UTCA अध्यक्ष संजय टंडन ने मिल्खा दंपती को दी श्रद्धांजलि, बोले- खेल जगत को खलेगी उनकी कमी

यूटी क्रिकेट एसोसिएशन अध्यक्ष संजय टंडन ने मिल्खा दंपती को श्रद्धांजलि दी। चंडीगढ़ भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि भविष्य में खेल जगत में मिल्खा दंपती की कमी खलती रहेगी। क्योंकि खेल के उत्थान में उनके मार्गदर्शन का सम्मान होता रहा है।

Ankesh ThakurSun, 20 Jun 2021 01:24 PM (IST)
यूटी क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय टंडन (फाइल फोटो)।

चंडीगढ़, जेएनएन। Milkha singh news: उड़न सिख पद्मश्री मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी निर्मल कौर का जीवन प्रेरणाओं से ओत प्रोत रहा है। इन विषम परिस्थितियों में अपने आप को मिल्खा सिंह ने उबार कर विश्व एथलेट्क्स मैप में भारत और चंडीगढ़ को पहचान दिलवाई है। वह युवाओं से साथ साथ हर खेल प्रेमी के लिए मिसाल कायम करती रहेगी। यह बात यूटी क्रिकेट एसोसिएशन (UTCA) के अध्यक्ष संजय टंडन ने फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कही। 

चंडीगढ़ भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि भविष्य में खेल जगत में मिल्खा दंपती की कमी खलती रहेगी। क्योंकि खेल के उत्थान में उनके मार्गदर्शन का सम्मान होता रहा है। टंडन ने पहली बार निर्मल मिल्खा से हुई मुलाकात को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1982 में गवर्नमेंट काॅलेज फाॅर मैन (जीसीएम) में आयोजित बैडमिंटन स्पर्धा में विजेता बने थे। उस समय दिवंगत आत्मा द्वारा पुरस्कृत होते हुए उनके प्रेरणादायी शब्दों ने आज तक उन्हें उत्साहित किया है।

टंडन ने बताया कि निर्मल मिल्खा सिंह उन दिनों चंडीगढ़ खेल निदेशक के तौर पर कार्यरत थीं। वर्ष 2018 में उन्हें भाजपा के एक देशव्यापी अभियान संपर्क से समर्थन में मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह को मिल्खा सिंह से मिलवाया था। वर्ष 2019 में टंडन ने कैबिनेट मंत्री प्रकाश जावडे़कर की उड़नसिख से भेंट करवाई थी।

टंडन ने कहा कि मिल्खा सिंह सदैव राष्ट्रीय हितों के पक्षधर थे। देश में परिवर्तन की लहर को सराहा देते थे। वे समाज सेवा में बढचढ़ कर भाग लेते रहे। संयज टंडन की फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक रक्तदान शिविर में वे पहली बार वर्ष 2018 में मुख्यातिथि के रूप में शामिल हुए थे। इसके बाद वे फाउंडेशन की समाजिक कार्यों को प्रशंसा करते रहे। टंडन परिवार और मिल्खा परिवार के पारिवारिक संबंध बचपन से ही रहे। जिन्हें संजय टंडन ने याद किया।

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