पुराने सिविल अस्पताल की इमारत खस्ताहाल, सड़क टूटी

शहर के पुराने सिविल अस्पताल की इमारत खस्ताहाल होती जा रही है।

JagranMon, 27 Sep 2021 04:41 PM (IST)
पुराने सिविल अस्पताल की इमारत खस्ताहाल, सड़क टूटी

बाल कृष्ण कालिया, गुरदासपुर

शहर के पुराने सिविल अस्पताल की इमारत खस्ताहाल होती जा रही है। भले ही यहां पर सिविल सर्जन कार्यालय चल रहा है, लेकिन बड़े अधिकारी का कार्यालय होने के बावजूद भी इसकी मेंटेनेंस को लेकर विभाग की तरफ से कोई कार्य नहीं किया जा रहा। अस्पताल परिसर में उगी झाड़ियों से ऐसे प्रतीत होता है कि मानो यह किसी भूत बंगले से कम ना हो। अस्पताल की सड़क बुरी तरह से टूटी हुई है।

इस सिविल अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं मिलने की सुविधा को लेकर कई बार शहर के लोगों ने संघर्ष भी किया। इसके बाद इमरजेंसी में वैक्सिग सेंटर बना दिया गया। यहां पर अब लोग कोरोना से निपटने के लिए वैक्सीन लगवाने के लिए ही आते हैं। राज्य सरकार की ओर से मिनी सचिवालय कचहरी परिसर में बनाया गया था, लेकिन सिविल अस्पताल प्रशासन को इसमें जगह नहीं दी गई। इसके चलते सिविल सर्जन कार्यालय को उसी पुरानी बिल्डिग में ही रहने दिया गया जबकि अकाली दल की सरकार के समय में नया सिविल अस्पताल बब्बरी में बना दिया गया। नया सिविल अस्पताल बनने के बाद इस पुरानी बिल्डिग की ओपीडी सेंटर से लेकर वार्ड में ताले लगा दिए गए। हालांकि सिविल सर्जन, डीएमसी, ड्रग इंस्पेक्टर आदि अधिकारी इसी बिल्डिग में बैठते हैं। इन्हें मिलने के लिए केवल उनका स्टाफ या फिर कुछ लोग ही आते हैं। शहर के लोग अपने इलाज के लिए अब नए सिविल अस्पताल में ही जाते हैं। दस साल पहले रहती थी मरीजों की चहल-पहल

स्वतंत्रता सेनानी प्रबोध चंद्र के नाम से चल रहे इस सिविल अस्पताल में मेंटेनेंस की कमी के कारण अब यह भूत बंगले के रूप में परिवर्तन हो रहा है। इमारत में जगह-जगह पर चढ़ा हुआ सिमट उगी हुई झाड़ियां इस बात का सबूत है। रात्रि के समय में महज एक बल्ब के अलावा वार्ड में सन्नाटा छाया रहता है। आज से 10 साल पहले की अगर बात करें तो इसी सिविल अस्पताल में मरीजों में उनके परिजनों की चहल-पहल हुआ करती थी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही व प्रशासनिक अधिकारियों की दूरदृष्टि की कमी के कारण आज सिविल अस्पताल खस्ता हालत में तब्दील हो रहा है। ना तो इस इमारत की मरम्मत करवाई जा रही है और ना ही यहां पर कोई ऐसा सिस्टम चलाया जा रहा है। कोट्स

अस्पताल के नवीनीकरण का मामला विभाग के पास विचाराधीन है। यहां पर उनके कार्यालय के अलावा और भी कार्यालय चल रहे हैं। मेंटेनेंस के लिए फोन आने के तुरंत पश्चात का काम शुरू होगा।

-डाक्टर हरभजन राम मांडी, सिविल सर्जन।

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