पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार, सिद्धू बने असली सरदार, गुरु का सुपर सीएम जैसा रुतबा

Punjab Government पंजाब में चरणजीत सिंह चन्‍नी की सरकार है लेकिन आम चर्चाएं हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू ही इसके असली सरदार हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि चन्‍नी सीएम हैं लेकिन सिद्धू का सुपर सीएम जैसा रुतबा दिख रहा है।

Sunil Kumar JhaThu, 23 Sep 2021 05:42 PM (IST)
पंजाब के मुख्‍यमंत्री चरणजीत सिंह चन्‍नी के साथ पंजाब कांग्रेस अध्‍यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटो)

जालंधर , [मनोज त्रिपाठी]। Punjab Super CM: पंजाब में चरणजीत सिंह चन्‍नी की सरकार है, लेकिन लोगों को नवजोत सिंह सिद्धू ही इसके असली सरदार नजर आ रहे हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि चन्‍नी पंजाब के मुख्‍यमंत्री हैं, लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू का रुतबा 'सुपर सीएम' जैसा दिख रहा है। दरअसल पंजाब में सुपर सीएम का कल्चर नया मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नहीं बदल पाया है।

नहीं बदला पंजाब में सरकार का कल्चरः चन्नी सीएम, लेकिन सिद्धू सुपर सीएम

अकाली-भाजपा गठबंधन से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की दो बार की सरकार हो या फिर इस बार नए मुख्यमंत्री बने चरनजीत सिंह चन्नी की सरकार हो, सभी में सुपर सीएम का अघोषित पद बरकरार ही रहा है। इस बार पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू सुपर सीएम की भूमिका में नजर आने लगे हैं।

तबादलों को लेकर सिद्धू के दरबार में नतस्तक होने लगे ब्यूरोक्रेट

चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के तीन दिन में ही सरकार के स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल को लेकर लिए गए तमाम फैसलों में सिद्धू की झलक दिखाई दे रही है। यही वजह है कि ब्यूरोक्रेसी में इसे लेकर खासी चर्चाएं हैं और मनचाहे पद की दौड़ में शामिल तमाम ब्यूरोक्रेट्स ने सिद्धू के दरबार में किसी न किसी का सहारा लेकर हाजिरी लगानी शुरू कर दी है। एक सप्ताह में ही पंजाब भर में यह मैसेज जाने लगा है कि भले ही चन्नी की सरकार को, लेकिन सिद्धू इस सरकार के सरदार हैं।

बुधवार को अमृतसर स्थित श्री दुगर्याणा तीर्थ में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ नवजोत सिंह सिद्धू। 

चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जिस प्रकार से सिद्धू ने अपने संबोधन में चन्नी को मुख्यमंत्री की बजाय 'चन्नीभाई' कहकर संबोधित किया था। उसी से सियासी जानकारों ने यह आकलन लगा लिया था कि चलनी तो सिद्धू की ही है। पहले ही दिन से सिद्धू विभिन्न बयानों में यही इसारों के जरिए यही संदेश दे रहे हैं कि चन्नी उनकी वजह से मुख्यमंत्री बने हैं। उसके ऊपर अगले विधानसभा चुनाव सिद्धू की अगुवाई में लड़ने को लेकर पंजाब कांग्रेस प्रधान हरीश रावत के बयान ने भी सिद्धू को नई सरकार में मजबूत कर दिया है। सुनील जाखड़ ने रावत के बयान का विरोध किया था और उसे नए मुख्यमंत्री को कमजोर करने वाला बताया था, जो अब नजर भी आने लगा है। हाल ही में प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों के किए गए तबादले भी इसी तरफ इशारा कर रहे हैं।

अमृतसर में श्री राम तीर्थ में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू। 

एक महीने बाद ही दोबारा अमृतसर का कमिश्नर लगाया डा.गिल को

बीते दिन जालंधर के पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल को एक महीना एक दिन बाद ही बदलकर दोबारा अमृतसर में तैनात कर दिया गया। जालंधर में तैनात रहे पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर को तय वायदे के मुताबिक पहले लुधियाना में डीआइजी फिर पुलिस कमिश्नर तैनात किया गया। नौनिहाल सिंह को जालंधर में पुलिस कमिश्नर तैनात किया गया। डा. गिल के साथ सिद्धू की नजदीकियत व उनकी कार्यशैली सिद्धू को पसंद होने के कारण उन्हें अमृतसर तैनात किया गया।

ट्रस्ट के चेयरमैन को हटाकर अपने करीबी को चेयरमैन बनवाया सिद्धू ने

बुधवार को जब पूरी सरकार अमृतसर में थी तो इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन दिनेश बस्सी को हटाकर सिद्धू ने अपने करीबी दमनदीप सिंह को ट्रस्ट का चेयरमैन नियुक्त करवा दिया। जालंधर में ही तैनात एक अन्य आईएएस ने अमृतसर का डीसी लगने के लिए सिद्धू खेमे में पैठ बनानी शुरू कर दी है। उम्मीद है कि दो चार दिनों में ही उन्हें भी अमृतसर का डीसी लगा दिया जाएगा।

बुधवार को श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्तक होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए पीपीसीसी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू। साथ हैं मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी।

डीजीपी की तैनाती को लेकर सिद्धू व चन्नी में फंसा पेंच

मुख्यमंत्री बनने के बाद जिस प्रकार से डीजीपी की तैनाती को लेकर चन्नी व सिद्धू के बीच पेंच फंसा है उसने भी 'सुपर सीएम' की तस्वीर काफी हद तक क्लीयर कर दी है। चन्नी अंदरखाते 1988 बैच के आईपीएल इकबाल प्रीत सिंह सहोता को डीजीपी लगाना चाहते हैं,लेकिन सिद्धू का जोर वरिष्‍ठता में सहोता से वरिष्ठ 1986 बैच के आईपीएस सिद्धार्थ चटोपाध्याय को डीजीपी बनाने पर है।

