पराली जलाए बिना की बिजाई, पहले से बेहतर हुई फसल

पराली जलाए बिना की बिजाई, पहले से बेहतर हुई फसल
Publish Date:Fri, 30 Oct 2020 04:27 PM (IST) Author: Jagran

संवाद सूत्र, फाजिल्का : जहां एक तरफ कुछ किसान पराली के अवशेष को आग लगाकर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। वहीं कई किसान ऐसे हैं, जो पराली न जलाने को लेकर प्रशासन का सहयोग देते हुए अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन रहे हैं। इनमें गांव आवा का किसान सुलखन सिंह भी शामिल हैं। उक्त किसान अपनी कृषि के साथ डेयरी फार्म का कृषि सहायक धंधा भी करते हैं।

किसान ने कृषि अधिकारियों के साथ बातचीत करते बताया कि वर्ष 1965 से कृषि विभाग और यूनिवर्सिटी के साथ जुड़े हुए हैं, जिस के प्रभाव स्वरूप धान की पराली को आग लगाने कारण होने वाले नुकसानों से अवगत हुए और पराली को आग न लगाने का इरादा बना लिया जिससे खेत की उपजाऊ शक्ति के साथ-साथ जैविक शक्ति में विस्तार हुआ। उन्होंने बताया कि आठ सालों से अपनी फसल की अवशेष को कभी भी आग नहीं लगाई और शुरुआती तीन सालों में पराली की गाठें भी बनवाईं थी। पिछले दो सालों से हैप्पी सीडर के साथ बिजाई कर रहे हैं, लेकिन पिछली बार उन्होंने अपनी बिजाई सुपर सीडर और मलचर के साथ की थी। किसान के अनुसार सुपर सीडर की बिजाई से मलचर की बिजाई विधि सस्ती और लाभदायक है। इस विधि से बीजी गई गेहूं का झाड़ भी रिवायती ढंग से बीजी गई गेहूं से अधिक मिलता है।

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