बिना एजेंसी, डिस्ट्रीब्यूटर बैक डोर से बिक रही ड्रैगन डोर, जानें कैसे चलता है सप्लाई का खेल

जालंधर [शाम सहगल]। प्रतिबंधित होने के बावजूद ड्रैगन डोर की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। थोक से लेकर रिटेल तक ड्रैगन डोर 'बैक डोर' से धड़ल्ले से बेची जा रही है। शहर में ड्रैगन डोर की बिक्री के लिए ना तो कोई डिस्ट्रीब्यूटर है व न कोई एजेंसी। फिर भी ड्रैगन डोर की बिक्री का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार इसकी दिल्ली लाकर इसकी लोकल बाजार में सप्लाई की जाती है। पुलिस और लोगों की नजर से बचाकर सारी कार्रवाई रात के अंधेरे में अंजाम दी जाती है।

सरकार ने ड्रैगन डोर के नुकसान को देखते हुए इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके लिए पुलिस समय-समय पर दुकानों पर जाकर जांच भी करती है। ये अलग बात है कि मोटी कमाई के चक्कर में दुकानदारों का मोह ड्रैगन डोर को लेकर भंग नहीं हो रहा है। यही कारण है कि प्रतिबंधित ड्रैगन डोर के कारण दुर्घटनाओं का सिलसिला भी निरंतर जारी है। यही नहीं, ड्रैगन डोर की बिक्री को लेकर दुकानदारों ने खासा नेटवर्क बना रखा है। जिसके तहत इसकी सप्लाई शहर में की जा रही है।

एजेंट देर रात देते हैं डोर की सप्लाई

शहर के कई इलाकों में ड्रैगन डोर के थोक विक्रेताओं को देर रात इसकी सप्लाई दी जाती है। बताया जा रहा है कि यह एजेंट दिल्ली से थोक में ड्रैगन डोर लेकर शहर में सप्लाई करते हैं। पुलिस की नजर से बचने के लिए ये कम मात्रा में ड्रैगन डोर की सप्लाई करते हैं। दिल्ली से मनियारी के सामान के साथ ड्रैगन डोर के गट्टू लाए जाते हैं।

रिटेल दुकानदारों ने निकाला नायाब तरीका

ड्रैगेन डोर की बिक्री को लेकर सख्ती के चलते रिटेल कारोबारियों ने इसकी बिक्री का नायाब तरीका निकाला है। जिसके तहत वह डोर की बिक्री दुकान से चंद दूरी पर खड़ी कार से करते हैं। शहर में गुरु बाजार, शेखां बाजार, इमामनासिर, गुड़ मंडी व चरणजीतपुरा सहित कई इलाकों में ड्रैगन डोर की बिक्री धड़ल्ले के साथ की जा रही है। बताया जा रहा है कि दुकान पर से अपने विश्वास वाले ग्राहक से पैसे ले लिए जाते हैं, जबकि ड्रैगन डोर दुकान से चंद दूरी पर खड़ी कार की डिग्गी से निकालकर बेची जाती है। यही नहीं कई दुकानदार तो ग्राहक से पैसे वसूलने के बाद उनके घर तक जाकर भी सप्लाई दे रहे हैं।

केवल देसी डोर की करते हैं बिक्री

इस बारे में चरणजीतपुरा के दुकानदार दीपक महेंद्रू बताते हैं कि वह केवल देसी डोर (मांजा) की ही बिक्री करते हैं। कारण, ड्रैगन डोर बेचना केवल गैरकानूनी ही नहीं बल्कि घातक भी है। जिसके चलते वह लंबे अर्से से ड्रैगन डोर से तौबा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर केवल देसी डोर की ही बिक्री की जाए तो स्वाभाविक है ग्राहक ड्रैगेन डोर की कभी मांग ही नहीं करेगा।

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