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ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर स्कूल और अभिभावकों की राय है जुदा

अश्वनी गौड़ जीरा,(फिरोजपुर)

लॉक डाउन के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं शुरू होने से निजी स्कूल व अभिभावक इसके फायदे और नुकसान को लेकर बैठे हुए हैं ।कई स्कूलों के प्रिसिपल व अध्यापक इन कक्षाओं के फायदे गिनाते हुए भविष्य की तैयारियों के लिए जरूरी बता रहे हैं ।वहीं अभिभावक इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम बता रहे हैं ।अभिभावकों का कहना है कि इन कक्षाओं के लिए बच्चे फिलहाल तैयार नहीं है ।कई अभिभावक इसके लिए जरूरी समाधान नहीं जुटा पा रहे हैं । ---स्कूल बता रहे हैं फायदे

* बच्चों में पढ़ाई की आदत नहीं छूटी।

* ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चों ने तकनीक का इस्तेमाल करने का नया तरीका सीखा ।

* लॉक डाउन के दौरान सिलेबस को पूरा करने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं जरिया बनी ।

* शिक्षा प्रणाली की नई नीति पर बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए खुद को ढाल रहे हैं ।

* अभिभावकों के सामने ही चल रही ऑनलाइन कक्षाओं से वह भी बच्चों का आंकलन कर पा रहे हैं ।

---अभिभावकों ने गिनाए कई नुकसान

* स्कूल जैसा माहौल ना होने के कारण बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता ।

* ऑनलाइन कक्षाएं स्कूल की तरफ से फीस लेने का जरिया

* नेटवर्क संबंधी समस्याओं से बच्चों को होती है परेशानी ।

* प्रयोगात्मक पढ़ाई के लिए सफल नहीं हो पा रही ऑनलाइन कक्षा

* अभिभावकों का बच्चों के साथ होने की अनिवार्यता से अभिभावकों का होता है समय बर्बाद ।

---समस्याएं

* ऑनलाइन कक्षा में प्रैक्टिकल नहीं करवा सकते ।

* ज्यादातर गांवों के बच्चों के पास यह सुविधा नहीं है

* अध्यापकों तथा बच्चों के बीच समन्वय की कमी ।

* कई एप पर बच्चों के जुड़ने की संख्या सीमित ।

---समाधान

* जिनके पास साधन नहीं है ,उन्हें सुविधा दी जाए ।

* अध्यापकों को ऑनलाइन कक्षाओं संबंधी ट्रेनिग दी जाए ।

* स्कूलों व कालेजों में सिस्टम बना कर यह कक्षाएं जरूरी की जाए।

* पढ़ने और पढ़ाने से पहले अध्यापक व बच्चे दोनों तैयार होकर आएं ।

---क्या कहना है शिक्षा विशेषज्ञों का

शहीद गुरदास राम मेमोरियल कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल जीरा के स्टेट अवॉर्डी तथा शिक्षा विशेषज्ञ प्रिसिपल राकेश शर्मा का कहना है कि एक तरफ निजी स्कूल केवल अपनी फीसों की पूर्ति के लिए ऑनलाइन शिक्षा की फॉर्मेलिटी पूरी कर रहे हैं ,जबकि दूसरी तरफ सरकारी स्कूल पढ़ाई के नुकसान को कम करने की कोशिश के मद्देनजर ऑनलाइन क्लासें लगा रहे हैं ।यह बात स्पष्ट है कि ऑनलाइन शिक्षा कभी भी अध्यापक या स्कूल का बदल नहीं हो सकती । पंजाब भारत की पहली स्टेट है जिसमें शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन शिक्षा को विस्तार देते हुए उन्होंने बच्चों की ओर भी ध्यान दिया हैं। जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है तथा इंटरनेट की सुविधा नहीं है ,उन विद्यार्थियों के लिए शिक्षा विभाग पंजाब में मेहनती अध्यापकों द्वारा सिलेबस के लेक्चर तैयार करके दूरदर्शन डीडी पंजाबी तथा अन्य अलग-अलग चैनलों पर प्रसारित किए जा रहे हैं ।जिसके साथ शिक्षा प्रत्येक बच्चे तक पहुंच रही है ।कोरोना महामारी के चलते ऑनलाइन शिक्षा या दूरदर्शन के द्वारा शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ाई के नुकसान को कम करना है , ताकि स्कूल खुलने के समय विद्यार्थी जल्द से जल्द इस नुकसान को पूरा कर सकें ।

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