रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी ने पत्नी व बहू को बाहर भेज खुद को लाइसेंसी राइफल से मारी गोली

जेएनएन, मोहाली। सेक्टर-69 में एयरफोर्स के रिटायर्ड कर्मी ने घर में .12 बोर की लाइसेंसी राइफल से खुद को गोली मारकर खुदकशी कर ली। मृतक की पहचान करनैल सिंह पाबला (74) के तौर पर हुई है, जोकि सात साल से कोठी नंबर 1060 की पहली मंजिल में किराये पर रहते आ रहे थे। जिस समय करनैल ने खुद को गोली मारी, उस समय उनकी पत्नी हरपाल कौर व छोटी बहू गुरप्रीत कौर आर्मी की कैंटीन में सामान लेने गई हुई थी। गोली की आवाज कोठी मालिक पवन कुमार की पत्नी ने सुनी, जब वे पहली मंजिल पर पहुंची, तो उन्होंने ड्राइंग रूम में करनैल सिंह को खून से लथपथ जमीन पर गिरे देखा।

कोठी मालिक पवन कुमार ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम पर दी और सूचना मिलते ही एसएचओ फेज-8 राजीव कुमार मौके पर पहुंचे। पुलिस ने लाश सिविल अस्प्ताल की मोर्चरी में रखवा दी है। पुलिस ने मौके से मृतक की लाइसेंसी राइफल व दो चले हुए कारतूस अपने कब्जे में लेकर 174 की कार्रवाई की है।

करनैल सिंह करीब 35 साल पहले एयरफोर्स से रिटायर्ड हुए थे, जिसके बाद उन्होंने आइसर फैक्ट्री में बतौर जनरल मैनेजर नौकरी की। तीन साल पहले करनैल सिंह को एक्सीडेंट के दौरान ब्रेन में चोट लगी थी, जिससे जुबान चली गई। वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे थे और घर में अपनी बात समझाने के लिए वह कागज पर लिखकर देते थे। करनैल सिंह ने सुसाइड करने से पहले अपनी पत्नी व बहू को कैंटीन भेजा था और कागज पर अपनी आंखों की दवा लाने के लिए कहा था। करनैल सिंह के दो बेटे व एक बेटी है, जो विदेश में है। बड़ा बेटा कनाडा और छोटा ऑस्ट्रेलिया में सेटल है। बेटों व बेटी के आने पर ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।

करनैल सिंह ने खुदकशी करने से पहले अपनी लाइसेंसी राइफल से एक फायर कर राइफल को चेक किया कि वह चल रही है या नहीं। क्योंकि काफी समय से राइफल की सर्विस करवाई गई थी। खुदकशी करने के लिए करनैल सिंह ने राइफल के बट को जमीन पर खड़ा किया और बंदूक की नाली को अपनी छाती से लगा लिया। ट्रिगर तक हाथ न पहुंचने के लिए उन्होंने दाड़ी बांधने वाली ठाठी से ट्रिगर को बांधा और एक लकड़ी के डंडे पर कील लगाकर बाद में ट्रिगर से बंधा हुआ कपड़ा खींच लिया, जिस कारण गोली उनकी छाती पर लगी और मौके पर ही मौत हो गई।

मकान मालिक पवन कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले वे बाहर बैठकर धूप सेंक रहे थे, तो उनका हालचाल पूछने गए। जब करनैल सिंह ने उन्हें कागज पर लिखकर दिया कि दिमाग चला गया, जुबान चली गई और फिर लिख दिया कि बस चले जाना। उस समय वह समझे कि शायद करनैल सिंह अपने बेटों के पास विदेश जाने की बात कर रहे हैं, परंतु उन्होंने कभी अंदाजा नहीं लगाया था कि मरने की बात कर रहे हैं।

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