तांबा, पीतल और कांस्य के बर्तनों का लौट रहा दौर, स्वाद से ज्यादा सेहत को तरजीह दे रहे लोग Jalandhar News

जालंधर, [शाम सहगल]। धनतेरस को सिर्फ तीन दिन शेष हैं। धनतेरस पर सोना चांदी के साथ-साथ बर्तनों की खरीदारी को भी शुभ माना जाता है। इस बार ग्राहक स्वाद से ज्यादा सेहत को तरजीह दे रहा है। यही कारण है कि बाजार में इन दिनों स्टील व नॉनस्टिक की बजाय तांबा, पीतल व कांस्य के बर्तनों की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसी कारण शहर के बर्तन बाजार में इन धातुओं से बने बर्तनों को प्रमुखता के साथ डिस्प्ले किया गया है।

हालांकि, दिखने में अधिक आकर्षक होने के चलते स्टील के बर्तनों की मांग भी फिलहाल बनी हुई है। लिहाजा, सेहत के प्रति जागरूक लोग पारंपरिक धातुओं की खास मांग कर रहे हैं। थर्मस से लेकर गिलास व चम्मच से लेकर वाटर कूलर तक सब तांबे का फेस्टिवल को लेकर लोगों का रूझान देखते हुए बर्तन बाजार में आपको थर्मस से लेकर गिलास व चम्मच से लेकर वाटर कूलर तक तांबे में मिल जाएंगे। इसके अलावा केतली, कप व यहां तक कि प्लेटें भी तांबे में उपलब्ध हैं।

भाजी के लिए पीतल है खास

सेहत को लेकर जागरूक हो रहे लोग भाजी तैयार करने के लिए स्टील की जगह पीतल के बर्तनों को प्राथमिकता दे रहे है। अधिक हीट सहन न कर पाने के चलते लोग तांबे की जगह पर पीतल के बर्तनों में भोजन तैयार करने को तरजीह दे रहे हैं। इसके लिए मार्केट में पीतल की कढ़ाई, पतीला व फ्राईपैन से लेकर कई तरह के बर्तन मौजूद हैं।

होटलों में भी तांबा बेस बर्तनों की मांग बढ़ी

होटल व रेस्टोरेंट में भी तांबा बेस वाले बर्तनों की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि ऊपरी हिस्सा स्टील में ही रखा जाता है, लेकिन बेस तांबा या पीतल की मांग की जा रही है।

धार्मिक दृष्टि से भी है महत्वपूर्ण

इस बारे में श्री गोपी नाथ मंदिर, सकुर्लर रोड के प्रमुख पुजारी पंडित दीन दयाल शास्त्री बताते हैं कि पीतल का बर्तन देवगुरु ब्रहस्पति को समर्पण होता है। बृहस्पति ग्रह की शांति के लिए पीतल के बर्तन का इस्तेमाल लाभकारी होता है। इसके अलावा शादी के समय कन्यादान के दौरान पीतल का कलश प्रयोग किया जाता है। शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए पीतल का कलश महत्वपूर्ण होता है। पीतल का रंग पीला होने के चलते आंखों की रोशनी तेज करने में भी यह सहायक है। अरोग्यता के साथ-साथ पेट से गैस दूर करके शरीर में ऊर्जा पैदा करने में सहायक है।

बीमारियां दूर भगाता है तांबे के बर्तन में भोजन का सेवन

आयुर्वेदिक डॉक्टर दविंदर अरोड़ा बताते हैं कि तांबे के बर्तनों में भोजन का सेवन करने से शरीर में कॉपर की कमी पूरी होती है। तांबे के बर्तन में रखे गए पानी से सभी प्रकार के बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। जो डायरिया व पीलिया सहित पेट संबंधी रोगों को पैदा नहीं होने देता। वहीं, थॉयरॉयड से निपटने में भी सहायक है। इसके अलावा एनीमिया की समस्या, त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों से भी रक्षा की जा सकती है।

समय के साथ हुआ परिवर्तन

शर्मा बर्तन स्टोर, बर्तन बाजार के अनिल शर्मा लाडी बताते हैं कि समय के साथ लोगों की मांग में परिवर्तन आया है। कम संख्या में ही सही, लेकिन लोग तांबा, पीतल व कांस्य के बर्तनों की मांग कर रहे हैं। यही कारण है कि कई ब्रांडेड कंपनियों ने हर आकार में वेरायटी उतारी है। जिसमें चम्मच से लेकर कड़ाही व गिलास से लेकर थर्मस तक शामिल है।

स्टील व नॉन स्टिक का नुकसान

कंबोज क्लीनिक के डॉ. रमेश कंबोज बताते हैं कि स्टील, एल्युमीनियम तथा नॉन स्टिक बर्तनों में तैयार किए गए भोजन की गुणवत्ता न के बराबर रहती है। कारण, इन धातुओं से कण पेट में अनपच की समस्या पैदा करते हैं। लिहाजा, लोहे के बर्तन में तैयार भोजन आयरन की कमी पूरी करता है व पीतल के बर्तन पौष्टिकता बनाए रखता है। यहां तक कि तांबा, पीतल व लोहे के बर्तनों में तैयार भोजन की गुणवता भी लंबे समय तक बनी रहती है।

यह हैं दाम

(प्रति किलो में) तांबे के बर्तनों का दाम : 700 रुपये

कांस्य के बर्तन : 700 रुपये

पीतल के बर्तन : 450 रुपये

स्टील के बर्तन : 220 से लेकर 280 रुपये

सिल्वर के बर्तन : 230 से लेकर 280 रुपये

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