Army Helicopter Crash: कैप्टन जयंत जोशी का शव मिला, बचाव दल को हादसे के 2 महीने 13 दिन बाद सफलता

रणजीत सागर बांध में दुर्घटनाग्रस्त सेना के हेलिकाप्टर के को-पायलट कैप्टन जयंत जोशी के शव को आखिरकार हादसे के ढाई महीने बाद तलाश लिया गया है। उनके पार्थिव शरीर को रविवार दोपहर करीब 2 बजे बाहर निकाला गया।

Pankaj DwivediSun, 17 Oct 2021 05:34 PM (IST)
बचाव दल ने ढाई महीने बाद रणजीत सागर झील से कैप्टन जयंत जोशी का शव बाहर निकाल लिया है।

जासं, पठानकोट। तीन अगस्त को रणजीत सागर डैम में क्रैश हुए सेना के ध्रुव मार्क-3 हेलिकाप्टर में सवार को-पायलट कैप्टन जयंत जोशी का शव आखिरकार हादसे के ढाई महीने बाद बाहर निकाल लिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक शव को रविवार दोपहर करीब 2 बजे बाहर निकाला गया। ज्यादा समय बीत जाने के कारण शव की हालत अत्यंत खराब है। उनके पार्थिव शरीर को पठानकोट सेना अस्पताल में रखवाया गया है।

बता दें कि 3 अगस्त को रणजीत सागर डैम (आरएसडी) झील में बसोहली (जेएंडके) के पुरथू के निकट सेना का ध्रुव एएलएच मार्क-3 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें लेफ्टिनेंट कर्नल एएस बाथ और कैप्टन जयंत जोशी सवार थे। हेलीकॉप्टर ने मामून कैंट से सुबह 8:30 बजे उड़ान भरी थी। एरिया में घने जंगल और झील के इर्द-गिर्द एरिया में रुटीन प्रैक्टिस की जा रही थी। सुबह 10:50 बजे हेलिकाप्टर झील के लेबल से काफी नजदीक से उड़ान पर आ गया था कि अचानक से उसका संतुलन बिगड़ गया और वह झील में गिर गया। 15 अगस्त को बचाव अभियान के दौरान लापता लेफ्टिनेंट कर्नल एएस बाथ का शव बरामद किया गया था। उसके बाद 9 सितंबर को हेलिकाप्टर का बचा मलबा भी ढूंढ़ लिया गया था लेकिन कैप्टन जोशी को खोजने में सफलता नहीं मिल सकी थी। 

मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले थे कैप्टन जयंत जोशी

कैप्टन जयंत जोशी मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत के रहने वाले थे। इस समय उनका पूरा परिवार दिल्ली में हैं। कैप्टन जयंत जोशी की मां जीवन तारा जोशी आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं और कोलकाता में तैनात हैं। हादसे के बाद से परिवार मामून में उसका इंतजार कर रहा था। पिता हरीश, बड़े भाई नील जोशी कई बार इंटरनेट मीडिया पर अपील कर कैप्टन जयंत जोशी को जल्द ढूंढने की अपील कर चुके थे। जयंत प्रतिष्ठित आर्मी पब्लिक स्कूल, धौला कुआं, नई दिल्ली के छात्र थे। बाद में उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्हें 2017 में 9वीं सिख लाइट इंफैंट्री में कमीशन दिया गया था। दो साल बाद वह पठानकोट स्थित 254वें आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में शामिल हो गए थे।

नौ सितंबर को दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के शेष हिस्से बरामद हुए थे

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