छह साल इंतजार के बावजूद नहीं मिला इंसाफ

इंतजार के छह साल फिर भी नहीं मिला इंसाफ।

JagranTue, 12 Oct 2021 06:33 PM (IST)
छह साल इंतजार के बावजूद नहीं मिला इंसाफ

जारगण संवाददाता, (बरगाड़ी) फरीदकोट

इंतजार के छह साल, फिर भी नहीं मिला इंसाफ। बरगाड़ी बेअबदी कांड से जुड़े बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड का मुख्य दोषी कौन है, यह सवाल घटना के छह साल बाद आज भी वहीं है, जितना की छह साल पहले 14 अक्टूबर 2015 को था। बरगाड़ी बेअदबी कांड से जुड़े दोनों गोलीकांडों की जांच अब तक दो एसआइटी, तीन जस्टिस आयोग, सीबीआइ व पंजाब पुलिस द्वारा घटना की पिछले छह सालों में प्रत्येक एंगलों से गहन जांच-पड़ताल की गई, फिर भी न तो केन्द्रीय जांच एजेंसी और न ही प्रदेश सरकार की कोई एजेंसी इस नतीजे पर पहुंच पाने में सफल रही कि गोली किसके कहने पर चलाई गई।

छह साल में डेढ़ साल तक प्रदेश में बादल सरकार और साढ़े चार साल से ज्यादा वर्तमान कांग्रेस सरकार के शामिल है। दोनों ही सरकारों द्वारा एसआइटी व जस्टिस आयोग का गठन कर नतीजे पर पहुंचने की कोशिश की गई, परंतु अभी तक पूरी तरह से यह नहीं तय हो पाया, कि मुख्य दोषी कौन है।

लोकसभा चुनाव से पहले एडीजीपी प्रबोध कुमार के नेतृत्व में एसआइटी का गठन प्रदेश सरकार द्वारा किया गया, जिसके वरिष्ठ सदस्य आइजी कुंवर विजय प्रताप सिंह, एसएसपी कपूरथला सतेन्द्रपाल सिंह व एसपी फाज्लिकाअभूपेन्द्र सिंह रहे। एसआइटी के सदस्य कुंवर विजय प्रताप सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल समेत घटना से संबंधित कई पुलिस अधिकारियों व शिअद नेताओं से पूछताछ की। हाईकोर्ट की दखल पर कुंवर विजय प्रताप को एसआइटी से हटा दिया गया। मामले की जांच नए सिरे नई गठित एसआइटी द्वारा की जा रही है, हालांकि दोनों ही गोलीकांड में आरोपित पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी को हाईकोर्ट से राहत मिली है, जिसके तहत 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव तक जांच एजेंसियां सैनी से पूछताछ नहीं कर सकती है। बाक्स-

इंसाफ का अब भी इंतजार-मृतक परिवार-

14 अक्टूबर 2015 को गांव बरगाड़ी में पुलिस की गोलीबारी से मारे गए किशन भगवान सिंह के बेटे सुखराज सिंह का कहना है कि छह साल घटना को बीत चुके है, और अभी तक जांच चल ही रही है। मृतक गुरजीत सिंह के पिता साधू सिंह का कहना है कि बेटे ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान की बहाली के लिए शहादत दी, अब भी दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है, सजा मिलने पर ही उन्हें तसल्ली होगी। बाक्स-

दो एसआईटी, तीन जस्टिस आयोग, सीबीआई

-जस्टिस जोरा सिंह आयोग-16 अक्टूबर 2015 को जांच शुरु 30 जून 2016 को रिपोर्ट सौंपी,

-जस्टिस मारकंडे काटजू आयोग-27 दिसंबर 2015 को जांच शुरु फरवरी 2016 रिपोर्ट सौंपी, सरकार ने नहीं मानी रिपोर्ट,

-जस्टिस रणजीत सिंह आयोग-14 मार्च 2017 को जांच शुरु 30 जून 2018 में रिपोर्ट सौंपी,

-बेअदबी कांड की जांच हेतु डीआईजी रणवीर सिंह खटड़ा के नेतृत्व में गठित एसआईटी द्वारा जांच आगे बढ़ाई जा रही है,

-कोटकपूरा व बहिबल कलां गोलीकांड जांच आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में एसआईटी की सिफारिश खारिज कर नई एसआईटी अब मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। बाक्स-

टाईम लाईन-

-14 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी से सटे गांव बहिबल कलां में बरगाड़ी बेअदबी

