जालंधर में 40 फीसद से कम नतीजों वाले स्कूलों को डीईओज करेंगे आईडेंटीफाई, सुधार के लिए करेंगे प्लानिंग

जालंधर में शिक्षा विभाग 40 फीसद से कम नतीजे देने वाले स्कूलों की आइडेंटीफाई करेंगे।

जालंधर में अब शिक्षा विभाग की 40 फीसद से कम नतीजे देने वाले स्कूलों की आइडेंटीफाई करेंगे। ताकि उनकी परफार्मेंस को सुधार कर मिशन शत-प्रतिशत को साकार बनाया जा सके। यह नतीजों की पर्सेंटज दिसंबर-2020 टेस्ट के आधार पर की जाएंगी।

Publish Date:Sat, 23 Jan 2021 09:22 AM (IST) Author: Vinay kumar

जालंधर [अंकित शर्मा]। जालंधर में अब शिक्षा विभाग की 40 फीसद से कम नतीजे देने वाले स्कूलों की आइडेंटीफाई करेंगे। ताकि उनकी परफार्मेंस को सुधार कर मिशन शत-प्रतिशत को साकार बनाया जा सके। इसके लिए पढ़ो पंजाब-पढ़ाओं पंजाब प्रोजेक्ट में ऐसे स्कूलों की पहचान कर उनपर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। यह नतीजों की पर्सेंटज दिसंबर-2020 टेस्ट के आधार पर की जाएंगी, जहां 40 फीसद से कम नतीजे वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। ऐसे विद्यार्थियों के नतीजों को सुधारने के लिए योजनागत तरीके से प्लानिंग की जानी चाहिए। ताकि विद्यार्थियों की कमियों दूर हों और उनकी परफार्मेंस में सुधार आए। प्रयास मैरिट को बढ़ाने के लिए किया जाना है, ताकि मैरिट में अधिक से अधिक विद्यार्थियों को शामिल किया जाए। जो विद्यार्थी मैरिट में ला सकते हैं, बस उन पर ध्यान देने की जरूरत है। इसका खास ध्यान रखें। सभी एक सप्ताह तक सारी रिपोर्ट तैयार करके मिशन शतप्रतिशत को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करना यकीनी बनाएं।

विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब होने के कारणों को भी जानें

सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को उन स्कूलों की भी पहचान करें कि जहां विद्यार्थियों की हाजरी मौजूदा समय में कम है, विद्यार्थी ज्यादातर गैर हाजिर रहते हैं। उनके विद्यार्थियों के अभिभावकों से संपर्क कर विद्यार्थियों को जागरूक करें, ताकि उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार की कमी न रहे। इसके अलावा जिन स्कूलों में अध्यापकों की कमी हैं, उन पर भी गौर करें। क्योंकि अध्यापकों के न होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर सारी स्थितियों पर नजर रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें।

राज्य शिक्षा खोज और सिखलाई परिषद पंजाब डायरेक्टर की तरफ से हिदायतें जारी की गई हैं कि सभी जिला शिक्षा अधिकारी, उप जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लाक नोडल अफसर, जिला मेंटोर (डीएम), ब्लाक मेंटोर (बीएम), शिक्षा सुधार टीम मैंबर, जिला नोडल अफसर के पास ऐसे स्कूलों की रिपोर्टें होनी चाहिए। ताकि लिस्टों के आधार पर विद्यार्थियों पर फोक्स किया जाए।

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