पुलिस के लिए गले की फांस बनीं कत्ल की गुत्थियां, कई आरोपित गिरफ्त से बाहर

मोहल्ला हरी नगर के रहने वाले युवक आर्यन के कत्ल की गुत्थी से पूरा पर्दा अभी पुलिस ने उठाया भी नहीं था कि टांडा के गांव जौड़ा में किसान परमिदर सिंह का कत्ल हो गया। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के इस मामले में हाथ खाली हैं। पुलिस अभी तक आई-20 कार ट्रेस नहीं कर पाई है।

JagranTue, 16 Nov 2021 10:13 PM (IST)
पुलिस के लिए गले की फांस बनीं कत्ल की गुत्थियां, कई आरोपित गिरफ्त से बाहर

जागरण संवाददाता, होशियारपुर : मोहल्ला हरी नगर के रहने वाले युवक आर्यन के कत्ल की गुत्थी से पूरा पर्दा अभी पुलिस ने उठाया भी नहीं था कि टांडा के गांव जौड़ा में किसान परमिदर सिंह का कत्ल हो गया। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के इस मामले में हाथ खाली हैं। पुलिस अभी तक आई-20 कार ट्रेस नहीं कर पाई है। चश्मदीदों के मुताबिक आरोपित आई-20 कार में सवार होकर आए थे और परमिंदर की गोली मार कर हत्या करने के बाद फरार हो गए। पुलिस चाहे सुरक्षा के जितने भी दावे करे पर सच्चाई किसी से छुपी नहीं है। लगातार कत्ल व अन्य वारदातें हो रही हैं और पुलिस के पास हर वारदात के बाद जांच हो रही का रटा रटाया जवाब देती है। किसी वारदात होने के दो तीन दिन तक तो पुलिस जोर-शोर से जांच का दावा करती है और आरोपितों को जल्द काबू करने का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन समय के साथ-साथ दावें भी फाइल की तरह ठंडे बस्ते में बंद हो जाते हैं। ऐसे कई कत्ल के मामले हैं जिन्हें पुलिस अभी तक ट्रेस ही नहीं कर पाई। यदि कुछ माह पहले हुई वारदातों की बात की जाए तो आर्यन हत्याकांड में चाहे पुलिस ने वारदात को सुलझाने का दावा करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन परिवार वालों के मुताबिक यह कार्रवाई आधी अधूरी है। चूंकि इस मामले में आरोपितों की संख्या चार से अधिक है। चार आरोपित तो वही हैं जो किसी तरह सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए। परंतु जो पर्दे के पीछे के आरोपित हैं वह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। तक कि काबू किए गए आरोपितों से पूछताछ के बाद पुलिस यही साफ नहीं कर पाई है कि आखिर रंजिश किसी बात को लेकर थी। पुलिस ने इस मामले में लिपापोती करते मामले को समेटने की कोशिश की है। वहीं टांडा के गांव जौड़ा में हुए किसान परमिदर सिंह के कत्ल के मामले में पुलिस के पास 24 घंटे बीतने के बाद भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस ने इस मामले में केवल परमिदर सिंह के बेटे अर्शदीप के बयान पर दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों की माने तो हर मामले की जांच लगातार जारी रहती है। कई मामले जल्दी सुलझ जाते हैं और कई मामलों में समय लगता है। समय-समय पर बैठकें होती रहती हैं और रिव्यू किया जाता है। जो भी मामले पेंडिंग है उनकी जांच चल रही है। 24 घंटे बीतने के बाद भी नहीं ट्रेस कर पाई पुलिस आई-20 कार

बता दें कि गत दिवस जौड़ा में हुए किसान परमिदर सिंह के कत्ल के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा है। चश्मदीदों के मुताबिक इस मामले में एक अहम सुराग पुलिस के हाथ लगा था कि परमिदर का कत्ल करने वाले आई-20 कार पर आए थे। जिस कार के बारे में लोग बता रहे हैं उनकी खिड़कियां काले रंग की थीं। परंतु अभी तक पुलिस उस कार को ही ट्रेस नहीं कर पाई है। जिससे पुलिस की चल रही जांच प्रक्रिया किसी से छुपी नहीं है कि पुलिस कितनी गंभीरता से मामले को ट्रेस करने में जुटी हुई है। हालांकि टांडा पुलिस दावा कर रही है कि वह इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही है ताकि पता चलाया जा सके कि कार किस तरह से आई है और वारदात के बाद किस रास्ते से वापस गई।