कांड को सिक्ख संगतों द्वारा किए जा रहे शांतपूर्ण धरने को जबरन उठाने के

लिए पुलिस द्वारा सीधी फायरिग की गई, जिसमें गांव नियामीवाला के किशन

भगवान सिंह व गांव सरावां के गुरजीत सिंह की मौत हो गई। इसी दिन ही

कोटकपूरा बत्ती वाले चौक पर सिक्ख संगतों के रोष-धरने को पुलिस ने बल

प्रयोग कर उठवाया, पुलिस की लाठीचार्ज व फायरिग में लगभग सौ लोग घायल

हुए।

-15 अक्टूबर 2015 को घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन प्रदेश के

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने केस की जांच के लिए पंजाब पुलिस के

डायरेक्टर ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन इकबालप्रीत सिंह सहोता की अध्यक्षता

में एसआईटी का गठन करने के साथ ही, घटना की जांच के लिए पंजाब-हरियाणा

हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस जोरा सिंह की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का

गठन करवाया।

-20 अक्टूबर 2015 को एसआईटी ने सिख जत्थेबंदियों से जुड़े गांव पंजगराई

खुर्द के दो सगे भाईयों को केस में शामिल होने के आरोपों के तहत पकड़ा लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत एसआईटी नहीं जुटा पाई, जिसके बाद अंतत:

एसआईटी ने दोनों भाईयों को केस से डिस्चार्ज कर दिया।

प्रदेश सरकार ने 15 नवंबर 2015 को

इस मामले को केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के हवाले कर दिया।

-21 अक्टूबर 2015 को बाजाखाना पुलिस द्वारा अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या का केस दर्ज किया गया।

-30 जून 2016 को जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने गवाहों, साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी,

-14 अप्रैल 2017 को कैप्टन अमरिदर सिंह की सरकार ने प्रकरण की निष्पक्षता से जांच के लिए जस्टिस रणजीत सिंह आयोग के गठन की

घोषणा की।

-16 अप्रैल 2018 को जस्टिस रणजीत सिंह ने एक साल, चार दिन की जांच-पड़ताल की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह को सौंपी।

27 अगस्त 2018 को यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश प्रदेश सरकार द्वारा पेश की गई।

पंजाब सरकार ने 12 अगस्त 2018 को तत्कालीन एसएसपी मोगा चरनजीत सिंह शर्मा, एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह,एसएसपी मोगा के रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह व तत्कालीन थाना बाजाखाना प्रभारी एसआई अमरजीत सिंह कुलार को नामजद किया गया।

सात अगस्त 2018 को अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर इरादा ए कत्ल

की एफआईआर दर्ज की गई है।

-10 सितंबर 2018 को गोलीकांड मामलों की जांच के लिए एडीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआइटी का गठन किया,

-22 जून 2019 को नाभा जेल में डेरा सच्चा सौदा सिरसा से जुड़े महिलंदरपाल बिट्टू की हत्या कर दी गई

कोटकपूरा निवासी बिट्टू को एसआईटी द्वारा एक अन्य पुराने मामले में 9 जून 2018 को गिरफ्तार किया गया था, बिट्टू डेरा की 45 सदस्यीय प्रांतीय कमेटी के सदस्य थे। एसआईटी ने दस डेरा अनुयायियों

की बरगाड़ी प्रकरण में सामुलिय पाई थी, जिसमें बिट्टू के साथ ही सुखजिदर

सिंह सन्नी व शक्ति सिंह को 5 जुलाई 2018 को सीबीआई ने अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ की थी, जबकि शेष अन्य डेरा अनुनायियों से फरीदकोट जेल में पूछताछ हुई थी।

-28 सितंबर 2020 को बहिबल कला गोलीकांड में तत्कालीन डीजीपी सुमेध सिंह सैनी व सस्पेंड चल रहे आईजी परमराज सिंह उमरानंगल को आरोपी मानते हुए नामजद किया गया,

-9 अक्टूबर 2020- बहिबल गोलीकांड केस के आरोपी तत्कालीन एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह, तत्कालीन एसएचओ

बाजाखाना अमरजीत सिंह कुलार के अलावा पुलिस अधिकारियों की मदद मामले में नामजद फरीदकोट के सुहेल सिंह बराड़ व मोगा के कारोबारी पंकज बांसल के खिलाफ ड्यूटी मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार की अदालत में चालान पेश कर दिया।

-10 अक्टूबर 2020 को कोटकपूरा गोलीकांड में भी तत्कालीन डीजीपी को नामजद किया गया।

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