लाइसेंसी हथियारों का सेल्फ डिफेंस की जगह वारदातों में हो रहा इस्तेमाल

जिला प्रशासन द्वारा थोक के भाव लोगों को असला लाइसेंस जारी कर दिए जाते हैं। हथियार लेने वाला व्यक्ति किस मकसद के लिए हथियार ले रहा है इसके बारे में कोई कमेटी जांच नहीं करती।

JagranSat, 11 Sep 2021 10:15 PM (IST)
लाइसेंसी हथियारों का सेल्फ डिफेंस की जगह वारदातों में हो रहा इस्तेमाल

बाल कृष्ण कालिया, गुरदासपुर : जिला प्रशासन द्वारा थोक के भाव लोगों को असला लाइसेंस जारी कर दिए जाते हैं। हथियार लेने वाला व्यक्ति किस मकसद के लिए हथियार ले रहा है, इसके बारे में कोई कमेटी जांच नहीं करती। सब कुछ सिफारिश से ही चलता है। सिफारिश से मिलने वाले असलहा लाइसेंस के कारण ही हथियारों का इस्तेमाल वारदातों को अंजाम देने में किया जा रहा है। कहीं भी कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया जहां पर व्यक्ति ने अपने सेल्फ डिफेंस के लिए इसका इस्तेमाल किया हो। जिले में एक महीने में दो ऐसे घटनाएं हुई हैं, जिसमें असलहा लाइसेंस हथियार का ही प्रयोग किया गया। पहली घटना --

दो सितंबर डेरा बाबा नानक में पुलिस चौकी धर्मकोट के पास स्थित संधू धर्मकंडा में युवक जोबनप्रीत सिंह पर कुछ युवकों ने गाड़ी में सवार होकर ताबड़तोड़ फायरिग की थी। जोबनप्रीत के मुताबिक उसका कुछ लोगों से रंजिश चल रही थी। पुलिस ने जोबनप्रीत के बयान के आधार पर करीब 15 लोगों पर धारा 307 व विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इस मामले में भी असला लाइसेंस का ही प्रयोग किया गया। दूसरी घटना

-26 अगस्त को बटाला के हजीरा पार्क में राहुल पर एक युवक ने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से हमला किया गया था। हालांकि हमले में राहुल बाल-बाल बच गया। गोली लगती तो नतीजा कुछ और होना था। तीसरी घटना

तीन अगस्त गुरदासपुर की तिबड़ी रोड पर स्थित सात नंबर स्कीम के पास टिप्पर चालक से मामूली बात पर कहासुनी होने के कारण व्यक्ति ने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से फायर कर दिया। हालांकि अब वो उक्त व्यक्ति जेल में है। घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन

गुरदासपुर शहर में 895 रजिस्टर असलहा लाइसेंस धारक है। कलानौर 633, दीनानगर 510, तिबड़ 450, पुरानाशाला, 306, थाना सदर में 651 रुजिस्टर असलहा लाइसेंस धारक है। गुरदासपुर डीसी की तरफ से असलहा लाइसेंस जारी किया जाता है। लाइसेंस देते वक्त कई चीजों की अनदेखी

जिला प्रशासन ने ऐसी किसी टीम का गठन नहीं किया है, जो लाइसेंस जारी करने से पहले उक्त व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सके। मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह भी नहीं ली जाती कि देखा जा सके लाइसेंस लेने वाला व्यक्ति स्वभाव से गुस्सा वाला है या फिर नशे का आदी तो नहीं। हालांकि लाइसेंस देने की औपचारिकता पूरी करने के लिए सिविल में डोप टेस्ट भी करवाया जाता है। मगर कई बार लाइसेंस की फाइल लगाने वाले व्यक्ति द्वारा सेहत विभाग के अधिकारियों पर डोप टेस्ट पास करने को लेकर दबाव बनाया जाता है। क्या कहते हैं डीसी--

इस संबंध में डीसी मोहम्मद इश्फाक का कहना है कि लाइसेंसी असले का दुरपयोग करने वालों पर मामला दर्ज किया जाता है। उनका लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाता है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.