जालंधर में पंकस अकादमी का 25वां वार्षिक समारोह आयोजित, विधायक बेरी बोले- अकादमी का गठन पंजाब की धरती पर होना गर्व की बात

जालंधर में पंकस अकादमी की ओर से 25वां वार्षिक समारोह आयोजित किया गया। विधायक बेरी ने कहा कि पंकस अकादमी द्वारा साहित्य कला समाज शिक्षा आदि के क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त लोगों को सम्मानित करने की परंपरा पंजाब की सांस्कृतिक विरासत का ही हिस्सा है।

Vinay KumarTue, 30 Nov 2021 09:41 AM (IST)
जालंधर में पंकस अकादमी का 25वां वार्षिक समारोह आयोजित किया गया।

जागरण संवाददाता, जालंधर। पंजाब के लोगों को इस बात पर गर्व रहेगा कि अपना रजत जयंती समारोह मना रहे हिंदी सांस्कृतिक मंच संस्था पंजाब कला साहित्य अकादमी का गठन एवं संचालन पंजाब की धरती पर हुआ था। पंकस अकादमी द्वारा साहित्य, कला, समाज, शिक्षा आदि के क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त लोगों को सम्मानित करने की परंपरा पंजाब की सांस्कृतिक विरासत का ही हिस्सा है। यह कहना था विधायक राजेंद्र बेरी का, जो पंकस अकादमी के 25वें वार्षिक समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह के दौरान मंच पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पंकस अकादमी के अध्यक्ष सिमर सदोष ने जो परंपरा कायम की है वह उसके साथ है और आजीवन साथ ही चलते रहेंगे। विशेष अतिथि के रुप में पहुंचे पंजाब के पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया ने कहा कि पंकज अकादमी पंजाबी कवि सभा की ही अगली कड़ी है। अपने समय में पंजाब के बहुत बड़े शायर सरदार संतोख सिंह सफरी ने पंजाब के माथे पर जो तिलक सजाया था, पंकस अकादमी के अध्यक्ष व सरदार संतोख सिंह सफरी के सुपुत्र सिमर सदोष उसी परंपरा को आगे चला रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री ठाकुर सत्य प्रकाश ने कहा कि वह पिछले 20 सालों से पंकज अकादमी के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंकस अकादमी ने सभी राज्य और विदेशों में बैठे साहित्यकारों के बीच पुल बनाने का काम किया है। अकादमी के निदेशक डा. जगदीप सिंह ने कहा कि इस वर्ष का रजत जयंती समारोह अपने समय की बहुपक्षीय शख्सियत, शिक्षाविद, खिलाड़ी, संत पुरुष प्रोफेसर संत सिंह जी की पावन स्मृतियों को समर्पित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उनके नाम पर मानव सेवा रतन सम्मान की परंपरा शुरू की गई है, जो आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी। वहीं वरिष्ठ संपादक व पंजाबी विरसा, विरासत का झंडा बुलंद करने वाले सतनाम सिंह मानक ने कहा कि यह बड़ी अच्छी बात है कि पंजाब की धरती से उठी हिंदी साहित्यिक संस्था पंकस अकादमी ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश सेठ ने कहा कि वह 25 वर्ष से इस संस्था के साथ जुड़े हुए हैं। उनका कहना था कि वह संस्था के अध्यक्ष सिमर सदोष के संघर्ष के साक्षी हैं।

समारोह के दौरान पंकस अकादमी के अध्यक्ष सिमर सदोष ने कहा कि प्रोफेसर संत सिंह की स्मृति में मानव सेवा रत्न सम्मान साहित्यकार दविंदर बजाज को दिया गया। आजीवन उपलब्धि सम्मान बंगाल की साहित्यकार डा. बुला कार को दिया गया। मीडिया मैत्री सम्मान हिमाचल प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक हरबंस सिंह ब्रस्कॉन को प्रदान किया गया। वरिष्ठ व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय को हास्य व्यंग्य चेतना अवार्ड, नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक ललित लालित्य को साहित्य साधक सम्मान, मुंबई सिने जगत के पटकथा लेखक और निर्देशक रणवीर पुष्प और आकृति नितिन खुराना को कलाश्री सम्मान दिया गया।

कानपुर के संजय अरोड़ा और सिमी अरोड़ा व जालंधर की डॉक्टर सृष्टि रल्हण को सद्भावना सम्मान प्रदान किया गया। हिमाचल की शिक्षा विद परमजीत कौर को राष्ट्रीय शिक्षा सद्भावना अवार्ड दिया गया। लघु कथा श्रेष्ठि सम्मान हरियाणा की लघुकथा कथाकार डॉक्टर शील कौशिक को दिया गया। सरदार बलविंदर सिंह मन्नी स्मृति सम्मान सुखबीर सिंह म्नी, योगराज सिंह मन्नी, सहज प्रीत सिंह मन्नी को दिया गया। अकादमी का सर्वोच्च अकादमी अवार्ड डा. नलिनी विभा नाजली, कमलेश भारतीय, डा. रमारानी सिंह, मुकेश शर्मा एडवोकेट, प्रोफेसर सीमा जैन को दिया गया। साहित्य श्री सम्मान चेतन चौहान को और विशिष्ट पंकस  अकादमी सम्मान कवयित्री शैलजा शैली, प्रोफेसर गुरप्रीत सिंह, सत्यपाल सिंह सजग, करणवीर सिंह सपरा, राजिंदर सहोता, क्रिकेट कोच रहे जोगिंदर गोखा के सुपुत्र शुभम को दिया गया।

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