कलयुग में दान का बड़ा महत्व : आचार्य शास्त्री

श्री शिव मंदिर धर्मशाला सुभाष नगर में श्री मद्भागवत सप्ताह एवं संकीर्तन यज्ञ के दूसरे दिन मुख्य यजमान अंजू धीर एवं रजनीश धीर विक्की ने पूजा अर्चना के बाद कथा आरंभ करवाई।

JagranThu, 23 Sep 2021 04:26 PM (IST)
कलयुग में दान का बड़ा महत्व : आचार्य शास्त्री

संवाद सहयोगी, मंडी गोबिदगढ़ : श्री शिव मंदिर धर्मशाला सुभाष नगर में श्री मद्भागवत सप्ताह एवं संकीर्तन यज्ञ के दूसरे दिन मुख्य यजमान अंजू धीर एवं रजनीश धीर विक्की ने पूजा अर्चना के बाद कथा आरंभ करवाई। इस मौके पर कथा व्यास आचार्य विमल कृष्ण शास्त्री जी महाराज वृंदावन वालों ने कहा कि महाभारत में कौरवों पांडवों और श्रीकृष्ण जैसे लोकप्रिय चरित्रों के अलावा राजा परीक्षित का भी वर्णन मिलता है। वह पांडवों के भाई अर्जुन के पोते थे और अभिमन्यु और उत्तरा के बेटे थे। अपनी मां के कोख में उन्हें बचाया था भगवान श्रीकृष्ण ने जब अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र उनकी तरफ कर दिया था। अपनी मां के कोख में ही परीक्षित का दर्शन भगवान श्रीकृष्ण से हो गया था। पैदा होने के बाद वह जिस किसी से भी मिलते वह उनमें श्रीकृष्ण की छवि ढूंढने की कोशिश करते। ये उनके लिए एक परीक्षा जैसे हो गया था। इसी से उनका नाम परीक्षित पड़ा। परीक्षित का विवाह उत्तर के राजकुमार की बेटी इरावती से हुआ। इरावती और परीक्षित के चार बेटे हुए जिनमें एक जनमेजय था। परीक्षित ने गंगा नदी के किनारे चार अश्वमेध यज्ञ किया था। उनके गुरू कृपाचार्य थे। जब पांडव महाभारत के बाद स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर गए तब परीक्षित ने उनका कार्यभार और शासन संभाल लिया। शास्त्री जी ने कहा कि कलयुग में दान का बहुत बड़ा महत्व है। इस अवसर पर श्री राम मंदिर गोपाल मार्केट के सरप्रस्त जगदीश धीमान, मास्टर मनोहर लाल वर्मा, सोम प्रकाश थापर, डा. अमित संदल, जगदीश शाही, दविदर सिंह वालिया, अश्वनी भांबरी, सतनाम सिंह, राणा आजाद, तेजपाल सिंह, महावीर प्रसाद गुप्ता, धनराज, बचन लाल, अशोक कुमार, कांत गौतम, पवन जलुरिया आदि उपस्थित थे।

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