चंडीगढ़ में स्टेशनरी बेचने वाले दुकानदार बेच रहे दूध, ब्रेड और अंडे, ताकि खुली रहे दुकान, नहीं होती कार्रवाई

चंडीगढ़ में कोरोना संक्रमण को कंट्रोल करने के लिए प्रशासन द्वारा लगाई गई पाबंदियों के कारण शहर में सिर्फ जरूरी वसतुओं की ही दुकानें खोलने की मंजूरी है। ऐसे में कुछ दुकानदारों ने जुगाड़ लगाकर दुकानें खोल दी है जिन पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती।

Ankesh ThakurMon, 17 May 2021 10:20 AM (IST)
चंडीगढ़ में स्टेशनरी बेचने वाले दुकानदार बेच रहे दूध, ब्रेड और अंडे।

चंडीगढ़, जेएनएन। चंडीगढ़ में कोरोना संक्रमण को कंट्रोल करने के लिए प्रशासन द्वारा लगाई गई पाबंदियों के कारण शहर में सिर्फ जरूरी वसतुओं की ही दुकानें खोलने की मंजूरी है। ऐसे में गैर जरूरी वस्तुओं की दुकानों वाले दुकानदार अपनी दुकानें खोलने की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

एक व्यापारी नेता का कहना है कि प्रशासन द्वारा लगाई गई पाबंदियों से इस तरह की व्यवस्था हो गई है कि एक वर्ग दुकानें खोलकर खीर खा रहा है जबकि दूसरा वर्ग दुकाने बंद करके घर बैठकर खीरा खा रहा है। वहीं चंद गैर जरूरी वस्तुओं के दुकानदारों ने अपनी दुकान खोलने के लिए दूध, ब्रेड और अंडे भी रख लिए। सिर्फ दिखावे के लिए ऐसा किया गया ताकि प्रशासन और पुलिस कार्रवाई न करे। यहां तक कि स्टेशनरी का कारोबार करने वाले दुकानदारों ने भी ऐसा सामान दुकानों में रख लिया है। ताकि उनकी दुकान खुली रहे। प्रशासन द्वारा ऐसे दुकानदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

पूर्व सांसद सत्यपाल जैन पोतियों के साथ बीत रहे समय

पूर्व सांसद एवं एडिशनल साेलिसिटर सत्यपाल जैन की हर सुबह शुरुआत अखबार पढ़ने से ही होती है। इस समय कोरोना काल में वह अधिकतर समय घर पर ही रहते हैं। उन्हें अपनी पोतियों के साथ खेलना काफी अच्छा लगता है जिसकी वह फेसबुक और सोशल मीडिया पर तस्वीर भी शेयर करते हैं। इस समय का भी वह भरपूर फायदा उठा रहे हैं। इस लाकडाउन में जब भी उन्हें किसी का फोन आता है तो वह कोरोना से बचाव के लिए हर किसी को स्टीम लेने की सलाह भी देते हैं। यहां तक कि उन्होंने अपने घर पर काम करने वाले स्टाफ के लिए भी अलग से स्टीमर लगवाया है और कर्मचारी को बिना स्टीम लिए काम करने की मंजूरी नहीं दी जाती। हर किसी को वह आपसी टकराव को भुलाकर इकट्ठे रहने की बात भी करते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने विरोधी नेताओं को भी एक मैसेज किया जिसमें लिखा था कि गुस्सा नाराजगी छोड़कर  प्यार से बाते करो यारों, आजकल क्या पता किसकी जिंदगी कब साथ छोड़ दें...। विरोधी भी जैन का मैसेज आने से हैरान हैं।

छाबड़ा सक्रिय, विरोधियों की चिंता बढ़ी

कांग्रेस पार्टी में भी इस समय खटपट चल रही है। पूर्व अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा अब फिर से सक्रिय हो गए हैं। छाबड़ा की ओर से शहर के मुद्दों को उठाते हुए बयान जारी करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। हालांकि इस समय छाबड़ा और उनके समर्थकों के साथ वर्तमान अध्यक्ष सुभाष चावला और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ने दूरी बनाई हुई है। छाबड़ा ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। छाबड़ा को पार्टी के किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाता।जबकि छाबड़ा का कहना है कि उन्हें इसका कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन छाबड़ा खेमे में चल रही गतिविधि का उनके विरोधी पूरी जानकारी रखते हैं। पूर्व अध्यक्ष होने के नाते छाबड़ा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य है। हाल ही में कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक हुई लेकिन छाबड़ा को इस बात की नाराजगी है कि उन्हें इस बैठक के लिए नहीं बुलाया गया। इससे पहले की बैठक में भी नहीं बुलाया गया। लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी में क्या क्या हुआ इसकी सारी जानकारी छाबड़ा को होती है। उनके समर्थक गपशप करते हुए कहते हैं कि अभी देखो आगे क्या क्या होता है।

इसे ही माना जाएगा गिफ्ट

शहर में सवा करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से हर पौधे लगाए गए लेकिन जब वह सूख गए तो कांग्रेस नेता संदीप भारद्वाज ने इसकी शिकायत सलाहकार को करते हुए जांच की मांग की। लेकिन पर्यावरण प्रेमी राहुल महाजन ने प्रशासन के आला अधिकारी को चार दिन पहले प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के जन्मदिन पर कहा कि इन पौधों को हरा भरा कर दिया जाए यह ही काफी है। अगर इन्हें हरा भरा कर दिया जाए तो इसे प्रशासक साहब की तरफ से शहरवासियों को जन्मदिन का गिफ्ट माना जाएगा। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर खुद भी हरियाली को काफी पंसद करते हैं। लेकिन सवा करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से लगाए गए पौधों के सूखने का मामला सामने आने के बाद शहरवासियों ने सवाल खड़ा करना शुरू कर दिए हैं। गपशप करते हुए लोग कहते हैं कि अधिकारियों का क्या जाता है उनके कौन से निजी खाते से सवा करोड़ का भुगतान हुआ है।

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