नतीजे के लिए थानों में इंतजार कर रही हैं फाइलें

हालात यह हैं कि हत्या की गुत्थियां सुलझती नहीं है और नई वारदातें पुलिस की परेशानी बढ़ाने का काम कर देती हैं। कई वर्षों से कुछ चर्चित वारदातें फाइलों की धूल फांक रही हैं। हत्या होने के बाद कुछ दिन तक खाकी तफ्तीश के लिए पूछताछ के नाम पर हवा में तीर चलाती है। मगर रात गई बात गई वाली हालत हो जाती है। पुलिस के उदासीन रवैये से जिले में एक दर्जन से ज्यादा हत्या की वारदातें सुलझी नहीं है। इससे पुलिस की साख पर बट्टा भी लग रहा है। पुलिस का रटारटाया जवाब होता है कि जांच चल रही है।

ये वारदातें अनसुलझी

- 22 अगस्त 2007 : गांव सैंचा में डांसरों की केयर टेकर बलविदर कौर वासी जालंधर की हत्या कर दी गई थी। उसके कातिलों का पता नहीं चल सका।

-19 जून 2008 : गांव मंडियाला में घर के बाहर सो रहे युवक मनोहर सिंह की बेरहमी से की गई हत्या पहेली बनी हुई है।

- 30 अक्टूबर 2009 : जहानखेलां के पास अज्ञात युवती का शव बरामद हुआ था। हत्यारों के सुराग की तो दूर की बात अभी तक शव की शिनाख्त ही नहीं हो पाई।

- 02 दिसंबर 2009 : कस्बा नसराला के समीप झाड़ियों से जली हुई लाश मिली थी। बाद में शव की शिनाख्त रमनदीप कौर वासी जालंधर के रूप में हुई थी। इस मामले में कोई सुराग नहीं मिला।

- 27 दिसंबर 2009 : दीप नगर में कबाड़ी वीरेंद्र प्रसाद को दौड़ा-दौड़ाकर काट डाला। उसकी दुकान से नकदी लूट कर लुटेरे सरेआम फरार हो गए। यह मामला फाइलों में दबकर रह गया।

- 30 दिसंबर 2009 : गांव चक्क साधु के पास युवक का शव बरामद होने से सनसनी फैल गई थी। हत्यारों से गला रेत कर उसे मौत के घाट उतारा था। युवक की पहचान नहीं हो पाई है।

- नौ सितंबर 2010 : अनमोल नगर में आशा राणा नामक महिला की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। लाख दावों के बावजूद पता नहीं चल पाया कि हत्यारे कौन थे।

-सात अप्रैल 2011 : दलजीत कौर वासी हरियाना की घर में दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। हत्यारों का सुराग नहीं लगा।

-24 सितंबर 2016 : भगत नगर वासी बलविदर पप्पी की हत्याकांड की भी पुलिस गुत्थी सुलझाने में फेल साबित हुई।

-जुलाई 2017 : गोबिद नगर में बच्चे दीपक कुमार उर्फ दीपू की हत्या कर दी गई। इसके बाद तो पुलिस दोहरी मुसीबत पड़ गई क्योंकि 24 घंटे में मदन लाल का मर्डर हो गया और दोनों केस पहेली बन हुए हैं।

- 03 जनवरी 2020 : माहिलपुर के गांव चंबलकलां में कुलविदर कौर के कत्ल के मामले में अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। कुलविदर घर में अकेली रहती थी। किसी ने घर में घुसकर उसका कत्ल कर दिया था।

-15 अक्टूबर 2020 : अनखप्रीत उर्फ अनखी मर्डर केस की गुत्थी आज तक पुलिस नहीं सुलझा पाई है, हालांकि मौके से मोबाइल भी मिला था, लेकिन अहम सुराग पाने के लिए मोबाइल का लाक तक नहीं खुलवाया है। अनखप्रीत का लाचोवाल के पास गोली मारकर कत्ल कर दिया गया था।

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