अब जलसे करने पर प्रबंधकों पर होगी एफआइआर

अब जलसे करने पर प्रबंधकों पर होगी एफआइआर

जिला मजिस्ट्रेट अरविद पाल सिंह संधू द्वारा जिला फाजिल्का में सीआरपीसी 1973 की धारा 144 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 के अंतर्गत नए आदेश जारी किए गए हैं जो 30 अप्रैल तक लागू रहेंगे।

JagranFri, 09 Apr 2021 09:52 PM (IST)

संवाद सूत्र, फाजिल्का : जिला मजिस्ट्रेट अरविद पाल सिंह संधू द्वारा जिला फाजिल्का में सीआरपीसी 1973 की धारा 144 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 के अंतर्गत नए आदेश जारी किए गए हैं, जो 30 अप्रैल तक लागू रहेंगे। इन आदेशों के अनुसार सभी शैक्षणिक संस्थान जैसे कि स्कूल और कालेज 30 अप्रैल तक बंद रहेंगे, लेकिन टीचिग और नान टीचिग स्टाफ कामकाज वाले दिनों में उपस्थित रहेगा। सभी मेडिकल और नर्सिंग कालेज खुले रहेंगे। जिले की हद में सभी राजनीतिक भीड़ पर पूर्ण पाबंदी होगी। इन आदेशों का उल्लंघन में यदि कोई जलसा किया जाता है तो जलसा करने वाले प्रबंधकों, भाग लेने वालों, जलसे के लिए जगह और टेंट आदि मुहैया करवाने वाले मालिकों को कोताहीकार मानते हुए एफआइआर दर्ज की जाएगी और ऐसे स्थान तीन महीनों के लिए सील कर दिए जाएंगे। रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट क‌र्फ्यू 30 अप्रैल तक जारी रहेगा। नाइट क‌र्फ्यू के दौरान सभी गैर-जरूरी गतिविधियों पर पाबंदी रहेगी, लेकिन जरूरी गतिविधियों सहित फैक्ट्रियों में शिफ्टों के संचालन, हवाई, रेल व बस यात्रा करने वाले यात्रियों की यातायात को क‌र्फ्यू की पाबंदियों से छूट होगी। विवाह-शादी और अंतिम संस्कार व भोग समारोह के लिए छत के नीचे 50 और खुली जगह पर होने वाले समारोह में 100 व्यक्तियों तक के ही जलसे की आज्ञा होगी। सभी सिनेमा फिलहाल, थियेटरों और मल्टीप्लैक्सों व माल में 50 प्रतिशत समर्थता की पाबंदी लागू होगी और किसी भी समय एक दुकान में 10 से अधिक व्यक्तियों के जाने की आज्ञा नहीं होगी। सभी सरकारी दफ्तरों की ओर से शिकायतों के निपटारे को वर्चुअल व आनलाइन प्राथमिकता दी जाएगी। आदेशों में कहा कि माल विभाग में होने वाले प्रापर्टी के खरीद-बेच के वसीकों को सीमित रखा जाए। कोविड-19 संबंधी एमएचए व पंजाब सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों अनुसार 6 फुट की सामाजिक दूरी को बनाई रखना, खुले में थूकने पर मनाही और सार्वजनिक स्थानों पर मास्क डालना जरूरी होगा। उपरोक्त आदेशों की पालना न करने वाले व्यक्तियों व संस्थानों के विरुद्ध आइपीसी की धारा 188 और आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 की धारा 51-60 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

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