हड़ताल में भी डाक्टरों ने किए आपरेशन

सोमवार से शुरू हुई सरकारी डाक्टसों की हड़ताल बुधवार को जारी रही। हड़ताल के कारण तीन दिन ओपीडी बंद है और मरीज अस्पताल से निराश होकर वापस लौट रहे हैं ।

JagranWed, 14 Jul 2021 10:57 PM (IST)
हड़ताल में भी डाक्टरों ने किए आपरेशन

संवाद सूत्र. फिरोजपुर : सोमवार से शुरू हुई सरकारी डाक्टसों की हड़ताल बुधवार को जारी रही। हड़ताल के कारण तीन दिन ओपीडी बंद है और मरीज अस्पताल से निराश होकर वापस लौट रहे हैं ।

डाक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष जतिद्र कौछड़ ने कहा कि अभी तो तीन दिन की हड़ताल है और जैसे ही स्टेट लेवल से एसोसिएशन के निर्देश मिलेंगे, वे हड़ताल को फिर से जारी कर देंगे। दूसरी ओर डाक्टरों के हड़ताल पर रहने के बावजूद इमरजेंसी सेवाएं जारी रही और चार सिजेरियन किए गए। एक एक्सीडेंट केस का भी एक्सरे और आपरेशन किया गया। पीसीएमएस के जिला प्रधान डा. जतिदर कोछड़ ने कहा एनपीए के मुद्दे पर सरकार को डाक्टर्स से बात करनी होगी नहीं तो डाक्टर्स का विरोध आगे तक चलेगा, जिसका नुकसान राज्य सरकार को चुनावों में होगा। हड़ताल में भी किए आपरेशन

सिविल अस्पताल में प्रसव करवाने आई महिला के पति गुरदेव ने बताया कि हड़ताल पर होने के बावजूद गायनी डाक्टर ने उसकी पत्नी का प्रसव किया। वे उनका धन्यवाद करते हैं । वहीं एलेगजेंडर नामक युवक ने बताया कि खाईफेमेकी के पास उसका एक्सीडेंट हो गया था और डाक्टरों ने हड़ताल पर होने के बावजूद उसके पांव का आपरेशन किया है ।

एक सप्ताह से ओपीडी बंद, निजी अस्पतालों में जा रहे मरीज संवाद सूत्र, फाजिल्का : छठे वेतन आयोग के विरोध में डाक्टरों की हड़ताल भले ही समाप्त हो गई। लेकिन अभी भी इस बात पर फैसला नहीं हो पाया है कि वीरवार को ओपीडी एक बार फिर से शुरू हो जाएगी या नहीं। लेकिन इतना तय है कि डाक्टर पिछले एक सप्ताह से परेशान हो रहे मरीजों का चेकअप करेंगे। इसके अलावा बुधवार को भी हड़ताल के कारण अस्पताल परिसर सूना रहा और चंद लोग ही अस्पताल में डाक्टर हैं या नहीं देखकर लौटते हुए नजर आए।

उधर हड़ताल कर रहे डाक्टरों का कहना है कि वह पिछले एक सप्ताह से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना योद्धा बनकर अपनी सेवाएं दी। इस दौरान कई डाक्टर कोरोना संक्रमित भी हुए और कुछ ने अपनी जान भी गंवाई। उन्होंने कहा कि डाक्टरों को उम्मीद थी कि सरकार उनकी हौसलाअफजाई के लिए नए पे कमीशन में उनकी सभी मांगों को मान लेगी लेकिन सरकार ने तो पहले दिए जा रहे एनपीए की दर को भी कम कर दिया और उसे बेसिक तनख्वाह का हिस्सा न मानते हुए डाक्टरों का मनोबल गिराने का काम किया है, जिसके चलते हड़ताल करके संघर्ष की शुरूआत की गई है। उन्होंने कहा कि उक्त हड़ताल 12 से 14 जुलाई तक की थी, लेकिन आगे की रणनीति का फैसला प्रांतीय कमेटियों द्वारा किया जाना है। लेकिन इतना तय है कि डाक्टर वीरवार को अस्पताल में आने वाले मरीजों की जांच करेंगे। उधर पिछले एक सप्ताह से चल रही हड़ताल के कारण लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पिछले सप्ताह वीरवार व शुक्रवार को पंजाब एडस कंट्रोल कमेटी ने दो दिवसीय हड़ताल रखकर ओपीडी बंद रखी तो शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को डाक्टरों ने तीन दिवसीय हड़ताल रखने का फैसला लिया। जिससे मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।

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