विधानसभा चुनाव में दिखेगा गठबंधन टूटने का असर

विधानसभा चुनाव में दिखेगा गठबंधन टूटने का असर
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 05:06 PM (IST) Author: Jagran

प्रदीप कुमार सिंह, फरीदकोट

22 साल पुराना शिअद-भाजपा गठबंधन अब खत्म हो गया है। अब तक एक-दूसरे के साथी रहे दोनों दलों के नेता अब एक-दूजे के लिए पराए बन गए है।गठबंधन तोड़ने का फैसला शिअद द्वारा भले ही किया गया है, परंतु दोनों को एक-दूजे की कमी 2022 के विधानचुनाव में खलेगी।

दोनों दलों के गठबंधन के अनुरूप अब तक, जिले की तीनों विधानसभा सीट व फरीदकोट लोकसभा सीट शिअद के कोटे में रही। भाजपा किसी भी विधानसभा सीट पर मजबूत नहीं हो सकी।

भले ही इन 22 सालों में भाजपा व शिअद ने तीन बार यानी 15 साल प्रदेश की सत्ता की कमान संभाली हो, परंतु फरीदकोट भाजपा नेताओं के पास एक भी ऐसा बड़ा मुद्दा नहीं है, जिसे पूरा करने का दावा करते हुए वह जनता के बीच जाएं। बताने को उनके पास मात्र केंद्र सरकार की उपलब्धियां ही है, जबकि उनके सहयोगी रहे शिअद के लोग जनता के बीच प्रदेश की अपनी उपलब्धियां लेकर जाते हैं। सत्ता में रहते हुए भी जिले के भाजपा नेताओं व वर्करों को हमेशा वह मान-सम्मान नहीं मिला, जैसा वह चाहते थे।

कृषि विधेयक को लेकर भले ही शिअद आज भाजपा से अलग हो गया है, परंतु उसके लिए भी अपने बलबूते पर विधानसभा चुनाव की बैतरणी पार कर पाना आसान नहीं होगा। ऐसी स्थित में जबकि कोटकपूरा व जैतो पर आप और फरीदकोट सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। बरगाड़ी बेअबदी कांड व उससे जुड़े गोलीकांड को लेकर जिले में शिअद की स्थित पहले वाली अब नहीं है, ऐसे में भाजपा से अलगाव की भरपाई उसके लिए आसान तब और नहीं होगी जबकि आम आदमी पार्टी व कांग्रेस द्वारा उन्हें घेरे रखने की पुरजोर कोशिश की जा रही है।

गठबंधन के टूटने से भाजपा के कुछ वह लोग खुश हैं जो चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, और गठबंधन के समझौतों के कारण उन्हें यहां से टिकट नहीं मिल पा रही थी। इसके अलावा बहुत से लोग भाजपा से इसलिए भी नहीं जुड़ रहे थे, कि क्योंकि उन्हें फरीदकोट से अपना राजनीतिक कैरियर नहीं दिखाई दे रहा था। ऐसे लोग अब खुश दिखाई दे रहे हैं, और कह रहे हैं कि अब जिले में भाजपा का जनाधार बढ़ेगा और अच्छे लोग पार्टी से जुड़ेंगे भी।

इनसेट

बेअदबी कांड की जांच होगी तेज

शिअद-भाजपा दोनों की अलग विचारधारा है। एनडीए का हिस्सा होने के कारण बरगाड़ी बेअबदी कांड व चिट्टे से पंजाब की जवानी बर्बाद करने वालों पर कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी। अब शिअद द्वारा गठबंधन तोड़ा गया, तो आस बंधी है कि सीबीआइ की जांच तेज होगी और दोषियों को सजा मिलेगी।

-कोटकपूरा के आप विधायक कुलतार सिंह संधवा

इनसेट

यह सब मात्र शिअद का ड्रामा

कृषि विधेयक लोकसभा में पारित होने के बाद पंजाब के किसानों के आक्रोश को देखते हुए पहले हरसिमरत कौर बादल द्वारा मंत्री पद से इस्तीफा दिया गया। किसानों ने इस्तीफे को कोई तवज्जों नहीं दी तो अब मजबूरन शिअद ने एनडीए से गठबंधन तोड़ा है, इसका भी पंजाब के पढ़े-लिखे समझदार किसान कोई तवज्जों नहीं दे रहे है, यह सब मात्र शिअद का ड्रामा है।

-भाई राहुल सिंह सिद्दू, कांग्रेस हलका इंचार्ज कोटकपूरा।

इनसेट

गठबंधन तोड़ा जाना र्दुभाग्यपूर्ण

भाजपा-शिअद का 22 साल पुराना गठबंधन प्रदेश में अब तक रहा है। इस गठबंधन ने प्रदेश में तीन बार मिलकर सरकार बनाई और पूरे पांच साल तक सभी कार्यकाल में भलीभांति सरकार चलाई। अब कृषि विधेयक का हवाला देते हुए शिअद ने गठबंधन तोड़ दिया है। अब आगे की क्या रणनीति होगी, यह पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक उपरांत ही पता चलेगा।

-विजय छावड़ा, भाजपा जिला प्रधान फरीदकोट।

इनसेट

शिअद के लिए किसानों का हित सर्वाेपरि

शिअद हमेशा से ही किसानों की पार्टी रही है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किसानों के मुद्दों पर जेल भी काटी है, किसानों के मुद्दे को लेकर कैबिनेट मंत्री रही हरसिमरत कौर बादल ने अपना इस्तीफा भी दे दिया है। केंद्र सरकार द्वारा कृषि ऑर्डिनेंस लाने के बाद से ही शिअद इसका विरोध करती रही है, जब तक कृषि विधेयक को केन्द्र सरकार वापस नहीं लेती तब तक शिअद पीछे हटने वाली नहीं है।

-मनतार सिंह बराड़, शिअद जिला प्रधान फरदीकोट।

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