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खाली प्लाट बने कूडा डंप, आसपास के लोग परेशान

संवाद सहयोगी, अबोहर : मुख्य सड़क से नई आबादी को जोड़ने वाली गली नं.5 के खाली प्लाटों में बने कूड़ा डंप नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर अभिशाप बने हुए हैं। कोरोना वायरस से बचाव के लिये वातावरण को साफ-सुथरा रखने पर बल देने वाले प्रशासन को कूड़े के ये डंप अभी नजर नहीं आ रहे। 40 वर्ष पहले महाराणा प्रताप मार्केट के पीछे कॉलोनी काटते समय लोगों से जो वायदे किए थे, वे सारे मिट्टी में मिल गए। इस कॉलोनी में न तो सफाई व्यवस्था का नियमित प्रबंध किया गया और न ही स्ट्रीट लाईट की स्थिति संतोषजनक है। ट्रस्ट द्वारा लगाए गए किसी भी पोल पर स्ट्रीट लाइट नजर नहीं आती।

यहां गंदगी का आलम यह है कि पूरी सड़क पर कूड़ा बिखरा हुआ है और गंदा पानी जमा हो जाता है और इसी में बेसहारा पशु विचरण करते हैं।

मोहल्लावासियों का कहना है इस तरफ ट्रस्ट और नगर निगम का ध्यान खींचने की दर्जनों कोशिश की गई, लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ।

ट्रस्ट की स्थिति यह है कि साढ़े तीन साल पहले बनी कांग्रेस सरकार ने अभी तक इसका अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया।

ट्रस्ट के अधिकारियों का कहना है कि सफाई यकीनी बनाने की जिम्मेवारी नगर निगम की है। ट्रस्ट के पास तो सफाई करवाने के लिए कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। सरकारी स्कूल द्वारा भी निगम, ट्रस्ट व शिक्षा विभाग को पत्र लिखे गए थे, लेकिन अव्यवस्था ज्यों की त्यों बनी हुई है। गंदगी के अलावा खाली प्लाटों में गोबर भी फेंका जाता है। अंडे बेचने वालों ने भी गंदगी फैलाने में कई बार अपना योगदान डाला है, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने कभी किसी का चालान तक नहीं काटा। लोगों ने अब मुख्यमंत्री व स्थानीय निकाय मंत्री को इस बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी भेजते हुए निवेदन किया है कि कम से कम गंदगी के ढेरों से उन्हें मुक्ति दिलाई जाए।

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