भविष्य के लिए सही नहीं भविष्यवाणी, जलभराव की स्थिति बेहद चिताजनक

इस बार बारिश कम होने के कारण पौंग बांध के जलस्तर में ज्यादा इजाफा नहीं हो पाया जो बेहद चिताजनक है।

JagranPublish:Fri, 27 Aug 2021 06:47 PM (IST) Updated:Sat, 28 Aug 2021 06:29 AM (IST)
भविष्य के लिए सही नहीं भविष्यवाणी, जलभराव की स्थिति बेहद चिताजनक
भविष्य के लिए सही नहीं भविष्यवाणी, जलभराव की स्थिति बेहद चिताजनक

संवाद सहयोगी, दातारपुर : इस बार बारिश कम होने के कारण पौंग बांध के जलस्तर में ज्यादा इजाफा नहीं हो पाया जो बेहद चिताजनक है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो अगले साल मध्य जून तक सिचाई के लिए राजस्थान, पंजाब, हिमाचल व हरियाणा को पानी की भारी किल्लत होगी और बिजली उत्पादन भी बुरी तरह से प्रभावित होगा। आंकड़ों की नजर से देखें तो शुक्रवार को बांध में सुबह छह बजे तक 39,525 क्यूसिक पानी की आमद हुई और बिजली घर की टरबाइनों के माध्यम से 8509 क्यूसिक पानी छोड़ा गया व जलस्तर 1338.64 फीट रहा। इस माह में अब तक बांध में मात्र 12 फीट पानी की ही बढ़ोतरी हुई है। कमजोर मानसून की वजह से भविष्य में हाहाकार मचने की संभावना बढ़ गई है।

इस साल 29 फीट पानी का लेवल है कम

बांध में 2020 में 27 अगस्त को 1367.03 फीट पानी था और 37,110 क्यूसिक पानी की आमद हो रही थी व 6007 क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा था। इस हिसाब से विगत वर्ष की तुलना में 29 फीट पानी के लेवल का अंतर है। जबकि इस साल एक अगस्त को बांध की महाराणा प्रताप सागर झील में सुबह छह बजे 1326.30 फीट जलस्तर रिकार्ड किया और मात्र 41,478 क्यूसिक पानी की आमद हो रही थी। यहां से 3011 क्यूसिक पानी शाह नहर बैराज में छोड़ा जा रहा था।

जलभराव के लिए बचे 24 दिन

बांध में जलभराव सीजन के लगभग 66 बीत चुके हैं और केवल 24 दिन ही बाकी है। ऐसे में 1390 या 1395 फीट तक जलभराव कैसे हो सकेगा। नतीजतन पूरे साल के लिए बिजली उत्पादन और सिचाई में असुविधा होना लाजिमी है। ऐसा मानसून की बेरुखी और मौसम विभाग की भविष्यवाणी असत्य साबित होने के कारण हुआ है। ं 1390 से 1395 फीट तक जलभराव होना मानसून की जोरदार बारिशों से ही संभव है, जो अब तक की स्थिति को देखते हुए बिलकुल असंभव नजर आ रहा है। वहीं बांध के स्पिल वे गेट जो 1365 फीट की उंचाई पर स्थित हैं से जलस्तर 27 फीट दूर रहा और वांछित जलस्तर का आंकड़ा अभी कोसों दूर है।