चटोपाध्याय ने ड्रग्स के मामले को लेकर हाईकोर्ट में पूर्व डीजीपी सुरेश अरोड़ा व मौजूदा डीजीपी दिनकर गुप्ता तथा एक अन्य आइपीएस की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी सील बंद रिपोर्ट सौंपी थी, जो आजतक नहीं खुल पाई है। अगर यह रिपोर्ट खुलती तो पुलिस महकमे के कई आला अधिकारी व मंत्रियों की सांठगांठ का पर्दाफाश हो सकता था। चटोपाध्याय इसके बाद से ही कैप्टन अमरिंदर सिंह के निशाने पर रहे थे।

श्री हरिमंदिर साहिब में पंजाब महिला कांग्रेस की प्रधान ममता दत्ता, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ पीपीसीसी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू।

वरिष्ठता क्रम को किनारे करके कैप्टन सरकार ने दिनकर गुप्ता को डीजीपी का पद दिया था। इससे कैप्टन के करीबी रहे मोहम्मद मुस्तफा भी नाराज चल रहे हैं। सहोता को डीजीपी बनाए जाने को जट्ट अधिकारियों की लाबी भी विरोध में है। चन्नी पहले ही अनुसूचित जाति से संबंधित हुसन लाल को अपने साथ तैनात कर चुके हैं।

अगर सहोता को भी डीजीपी बनाया जाता है तो इसका मैसेज बाकी अधिकारियों में गलत जाएगा। वरिष्‍ठता में सहोता से ऊपर चटोपाध्याय व वीके भांवरा है। वीके भांवरा 2017 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की सिफारिश पर बतौर डीजीपी अपनी सेवाएं दे चुके हैं और उन्हें अनुभव भी है, लेकिन सिद्धू चट्टोपाध्य़ाय को ही चाहते हैं।

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पंजाब में नया नहीं है सुपर सीएम का कल्चर

2002 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने भरत इंदर सिंह चाहल सुपर सीएम की भूमिका में रहे। चाहल की मर्जी के बिना कैप्टन से शायद की कोई मुलाकात कर पाता हो। विधायकों की कैप्टन से सबसे ज्यादा शिकायतें व नाराजगी इसी बात को लेकर थीं। कैप्टन के सलाहकार के रूप में अधिकारियों के तबादलों से लेकर सरकारी काम में चहल की ही चलती थी। 2006 तक कांग्रेसी विधायकों व नेताओं में इसी मामले को लेकर कैप्टन के खिलाफ जोरदार नाराजगी बढ़ गई, जिसका असर 2007 के चुनाव में दिखाई दिया।

2007 में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार आई तो कुछ समय बाद ही मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ सियासत की बारीकियां सीख रहे सुखबीर सिंह बादल सुपर सीएम की भूमिका में नजर आने लगे। 2012 से 2017  तक सुखबीर डिप्टी सीएम रहते हुए 'सुपर सीएम' की भूमिका में रहे। हालांकि प्रकाश सिंह बादल ने इसे बैलेंस रखने के लिए खुद भी कार्यकर्ताओं व नेताओं के साथ संपर्क बनाए रखा और उनकी सुनवाई करते रहे।

2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद पुरानी गलती को सही करते हुए चाहल को आगे नहीं आने दिया और रवीन ठुकराल को मीडिया सलाहकार बनाकर बैलेंस बना लिया, लेकिन सुरेश कुमार के हाथों में सबसे ज्यादा पावर्स दे दी। अधिकारियों के तबादलों से लेकर तमाम विकास कार्यों में सुरेश कुमार की सहमति जरूरी हो गई। धीरे-धीरे इसे लेकर कांग्रेसी मंत्रिय़ों व विधायकों में कैप्टन के खिलाफ रोष बढ़ता गया।

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इनके किए गए तबादले

-मुख्‍य सचिव विनी महाजन को हटाकर अनुरूद्ध  तिवारी को नया मुख्‍य सचिव बनाया।

- हुसन लाल को मुख्‍यमंत्री का प्रधान सचिव बनाया गया।

- राहुल तिवारी को मुख्‍यमंत्री का विशेष प्रमुख सचिव बनाया गया। तेजवीर सिंह को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव से हटाकर प्रमुख सचिव उद्योग, गुरकीरत किरपाल सिंह को मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव के पद से हटाकर सचिव फूड एंड सप्लाई,केके यादव को विशेष प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री शौकत अहमद को मुख्यमंत्री का अतिरिक्त प्रमुख सचिव, मनकरनवाल सिंह चाहल को मुख्यमंत्री का उप प्रमुख सचिव लगाया गया है।

- सुमित जारंगल को सूचना विभाग का डायरेक्टर, मोहाली के डीसी गिरीश दयालन को हटाकर उनके स्थान ईशा को डीसी मोहाली. दिलीप कुमार को प्रमुख सचिव विज्ञान लगाया गया है। इसके अलावा जालंधर के पुलिस कमिश्नर डा.सुखचैन सिंह गिल को एक महीना एक दिन के अंदर दोबारा अमृतसर का पुलिस कमिश्नर तथा, जालंधर में पुलिस कमिश्नर रहे गुरप्रीत सिंह भुल्लर को लुधियाना का पुलिस कमिश्नर तथा लुधियाना में तैनात नौनिहाल सिंह को जालंधर का पुलिस कमिश्नर लगाया गया है।

 

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