गेहूं की खरीद शुरू, छह दिन के बाद भी लिफ्टिंग व पोर्टल बंद

गेहूं की खरीद शुरू, छह दिन के बाद भी लिफ्टिंग व पोर्टल बंद

गेहूं की खरीद शुरू है। हालांकि कंडी में किसान पिछली फसल बीजते हैं इसलिए मंडियों में फसल की आवक धीमी गति से चल रही है। इसके बावजूद मंडी प्रबंधन उदासीन रवैये से काम कर रहा है। यदि यही हालात रहे तो सारी व्यवस्था डगमगा जाएगी।

JagranFri, 16 Apr 2021 06:11 PM (IST)

नीरज शर्मा, होशियारपुर

गेहूं की खरीद शुरू है। हालांकि कंडी में किसान पिछली फसल बीजते हैं इसलिए मंडियों में फसल की आवक धीमी गति से चल रही है। इसके बावजूद मंडी प्रबंधन उदासीन रवैये से काम कर रहा है। यदि यही हालात रहे, तो सारी व्यवस्था डगमगा जाएगी। गेहूं की लिफ्टिंग शुरू नहीं हुई है और छह दिन से पेमेंट वाला पोर्टल अपडेट नहीं हुआ। हर रोज मंडी के मुलाजिम बार-बार इसे चलाने की कोशिश करते हैं, पर सर्वर डाउन होने के कारण यह काम नहीं कर रहा। इसका सीधा असर किसानों की पेमेंट पर पड़ रहा है। यानी अब तक जितना गेहूं खरीदा जा चुका है उसका एक पैसा भी किसानों के खातों में नहीं गया। जब खरीद शुरू हुई थी तब किसानों को प्रशासन ने आश्वासन देते हुए दावा किया कि पेमेंट 24 घंटे में किसानों के खातों में आ जाएगी। किसान परेशान हैं पर उनकी समस्या को कोई समझ नहीं रहा। किसान मंडी में ट्राली भरकर गेहूं तो ला रहा है लेकिन गेहूं बिकने के बाद भी खाली हाथ लौट रहा है। ऐसे हालात में अगली फसल की बिजाई भी प्रभावित होगी।

मंडी में नहीं है दावों के मुताबिक प्रबंध

यदि बात अन्य प्रबंधों की हो तो मंडी में किसानों के लिए सुविधा नाकाफी है। यानी पीने का पानी व शौचालय की व्यवस्था नहीं है। पानी की टंकियां जो लगी है उसे देखकर ऐसे लगता है कि जैसे दशकों से उसमें पानी नहीं भरा गया हो और न सफाई हुई हो। कोरोना काल में सफाई व्यवस्था तो वैसे ही सही होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो शायद अगला पाजिटिव मामला मंडी से आ सकता है इसमें कोई शक नहीं है। वहीं मंडी में किसानों के बैठने के लिए कोई सुविधा नहीं है। किसानों को या तो फसल बिकने तक धूप में ही रुकना पड़ता है या फिर आढ़तियों के दफ्तरों में शरण लेनी पड़ती है। ऐसे में किसान लाचार है, मौके पर मौजूद किसानों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सरकार के दावे ऐवें रोला ही है, पल्ले इन्हां दे कुज नहीं बस लोकां नूं मूर्ख बनाई जांदे ने। किसान बोले, गेहूं ही बिक जाए यही बहुत बड़ी बात है

सुबह 9 बजे मंडी में गेहूं लेकर आया था। काफी देर के बाद जब बोली हुई तो पता चला कि पेमेंट सीधी खातों में जाएगी। पहले आढ़तियों से पैसे मिल जाते थे परंतु आढ़ती भी अब मजबूर हैं। वह तो दो रुपये देने से पहले सोच रहे हैं क्योंकि इस बार सरकार ने जो सिस्टम बनाया है उसमें उनका कुछ लेना देना नहीं है। दफ्तर में जाकर पूछा तो पता चला कि पोर्टल नहीं चल रहा जब चलेगा तब ही पेमेंट होगी।

किसान नवजोत सिंह, मुख्लियाना सुबह से मंडी में हैं, कोई प्रबंध नहीं है। पीने के लिए पानी नहीं, बैठने के लिए जगह नहीं। पता नहीं सरकार किसानों को इंसान क्यों नहीं समझती। हर बार दावे तो ऐसे होते हैं जैसे विदेशों की तर्ज पर काम होगा लेकिन होता बिल्कुल उल्टा है। पानी व बैठने के प्रबंध के दावे हवा बाजी हैं।

किसान हेमंत सिंह, मुख्लियाना गांव बस्सी दौलत खां से पहुंचे लखवीर सिंह से जब मंडी के प्रबंध व सुविधा का सवाल किया तो वह हंस पड़े और बोले, जनाब गेहूं ही बिक जाए यही बहुत है। हालात को देखकर लगता है कि सरकार मूर्ख बना रही है। सीधी खातों में पेमेंट की बात कर रही है। पहले तो आढ़ती से सीधी बात करके पैसे मिल जाते थे। लेकिन अब तो यह भी नहीं पता कि पैसे कहां से आने है किसने देने हैं। पोर्टल सिर्फ नाम के लिए है क्योंकि वह काम तो करता नहीं। मंडी की सड़कें भी हैं टूटी

सरकार के विकास के दावों की पोल मंडी में भीतरी खस्ता सड़कें खोल रही है। पिछले साल से इन सड़कों पर पत्थर डाला गया था और आज तक तारकोल नहीं डली। मंडी से जुड़े कुछ लोगों से पूछा तो उन्होंने बताया कि पहले जब गेहूं की आवक तेज होती थी तो फसल की कचरा सड़क पर डाल दिया जाता था, यानी कुछ जगह और उपलब्ध हो जाती थी। इस बार तो वह भी नहीं है। जब आमद बढ़ेगी तो इसमें कोई दोराय नहीं है कि परेशानी होगी। जल्द होगी लिफ्टिंग शुरू : रजिदर सिंह

मंडी बोर्ड के अधिकारी रजिदर सिंह के बात की गई तो उन्होंने बताया कि लिफ्टिंग जल्द शुरू होगी। उम्मीद है कि दो दिन में यह काम शुरू हो जाएगा। इस बार ठेकेदार बदला है इसलिए देरी हो रही है। इस संबंधी मीटिग भी हुई है, आलाकमान ने जायजा भी लिया है।

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