पंजाब में भाजपा अपने दम पर लड़ने को तैयार, 60 सीटों पर जीत का गणित लगाया

कृषि कानून रद किए जाने की घोषणा के बाद पंजाब में भाजपा चुनावी मोड में आ गई है। चुनाव से पहले किसी से भी गठबंधन करने की संभावना को दरकिनार करके सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की जा रही है।

JagranTue, 30 Nov 2021 01:31 AM (IST)
पंजाब में भाजपा अपने दम पर लड़ने को तैयार, 60 सीटों पर जीत का गणित लगाया

जगजीत सिंह सुशांत, जालंधर

कृषि कानून रद किए जाने की घोषणा के बाद पंजाब में भाजपा चुनावी मोड में आ गई है। चुनाव से पहले किसी से भी गठबंधन करने की संभावना को दरकिनार करके सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की जा रही है। यही नहीं भाजपा ने करीब 60 सीटें चिन्हित की हैं जिन पर जीत हासिल करने के लिए रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इन 60 सीटों में जालंधर शहर की चार सीटें भी शामिल हैं। भाजपा ने अपने दम पर पंजाब में पहली बार सरकार बनाने के लिए 60 सीटों को ए और बी कैटेगरी में रखा है। ए कैटेगरी में वह सीटें हैं जिन्हें भाजपा आराम से जीत सकती है और बी कैटेगरी में वह सीट हैं जिनमें भाजपा जीत के करीब हैं और जोर लगाकर बी कैटेगरी को ए कैटेगिरी में बदलने के लिए काम करेंगे।

पंजाब में सरकार बनाने के लिए 59 सीट की जरूरत है और अगर भाजपा अकेले दम पर सरकार बनाने पर फोकस कर रही है। जालंधर की चार शहरी सीटों पर रविवार को मंथन करने के बाद भाजपा प्रधान अश्विनी शर्मा ने कार्यकर्ताओं को अपने दम पर चुनाव मैदान में कूदने का आह्वान कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने दो दिसंबर तक जालंधर की चारों शहरी सीटों पर संगठन के गठन की प्रक्रिया पूरी कर लेने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सभी बूथों को 2 दिसंबर तक गठित करके रिपोर्ट देनी है। अभी करीब 70 प्रतिशत बूथों का गठन हुआ है। हर बूथ पर 10 सदस्यीय कमेटी होगी जिसका सीधा सा अर्थ है कि हर 100 व्यक्तियों के पीछे एक कार्यकर्ता तैनात कर दिया जाएगा। दो दिसंबर के बाद अश्विनी शर्मा को जिला इकाई रिपोर्ट करेगी। इसके आधार पर 10 दिसंबर के बाद चारों विधानसभा हलकों वेस्ट, सेंट्रल, कैंट और नार्थ में विशाल बूथ सम्मेलन करवाए जाएंगे। इन बूथ सम्मेलन में केंद्र से बड़े नेता आ सकते हैं। अश्विनी शर्मा ने मीटिग में यह कहा है कि कार्यकर्ता मन में किसी भी तरह की नकारात्मकता लेकर मैदान में जाने के बजाय पूरे जोश के साथ काम करें। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही है, ऐसे में भाजपा हाईकमान अगर गठबंधन का फैसला लेती है तो सीटों को लेकर नए सिरे से प्लानिग करनी पड़ सकती है।

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भाजपा की नजर दूसरी पार्टी के बड़े नेताओं पर

कृषि कानून वापस होने के बाद कम हुए जन विरोध के बीच भाजपा की नजर अब दूसरी पार्टी के बड़े नेताओं पर टिक गई है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले एक महीने में दूसरी पार्टी के कई बड़े नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इनमें कई ऐसे नेता हैं जिनका पंजाब में बड़ा दबदबा है। इन सभी को पार्टी चुनाव में भी उतार सकती है। खासकर देहात की सीटों पर भाजपा का बड़े नेताओं की जरूरत रहेगी क्योंकि इन सीटों पर भाजपा ने अपने दम पर चुनाव नहीं लड़ा है। ऐसे में अगर कई बड़े नेता दूसरी पार्टियों से आते हैं तो भाजपा का रास्ता आसान हो सकता है। नगर कौंसिल के दस महीने पहले हुए चुनाव में भाजपा ने बड़ी गिनती में उम्मीदवार उतारे थे तब कृषि कानून को लेकर प्रचंड विरोध के बावजूद कई इलाकों में भाजपा और भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को अच्छे वोट मिले थे।

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शहरी सीटों पर कई दावेदार, कैंट में भी भाजपा उत्साहित

शहरी सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत नजर आ रही है। इसी वजह से शहरी सीटों पर भाजपा टिकट के लिए कई दावेदार है। जालंधर कैंट सीट पर करीब 15 साल बाद किसी प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के साथ मीटिग की है। सभी को यह संदेश दे दिया है कि शहर की चार सीटों में से कैंट सीट पर सबसे अधिक फोकस रहेगा और इसे हर हाल में जीतना है। कैंट सीट पर अमरजीत सिंह अमरी, दीवान अमित अरोड़ा व अमित तनेजा समेत कई दावेदार हैं। जालंधर सेंट्रल सीट पर पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया सबसे बड़े दावेदार है। प्रदेश भाजपा सचिव अनिल सच्चर और भाजयुमो के पूर्व प्रदेश प्रधान सन्नी शर्मा भी टिकट का दावा रखते हैं। नार्थ के टिकट के लिए सबसे अधिक लड़ाई देखने को मिल सकती है। यहां पूर्व विधायक केडी भंडारी, पंजाब भाजपा के उपप्रधान व पूर्व मेयर राकेश राठौर और पूर्व मेयर सुनील ज्योति बड़े दावेदार है जबकि इनके अलावा भी दावेदारों की लंबी लाइन है। जालंधर वेस्ट हलके में मोहिदर भगत बड़े दावेदार हैं जिन्हें पार्टी नेता शीतल अंगुराल, राबिन सांपला से चुनौती मिल सकती है।

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