डीजीपी नहीं निमाणा सिख बनकर वाहेगुरु का शुक्राना करने आया हू : आइपीएस सहोता

आज मैं डीजीपी नहीं निमाणा सिख बनकर गुरुघर में वाहेगुरु का शुक्राना करने आया हूं और कुछ नहीं बोलूंगा।

JagranSun, 26 Sep 2021 12:07 AM (IST)
डीजीपी नहीं निमाणा सिख बनकर वाहेगुरु का शुक्राना करने आया हू : आइपीएस सहोता

धरमिंदर सिंह, फतेहगढ़ साहिब : आज मैं डीजीपी नहीं निमाणा सिख बनकर गुरुघर में वाहेगुरु का शुक्राना करने आया हूं और कुछ नहीं बोलूंगा। यह कहना था पंजाब के डीजीपी का अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले इकबालप्रीत सिंह सहोता का। वे परिवार समेत गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होने आए थे। उनकी पत्नी और बेटी भी साथ थे। दरबार साहिब में माथा टेकने के बाद भोरा साहिब में गए। वहा कुछ देर बैठकर कीर्तन श्रवण किया। अरदास में भी शामिल हुए। इस दौरान कई लोग उपस्थित थे। इसके बाद सुख आसन के समय पालकी साहिब की सेवा भी की। इसके उपरात वे ठंडा बुर्ज में माथा टेकने गए। दरबार साहिब में ग्रंथी भाई निर्मल सिंह ने उन्हें सिरोपा देकर सम्मानित किया। बता दें कि डीजीपी सहोता नौ अप्रैल 1992 को फतेहगढ़ साहिब जिले के पहले एसएसपी बने थे। यहा पर उनका करीब साढ़े तीन वर्ष तक का कार्यकाल रहा था। हर जन्मदिन और सालगिरह गुरुघर में मनाते हैं

आइपीएस सहोता अपने परिवार समेत गुरुद्वारा साहिब आते रहते हैं। वे अपने परिवार में कोई भी जन्मदिन, सालगिरह या अन्य खास दिन को गुरुघर में नतमस्तक होकर ही मनाते हैं। शनिवार को अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद भी वे यहा आए। पूर्व हेड ग्रंथी ने अपनी ही सिरी साहिब देकर किया सम्मानित

डीजीपी सहोता के गुरुघर आने की खबर जब फतेहगढ़ साहिब में रहते दरबार साहिब अमृतसर के पूर्व हेड ग्रंथी भाई जसविंदर सिंह को लगी तो वे उनसे मिलने पहुंचे। इस दौरान उनके पास कोई सम्मान चिन्ह नहीं था। उन्होंने अपनी सिरी साहिब देकर उन्हें सम्मानित किया।

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