आठ साल बाद एक अमूर फाल्कन परिदे ने बनाया आशियाना

यूं तो पूरे मध्य एशिया साइबेरिया तिब्बत तथा अन्य देशों से सर्दी के मौसम में पक्षी आना शुरू हो चुके हैं।

JagranSat, 27 Nov 2021 03:47 PM (IST)
आठ साल बाद एक अमूर फाल्कन परिदे ने बनाया आशियाना

सरोज बाला, दातारपुर : यूं तो पूरे मध्य एशिया, साइबेरिया, तिब्बत तथा अन्य देशों से सर्दी के मौसम में प्रवासी पक्षी हजारों मीलों की उड़ान के बाद ब्यास नदी पर बनाए गए पौंग बांध की महाराणा प्रताप सागर झील में मध्य अक्टूबर से आते हैं और मध्य मार्च में वतन वापस चले जाते हैं।

परन्तु इस साल पूर्वी अफ्रीका से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर एक मेहमान पक्षी रामसर वेटलैंड पौंग झील में पहुंचा है। यह पक्षी बहुत विशेष है। पौंग झील में यह पक्षी लंबे अंतराल के बाद पहुंचा है। इस पक्षी की आमद से वन्य प्राणी विग के अधिकारियों में खासा उत्साह है।

पूर्वी अफ्रीका के इस 170 ग्राम भार वाले अमूर फाल्कन पक्षी ने इतनी लम्बी परवाज की है। पहली बार सन 2013 में इस प्रजाति के तीन पक्षी पोंग झील में अपना आशियाना बनाया था, उनमे से एक नर और दो मादा पक्षी थे, उन्हें यहां जीपीएस टैग लगाया गया था जिससे इनकी रफ्तार और स्थिति का पता चल सका। उसके बाद इन पक्षियों ने आना बंद कर दिया। तब से अब आठ सालों बाद यह पक्षी पौंग झील में पाया गया है।

अभी तक वन्य प्राणी विग को इस प्रजाति का एक ही पक्षी दिखा है। टीमें इस प्रजाति पर विशेष नजर रखे हुए हैं। उस समय इस पक्षी ने 120 घंटे लगातार उड़ान भरकर 5640 किलोमीटर का सफर तय किया था। भारतीय वन्य जीव संस्थान दिल्ली के विशेषज्ञ डा. आर सुरेश ने टैग के माध्यम से उन्हें ट्रेस करते हुए पाया कि इन पक्षियों ने नागालैंड से समालिया तक लगातार 120 घंटे उड़ान भरी और यह पक्षी प्रति घंटे 47 किलोमीटर दूरी तय करता है। शोध में यह बात भी पता चली है कि यह पक्षी एक माह के भीतर आधी दुनिया का चक्कर लगा सकता है, यानि 22 हजार किलोमीटर एक माह में।

पौंग झील में विभिन्न प्रजातियों के करीब 40 हजार प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं। दिसंबर तक इनकी संख्या एक लाख से भी ज्यादा पहुंच जाएगी। पौंग झील में बार हेडेड गूज व कर्मोनेंट प्रजाति के प्रवासी पक्षी सबसे ज्यादा संख्या में पहुंचे हैं। झील के साथ प्रवासी पक्षियों की अठखेलियों का नजारा नजदीक से देखने के लिए वन्य प्राणी विग ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। मोटर बोट के अलावा पौंग झील के मुख्य द्वार सुगनाड़ा गांव में पर्यटक पार्क व पर्यटक हट्स भी तैयार किए जा रहे हैं।

वन्यप्राणी विग मंडल हमीरपुर के डीएफओ राहुल रोहाणे ने बताया पर्यटकों की सुविधा के लिए बनी एक और आधुनिक मोटर बोट दिसंबर महीने में झील में उतार दी जाएगी। अमूर फाल्कन पक्षी अभी तक एक ही देखा गया है, जोकि लंबे समय के बाद झील में पहुंचा है। आने वाले दिनों में इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा वन्य प्राणी विभाग इन मेहमान परिदों की रखवाली के लिए हर समय जागरूक हैं। रोहाने ने कहा अभी इस झील में कोई भी केस बर्ड फ्लू का नहीं आया है जबकि विगत साल यहां पांच हजार से ज्यादा मेहमान परिदे इस बीमारी से मरे थे।

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