कांग्रेस MLA के बेटे को सब इंस्‍पेक्टर बनाने पर बोले मंत्री- तो तीन करोड़ की गाड़ी में थाने ड्यूटी पर आएगा

Punjab Cabinet Meeting पंजाब कैबिनेट ने विरोध और सियासी विवाद के बावजूद दो कांग्रेस विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी दे दी है। कैबिनेट बैठक में पांच मंत्रियों के विरोध के बावजूद इस संबंध में प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी।

Sunil Kumar JhaFri, 18 Jun 2021 09:07 PM (IST)
पंजाब कैबिनेट बैठक में मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह। (स्रोत- कैप्‍टन अमरिंदर सिंह का ट्विटर पेज)

चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। Punjab Cabinet Decisions: पांच मंत्रियों के विरोध के बावजूद पंजाब कैबिनेट ने कांग्रेस के दो विधायकों के बेटों को सब इंस्पेक्टर और नायब तहसीलदार बना दिया है। जैसे ही यह एजेंडा कैबिनेट में रखा गया तो इसे लेकर जमकर तकरार हुई। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को यह एजेंडा पास करवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। पांच मंत्री तो सीधे तौर पर विधायक फतेहजंग बाजवा के बेटे अर्जुन बाजवा को इंस्पेक्टर लगाने के खिलाफ थे। एक मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि क्‍या विधायक का बेटा तीन करोड़ रुपये की अपनी गाड़ी में पुलिस स्‍टेशन ड्यूटी पर आएगा।

पांच मंत्रियों के विरोध के बीच दो कांग्रेस विधायकों के बेटों के मिली सरकारी नौकरी

सहकारिता मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने फतेहजंग बाजवा ने चुनाव के दौरान अपने एफिडेविट में अपनी आमदनी 33 करोड़ रुपये दिखाई हुई है। क्या सरकार को 33 करोड़ की आमदनी वालों के बच्चों को नौकरी देनी चाहिए या किसानों के खेतों में मजदूरी करने वाले के बेटे को।

एक को सब इंस्पेक्टर और दूसरे की नायब तहसीलदार के रूप में होगी तैनाती

एक मंत्री ने तो यहां तक कहा कि फतेहजंग बाजवा के पिता के कत्ल के समय जो एफआइआर दर्ज की गई थी उसमें उन्हें तस्करों के आपसी हमले का शिकार होना बताया गया था। बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने यहां तक कहा कि लोग अब कहने लगे हैं कि घर घर रोजगार अब विधायकों के लिए होकर रह गया है। मंत्रियों के इस तमाम विरोध के बावजूद कैबिनेट में यह एजेंडा पास हो गया।

कैबिनेट बैठक में हुई तकरार, पांच मंत्रियों ने किया नौकरी देने का विरोध

बता दें कि विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा के बेटे अर्जुन बाजवा को पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर और राकेश पांडे के बेटे भीष्म पांडे के बेटे को नायब तहसीलदार लगाने के लिए मंजूरी दे दी। हालांकि पहले इन दोनों को क्रमश डीएसपी और तहसीलदार लगाने का एजेंडा तैयार हुआ था।

इस मामले को दैनिक जागरण ने एक जून के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में सरकार की तीखी आलोचना हुई। विपक्षी पार्टियों ने ही नहीं बल्कि सरकार के अपने मंत्रियों ने भी इसका विरोध किया। विरोध को देखते हुए गृह विभाग ने डीएसपी की जगह सब इंस्पेक्टर और राजस्व विभाग ने तहसीलदार की जगह नायब तहसीलदार भर्ती करने का एजेंडा तैयार कर दिया।

तृप्त राजिंदर बाजवा ने पूछा, तीन करोड़ की गाड़ी में घूमता है विधायक का बेटा, क्या उसी में जाएगा थाने

मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने तो यहां तक कहा कि अर्जुन बाजवा जिस गाड़ी में चलता है वह तीन करोड़ रुपये की है क्या वह इस गाड़ी पर पुलिस स्टेशन नौकरी करने के लिए जाएगा। उन्होंने कहा कि कैप्टन इसे प्रथा ही बना दें कि किसी के भी इस तरह मारे जाने के बाद उसके पोते को नौकरी दी जाएगी, चाहे वह अभी पैदा ही न हुआ हो।

प्रताप बाजवा के भतीजे हैं अर्जुन बाजवा

अर्जुन बाजवा राज्यसभा सदस्य प्रताप ¨सह बाजवा के भतीजे हैं। प्रताप के छोटे भाई फतेहजंग बाजवा विधायक हैं। उनके पिता सतनाम सिंह बाजवा का 1987 में आतंकियों ने कत्ल कर दिया था। अर्जुन बाजवा के लिए कैबिनेट ने मौजूदा नियमों में एक बार के लिए ढील दी है। इसी तरह लुधियाना से कांग्रेस के विधायक राकेश पांडे के पिता जोगिंदर पाल पांडे की भी 1987 में ही आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

राकेश पांडे के बेटे को राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार के रूप में नियुक्ति दे दी है। अनुपंका के आधार पर नियुक्ति के मामले में 2002 में बनी पालिसी में विशेष केस के तौर पर यह छूट दी गई है। इसे प्रथा के रूप में नहीं माना जाएगा।

 

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