पंजाब में वेतनमान की विसंगितयों के कारण नहीं मिल रहे स्पेशलिस्ट डाक्टर, टेक्निशियन

पंजाब में सरकारी अस्‍पतालों में डाक्‍टरों व विशेषज्ञों की कमी है। (सांकेतिक फोटो)

पंजाब में कोरोना वायरस के खिलाफ लडा़ई में विशेषज्ञ डाक्‍टरों ओर टेक्निशियन की कमी ब्रड़ी बाधा बन रही है। राज्‍य में डाक्‍टरों की कमी से राज्‍य सरकार परेशान है। दरअसल राज्‍य में वेतनमान की विसंगतियों कारण सरकारी अस्‍पतालों के लिए विशेषज्ञ डाक्‍टर और टेक्निशियन नहीं मिल रहे हैं।

Sunil Kumar JhaFri, 07 May 2021 08:41 AM (IST)

चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। पंजाब में वेंटिलेटर होने के बावजूद इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इनको चलाने के लिए स्पेशलिस्ट ही नहीं हैं। अस्पतालों में एनेस्थिसिया के विशेषज्ञ डाक्टराें की भी कमी है। पंजाब के अस्पतालों में इस समय इनके 121 पद खाली हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार इन पदों को भरना नहीं चाहती, बल्कि इस तरह के पदों को भरने के लिए इन्हें पंजाब लोक सेवा आयोग के दायरे से भी बाहर करवा लिया गया है और वाक इन इंटरव्यू के तहत इनकी भर्ती की जा रही है, लेकिन वेतनमान की विसंगतियों के कारण सरकार को स्पेशलिस्ट डाक्टर नहीं मिल रहे।

एनेस्थिसिया विशेषज्ञ के 121 पद खाली हैं इस समय पंजाब में

एनेस्थिसिया विशेषज्ञों के अलावा मेडिसिन, बच्चों और महिला रोगों के माहिर भी नहीं मिल रहे हैं। अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कोविड के मरीजों को संभालने का काम यही स्पेशलिस्ट कर रहे हैं, लेकिन मेडिसन के 98, रेडियोलॉजिस्ट 25, पीडियाट्रिक्स के 119, छाती व टीबी के माहिरों के छह और गाइनी के 126 पद खाली हैं। इसके लिए 26 अप्रैल को ही वाक इन इंटरव्यू रखा गया था, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। ऐसा वाक इन इंटरव्यू पहली बार नहीं हो रहा है। यह कई बार हो चुका है और जो स्पेशलिस्ट डाक्टर भर्ती कर भी लिए जाते हैं, वे कुछ ही समय बाद प्राइवेट सेक्टर का रुख कर लेते हैं।

मेडिसन के 98, रेडियोलॉजिस्ट के 25 व पीडियाट्रिक्स के 119 पद रिक्त

सवाल यह है कि बार-बार इंटरव्यू क्यों करने पड़ रहे हैं। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसिस के पूर्व रजिस्ट्रार डा. प्यारा लाल गर्ग का कहना है कि पंजाब में एमबीबीएस और एमडी यानी स्पेशलिस्ट डाक्टर्स का वेतन एक समान है। यहां तक कि कालेज लेक्चरर से भी एमडी डाक्टर का वेतनमान कम है। ऐसे में कौन सा स्पेशलिस्ट डाक्टर सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने को राजी होगा।

उनका कहना है कि दूसरा, सरकार की नीतियां भी प्राइवेट सेक्टर के अस्पतालों को प्रमोट करने की हैं। सरकार चाहे कांग्रेस की हो या पिछली अकाली-भाजपा, सभी की नीतियां एक जैसी ही हैं। उन्होंने बताया कि अकाली-भाजपा सरकार के दौरान 1114 कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में 556 स्पेशलिस्ट के पद खत्म कर दिए गए, जबकि राष्ट्रीय नियमों के अनुसार हर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में कम से कम गाइनी, पीडियाट्रिक्स, सर्जरी और मेडिसन का एक डाक्टर होना चाहिए।

दस सालों में नहीं खुला कोई मेडिकल कालेज

राज्य में पिछले दस सालों में कोई नया मेडिकल कॉलेज नहीं खुला, बल्कि जालंधर के पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसिस (पिम्स) को भी प्राइवेट हाथों में सौंप दिया गया। सरकार, मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की फीस भी लगातार बढ़ा रही है, जिससे मेडिकल की शिक्षा आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई है। एमबीबीएस और एमडी दोनों को मेडिकल अफसर के रूप में भर्ती किया जा रहा है। हम यह मामला एसोसिएशन की ओर से भी कई बार उठा चुके हैं, लेकिन सरकारें इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही हैं।

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