मतदाताओं ने नहीं दिखाया उत्साह, 59 फीसद पर सिमटा, पिछले चुनाव के मुकाबले 13.54 कम

जागरण टीम, मुकेरियां (होशियारपुर): मुकेरियां में उपचुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। इस बार हुए उप चुनाव में मतदाताओं ने उत्साह कम दिखाया। मतदाताओं के वोटिग प्रक्रिया में दिलचस्पी कम दिखाने से 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले वोटिग प्रतिशत औंधे मुंह गिर गया। उप चुनाव में मतदान 59 फीसद पर ही सिमटकर रह गया। जबकि 2017 में विधानसभा चुनाव में मुकेरियां के मतदाताओं ने उत्साह दिखाते हुए 72.54 फीसद मतदान किया था। इस बार उप चुनाव में 13.54 फीसद मतदान कम हुआ। विधानसभा के उप चुनाव में मतदाताओं का जोश मौसम की तरह ठंडा ही रहा। चुनाव में सबसे अच्छी बात यह रही कि कहीं पर कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। मतदाताओं की खामोशी ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को चक्कर में डाल दिया है क्योंकि यही अंदाजा नहीं लगाया जा रहा है कि इसका फायदा किसे और किसे नुकसान होगा।

सुबह सात बजे मतदान प्रक्रिया शुरूहोने पर मतदाताओं ने मतदान प्रक्रिया में दिलचस्पी दिखाई थी। इससे लगा था कि उप चुनाव में विधानसभा चुनाव का भी रिकार्ड टूट जाएगा। मतदान की रफ्तार बाद दोपहर तक भी अच्छी रही, लेकिन शाम ढलने के साथ ही मतदाताओं का जोश भी ढलता गया और मतदान प्रक्रिया की रफ्तार थम गई। कब-कब, कैसे रही मतदान की स्थिति

समय मतदान प्रतिशत

9 बजे तक 12 फीसद मतदान

11 बजे तक 23 फीसद मतदान

1 बजे तक 36.49 फीसद मतदान

3 बजे तक 48.01 फीसद मतदान

5 बजे तक 57.28 फीसद मतदान

6 बजे तक 59 फीसद मतदान 24 को होगी वोटों की गिनती

उप चुनाव में छह प्रत्याशियों के भाग्य ईवीएम में कैद हो गए हैं। मुख्य मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी इंदू बाला और भाजपा प्रत्याशी जंगी लाल महाजन के बीच दिख रहा है। आप प्रत्याशी जीएस मुल्तानी भी दांव भरे हुए हैं। मैदान में कुल छह प्रत्याशी हैं। वोटों की गिनती 24 अक्टूबर को एसपीएन कॉलेज मुकेरियां में होगी। उस दिन यह देखना होगा कि मुकेरियां के मतदाताओं ने किस उम्मीदवार को विजयी सेहरा पहनाकर दीपावली का तोहफा देंगे।

पिछले विधानसभा चुनाव में इस तरह रही थी मतदान की स्थिति

2017 के विधानसभा चुनाव में मुकेरियां के मतदाताओं ने मतदान के लिए उत्साह दिखाया था। हलके में 72.54 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिसमें 1,34,876 वोटरों में से 65,234 पुरुष और 69,641 महिला सहित 1 थर्ड जेंडर ने अपनी वोट का इस्तेमाल किया था। किसानी सीजन और सरकार से नाराजगी से गिरा मतदान

1. किसानों ने मतदान की बजाय फसलों को समेटने को ज्यादा तवज्जो दी।

2. घर-घर सरकारी नौकरी का वादा जो कि पूरा नहीं हुआ।

3. युवाओं को स्मार्ट फोन नहीं मिले।

4. शगुन स्कीम बढ़ाने का वादा पूरा नहीं हुआ।

5. माइनिंग का मुद्दा।

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