फैसले की कापी लेने के चक्कर में हुए दिल के मरीज

फैसले की कापी लेने के चक्कर में हुए दिल के मरीज

हिदी फिल्म दामिनी का एक प्रसिद्ध डायलाग तारीख पर तारीख उस समय जिले के गांव बसराय के रहने वाले सुरजीत सिंह पर फिट होता दिखाई देता है।

JagranFri, 16 Apr 2021 06:27 PM (IST)

बाल कृष्ण कालिया, गुरदासपुर

हिदी फिल्म दामिनी का एक प्रसिद्ध डायलाग तारीख पर तारीख उस समय जिले के गांव बसराय के रहने वाले सुरजीत सिंह पर फिट होता दिखाई देता है। सुरजीत सिंह घरेलू झगड़े के फैसले की कापी लेने के लिए एक साल से एसडीएम आफिस तो कभी सांझ केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं। फैसले की कापी लेने के चक्कर में सुरजीत सिंह टेंशन से दिल के मरीज भी हो चुके हैं।

सुरजीत सिंह का कहना है कि एक तरफ राज्य सरकार एक ही छत के नीचे आम जनता को बढि़या सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी अफसरशाही व लापरवाह बाबू उन्हें चक्कर पर चक्कर लगवा रहे हैं। उन्होंने फैसले की नकल की कापी लेने के लिए सांझ केंद्र में 21 जनवरी 2020 को आवेदन दिया था। जो काम 15 दिनों के अंदर अंदर हो जाना था वह एक साल में भी नहीं हुआ है। कभी कोरोना का बहाना तो कभी फाइल गुम

एसडीएम आफिस के रिकार्ड रूम के बाहर गांव बसराय बटाला के सुरजीत सिंह ने बताया कि 21 जनवरी को जैसे ही उन्होंने फैसले की कापी लेने के लिए अप्लाई किया तो उसके बाद लाकडाउन लग गया। लेकिन तब भी वे लगातार एसडीएम आफिस के चक्कर लगाते रहे, लेकिन हर बार बाबू उसे अगली तारीख पर आने के लिए बोल देते। लाकडाउन खत्म हो गया, लेकिन उसके बावजूद भी उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। कभी सांझ केंद्र के अंदर तो कभी एसडीएम आफिस तो कभी बटाला में उन्हें परेशान किया जाने लगा। गांव से एसडीएम आफिस गुरदासपुर तक करीब 21 चक्कर लगा लिए, लेकिन उसका मामला हल नहीं हुआ। और उसे तारीख पर तारीख दी जाने लगी। इन तारीखों को हुआ था फैसला

17 मई 2015 व 12 मई 2016 को सुरजीत सिंह के घरेलू झगड़े का फैसला एसडीएम गुरदासपुर ने सुनाया था। इस फैसले की कापी लेने के लिए उन्होंने 21 जनवरी 2020 को गुरदासपुर के मिनी सचिवालय में स्थित सांझ केंद्र में 350 रुपये फीस जमा करवाए। दोनों फैसले की कापी लेने के लिए उन्होंने 700 रुपये की फीस जमा करवाई। पैसे जमा करवाने के बाद रिकार्ड रूम में बैठे महिला कर्मचारी सुरजीत से कहती है कि उसकी एप्लीकेशन गुम हो चुकी है। उसे नए सिरे से एप्लीकेशन लगाकर रिकार्ड की मांग करनी चाहिए। हालांकि सुरजीत का कहना है कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उच्च अधिकारी भी इस मामले को लेकर गंभीर नहीं हैं। --कोट्स

मामला मेरे ध्यान में नहीं है। इसकी जांच करेंगे।

अर्शदीप सिंह, एसडीएम।

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