियों की यूनियन जालंधर से ही हैं और यहीं से पंजाब भर में विरोध की रणनीतियां बनती हैं। जिसे लेकर लंबे समय से विरोध करते आ रहे हैं।

चौथी चुनौती: एसएसए रमसा दफ्तरी कर्मचारियों और आंगनवाड़ी वर्करों का विरोध

एसएसए रमसा अध्यापकों को 2018 में शिक्षा विभाग में रेगुलर कर दिया गया था, मगर दफ्तरी कर्मचारियों को नहीं। जिसे लेकर सबसे पहले जालंधर से ही विरोध शुरू हुआ था। ऐसे में विधायक परगट सिंह को दफ्तरी कर्मचारियों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। 

पांचवीं चुनौतीः इसी तरह, आंगनवाड़ी वर्करों की मांगों का विरोध भी सबसे अहम रहेगा क्योंकि उनकी तरफ से निरंतर प्री प्राइमरी कक्षाओं का विरोध किया जा रहा है। जिसे लेकर उनकी मांग है कि एक तो भत्ता बढ़ाया जाए और प्री प्राइमरी क्लासें आंगनवाड़ी में वापिस दी जाए।

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