प्लाज्मा थेरेपी से 16 कोरोना संक्रमितों का उपचार

प्लाज्मा थेरेपी से 16 कोरोना संक्रमितों का उपचार
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 05:26 PM (IST) Author: Jagran

एलेक्स डिसूजा, फरीदकोट

गुरु गोबिद सिंह मेडिकल कालेज व अस्पताल के मेडिसन विभाग के डाक्टर रवीन्द्र गर्ग ने प्लाज्मा थेरेपी के साथ कोविड-19 संक्रमित बीमारी का इलाज शुरू कर दिया है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ सुलेख मित्तल ने प्लाज्मा बैंक की रिपोर्ट देते हुए बताया कि आज तक 47 मरीजों के टेस्ट किए जा चुके हैं, जिसमें 38 डोनर में एंटीबॉडिज पाई गई, जिनमें से आज तक 38 यूनिट कुल (हरेक 250 एमएल) प्लाज्मा एकत्रित किए गए। इनमें से 30 डोनर प्लाज्मा डोनेट करने के लिए फिट पाए गए, जिसमें से 19 डोनर ने प्लाज्मा डोनेट किए गए, इनमें से गुरु गोबिद सिंह मेडिकल अस्पताल को दिए गए, और 2 यूनिट प्राईवेट अस्पताल को दिए गए। उन्होंने बताया कि कोविड-19 संक्रमित बीमारी के साथ लड़ रहे मेडिकल कालेज व अस्पताल में 16 मरीजों को व प्राइवेट अस्पताल में प्लाज्मा थरैपी दी गई अस्पताल के प्लाज्मा बैंक में 7 यूनिट बाकी स्टाक में पड़े है।

मेडिसन विभाग के डॉ रवीन्द्र गर्ग ने बताया कि इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिर्सच (आईसीएमआर) ने कोविड-19 संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थरेपी से सबंधित पूरे भारत में केंद्र सरकार के सहयोग से एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें गुरु गोबिद सिंह मेडिकल कालेज व अस्पताल फरीदकोट भी शामिल था। इस प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद अब पंजाब सरकार द्वारा पंजाब के तीनों मेडिकल कालेज में प्लाज्मा बैंक बना दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोविड-19 संक्रमित मरीज के स्वस्थ होने पर उसके द्वारा खून के प्लाज्मा डोनेट किए जाने से कोविड-19 संक्रमित मरीज का ईलाज डोनेट किए गए प्लाज्मा द्वारा किया जा सकता है इससे मरी•ाों के ईलाज करने में सफलता प्राप्त हुई है। प्लाज्मा थैरेपी द्वारा कोविड-19 संक्रमित मरीजों का इलाज डाक्टर रवीन्द्र गर्ग ने अस्पताल में शुरू कर दिया है।

उन्होंने बताया कि प्लाज्मा डोनेट करने वाले व्यक्ति में कुछ शर्तों का पूरा होना जरूरी है। प्लाज्मा डोनर कोविड-19 संक्रमित पॉजिटिव होकर नेगेटिव होना जरूरी है। उसके शरीर में एंटीबॉडी उपलब्ध होने जरूरी है, तभी उसका खून का प्लाज्मा लेकर कोविड-19 संक्रमित पीड़ित व्यक्ति को प्लाज्मा थरेपी द्वारा इलाज किया जा सकता है। प्लाज्मा थैरेपी प्रणाली इस धारणा पर काम करती है कि जो मरीज कोविड-19 संक्रमित बीमारी से ठीक हो जाते हैं, उनके शरीर में रोधक एंटीबाडीज विकसित कर दिए जाते हैं, जोकि बीमार व्यक्ति के शरीर में वायरस की प्रतिक्रिया को बेअसर कर उसे खत्म कर सकते हैं। जब कोई विषाणु उस व्यक्ति पर हमला करता है, तो शरीर में प्रतिरोधक संक्रमण विरुद्ध लड़ने के लिए एंटीबाडीज नामक प्रोटीन विकसित करता है। अगर विषाणु के साथ संक्रमित व्यक्ति के खून में काफी मात्रा में एंटीबाडी विकसित करता है, तो वह वायरस के साथ होने वाली बीमारियों से ठीक हो सकता है।

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