असला लाइसेंस के लिए अब डोप टेस्ट पर सख्ती

असला लाइसेंस रिन्यूअल करवाने के लिए भी लोगों को सिविल अस्पताल में डोप टेस्ट करवाना पड़ता है।

JagranTue, 21 Sep 2021 03:41 PM (IST)
असला लाइसेंस के लिए अब डोप टेस्ट पर सख्ती

बाल कृष्ण कालिया, गुरदासपुर

असला लाइसेंस रिन्यूअल करवाने के लिए भी लोगों को सिविल अस्पताल में डोप टेस्ट करवाना पड़ता है। लेकिन अब तक डोप टेस्ट महज खानापूर्ति भरा होता था, जिसे लेकर दैनिक जागरण की ओर से खबरें प्रकाशित की गई थीं। इसके बाद डीसी आफिस की तरफ से सिविल अस्पताल की सीनियर मेडिकल अधिकारी (एसएमओ) को डोप टेस्ट के दौरान पूरे डाक्टरों की टीम का गठन करने के लिए आदेश दिए गए। इसके बाद एसएमओ डाक्टर चेतना ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें मनोरोग विशेषज्ञ, मेडिकल अधिकारी व आर्थो स्पेशलिस्ट को भी डोप टेस्ट रिपोर्ट तैयार करने में योगदान देने के निर्देश दिए गए। अब डोप टेस्ट करवाने वाले व्यक्तियों को सिविल अस्पताल के आर्थो स्पेशलिस्ट, मनोरोग विशेषज्ञ और मेडिकल स्पेशलिस्ट से भी मिलना होगा और इसके बाद ये डाक्टर अपनी रिपोर्ट देंगे।

बता दें कि दैनिक जागरण ने लगातार असला लाइसेंस बनाने को लेकर प्रक्रिया में पनाई जाने वाली गड़बड़ी को लेकर कई तरह की खबरें प्रकाशित की थीं। डीसी गुरदासपुर की तरफ से फाइल देने के बाद लोग सिविल अस्पताल से डोप टेस्ट करवाने के लिए पुरानी प्रक्रिया को ही अपनाते हुए अपना डोप टेस्ट करवाने में पास हो जाते थे। लाइसेंस किस मकसद के लिए लिया जा रहा है इसके बारे में गहनता से जांच तक नहीं होती। गहनता से जांच करने के लिए उसमें मनोरोग विशेषज्ञ का होना जरूरी था, जिसे सरकार की तरफ से डेढ़ साल पहले ही डोप टेस्ट करने से बाहर कर दिया गया था। हालांकि अब नए पत्र में जिला प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग की ओर से अपनी तरफ से मनोरोग विशेषज्ञ को लिस्ट में डाल दिया गया है। इसमें वे यह तय करेंगे कि व्यक्ति को लाइसेंस किस कार्य के लिए चाहिए और उसकी मंशा क्या है? हालांकि हजारों लाइसेंस बनाने के बाद सिविल अस्पताल की तरफ से अब टीम का गठन करना समझ से परे है। दोस्त का यूरिन लेकर पहुंच जाते हैं टेस्ट कराने

किसी भी प्रकार का नशा करने वाले व्यक्ति के यूरिन में डोप टेस्ट के लिए अपनाई जाने वाली किट में वह नशा आ जाता है। लेकिन लाइसेंस बनवाने वाले कुछ लोग इसमें भी खेल कर रहे हैं। लोग अपने किसी ऐसे दोस्त का यूरिन डिब्बी में लेकर अस्पताल पहुंच जाते हैं, जो कोई भी नशा नहीं करता है। ऐसे में यूरिन टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव आ जाती है। सिविल अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक 20 फीसद लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव भी आई है, जिनके बारे में डीसी आफिस में उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया था। हालांकि ये लोग दोबारा से 15 दिन बाद अपना डोप टेस्ट करवा कर इस में सफल हो जाते हैं और इन लोगों को आसानी से लाइसेंस मिल जाता है। मंगलवार को दस लोगों के हुए डोप टेस्ट

सिविल अस्पताल में असला लाइसेंस रिन्यूअल के लिए भी लोगों को डोप टेस्ट करवाने का प्रावधान है। मंगलवार को सिविल अस्पताल में दस लोग डोप टेस्ट करवाने के लिए पहुंचे। हालांकि रोजाना दो-चार लोग अस्पताल में टेस्ट करवाने के लिए आ रहे हैं। इससे साफ है कि डीसी कार्यालय की तरफ से आगामी कुछ दिनों में होने वाले विधानसभा चुनाव के बावजूद भी असला लाइसेंस की फाइलें का सिलसिला लगातार बदस्तूर जारी है। सिविल अस्पताल में बड़ी संख्या में पहुंच रहे लोगों को देखकर लग रहा है कि रोजाना जिले में दस से 15 लोग डोप टेस्ट करवा कर अपनी असला लाइसेंस की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। कोट्स

अगर यूरिन लाने में कोई गड़बड़ी हो रही है तो वहां पर सीसीटीवी कैमरा इंस्टॉल करेंगे। लैब टेक्नीशियन को भी ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखने के लिए कहेंगे। उन्होंने अपने स्तर पर तीन डाक्टरों पर आधारित टीम का गठन किया है, जो डोप टेस्ट करेंगे।

-डा. चेतना, एसएमओ।

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