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इस बार अक्षय तृतीया पर बन रहा है महाशुभ संयोग

इस बार अक्षय तृतीया पर बन रहा है महाशुभ संयोग

हिदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। इस बार अक्षय तृतीया 14 मई शुक्रवार के दिन होगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन से त्रेता युग का आरंभ हुआ।

JagranSun, 09 May 2021 10:12 PM (IST)

अश्विनी गौड़ जीरा (फिरोजपुर) : हिदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। इस बार अक्षय तृतीया 14 मई शुक्रवार के दिन होगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन से त्रेता युग का आरंभ हुआ। भगवान परशुराम का अवतार भी इसी दिन हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन ही श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाते हैं।

इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है और इस दिन माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण दिन होता है । ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रेश द्विवेदी कहते हैं कि यह दिन सौभाग्य और संपन्नता देने वाला है। अपने नाम के अनुरूप इस दिन किए गए कार्य का कभी क्षय नहीं होता। अक्षय तृतीया को एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी माना गया है। इस दिन किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग देखने या मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन विवाह कार्य वागदान संस्कार विवाह संस्कार आदि किया जा सकता है। इसके अलावा व्यापार आरंभ, नींव पूजन, गृह प्रवेश आफिस ओपनिग, वाहन खरीदना, जाब ज्वाइन करना, बिजनेस डील करना, कोई नई वस्तु खरीदना आदि कार्यों के लिए भी यह बहुत शुभ दिन होता है ।

ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप प्रभाकर कहते हैं कि सोने के अलावा इस दिन किसी भी नई वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में समृद्धि बढ़ती है। इसीलिए अक्षय तृतीया के दिन जप तप पूजा और दान पुण्य का भी बहुत महत्व है। इसीलिए अपनी साम‌र्थ्य अनुसार जरुरतमंदों और धार्मिक स्थलों में दान अवश्य करना चाहिए। इस दिन लक्ष्मी माता का विशेष पूजन करना चाहिए। इससे उनकी अक्षय कृपा मिलती है । लक्ष्मी योग बना रहा है विशेष महत्व

ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप प्रभाकर तथा पंडित चंद्रेश द्विवेदी ने बताया कि 14 मई अक्षय तृतीया के दिन कई ऐसे विशेष योग बन रहे हैं जिससे इस बार अक्षय तृतीया बहुत ही अधिक शुभ परिणाम देने वाली होगी। सबसे पहले इस बार अक्षय तृतीया का दिन शुक्रवार पड़ रहा है। यह माता लक्ष्मी की पूजा के लिए श्रेष्ठ वार होता है इसके अलावा इस बार अक्षय तृतीया के दिन उच्च राशि वृष में रहेंगे और वृष राशि में चंद्रमा और शुक्र एक साथ होने से लक्ष्मी योग भी बनेगा, जिसे धन समृद्धि बढ़ाने वाला योग माना गया है। इस बार अक्षय तृतीया पर की गई पूजा मंत्र जाप दान आदि कई गुणा अधिक शुभ परिणाम देने वाले रहेंगे ।

प जन का श्रेष्ठ समय

14 मई अक्षय तृतीया के दिन सुबह 7 बजे से 10:30 बजे तक लाभ और अमृत चौघड़िया में अक्षय तृतीया के पूजन का शुभ समय होगा।

1.11 बार श्री सूक्त का पाठ करें

2. ओम श्रीम श्रीये नम: इस मंत्र का 5 से 11 माला जाप करें ।

3. 108 मखानों की माला बनाकर लक्ष्मी मां को अर्पित करें ।

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