चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का टोटा, शिक्षा विभाग में 1300 से ज्यादा टीचर्स के पद खाली

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। विभाग के पास 1300 से ज्यादा अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। टीचर्स की कमी को देखते हुए विभिन्न सरकारी स्कूल विभिन्न क्लासों के बच्चों को रोटेशन में स्कूल बुलाने की प्लानिंग कर रहे हैं।

Ankesh ThakurSat, 16 Oct 2021 01:43 PM (IST)
चंडीगढ़ में 18 अक्टूबर से सभी स्कूलों में क्लासें शुरू हो जाएंगी।

सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में अभी तक प्राइमरी स्कूलों को छोड़ बाकि सभी सरकारी स्कूलों में बच्चे स्कूल आकर पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, 18 अक्टूबर से छोटी कक्षाओं पहली से पांचवीं तक के स्कूलों में भी बच्चे आना शुरू हो जाएंगे। ऐसे में शहर में सभी सरकारी स्कूलों में अब कोरोना से पहले की तरह पढ़ाई होगी। 

बावजूद चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी परेशानी टीचर्स की कमी की है। शिक्षा विभाग से 1300 से ज्यादा टीचर्स सेवानिवृत हो चुके हैं कुछ शिक्षक स्कूल छोड़कर जा चुके हैं। वहीं, नई भर्ती नहीं होने के कारण विभाग में शिक्षा का टोटा है। ऐसे में साेमवार से खुलने वाले स्कूलों में सभी स्टूडेंट्स को टीचर मिलना मुश्किल साबित होगा। ऐसे में विभाग से लेकर स्कूल प्रबंधन स्टूडेंट्स को संभालने के लिए अलग-अलग प्लानिंग कर रहे हैं।

रोटेशन में क्लास बुलाने की हो रही प्लानिंग

टीचर्स की कमी को देखते हुए विभिन्न सरकारी स्कूल विभिन्न क्लासों के बच्चों को रोटेशन में स्कूल बुलाने की प्लानिंग कर रहे हैं, ताकि कोरोना नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो सके और पढ़ाई भी न रुके। विभागीय सूत्रों की मानें तो स्कूलों को एक साथ स्टूडेंट्स आने से परेशानी बढ़ सकती है जिसका खामियाजा लंबे समय बाद भुगतना पड़ सकता है।

स्लम एरिया के स्कूल को आएगी ज्यादा परेशानी

टीचर्स कम होने से सबसे ज्यादा परेशानी स्लम एरिया में स्थापित स्कूल को आएगी। स्लम एरिया में कई स्कूल की इमारत 40 से 45 साल पुरानी है जिसके कमरे छोटे हैं और थोड़े हैं जबकि स्टूडेंट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल बहलाना, गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल हल्लोमाजरा, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल मौलीजागरां, विकासनगर से लेकर खुड्डा जस्सु, खुड्डा लाहौरा, सारंगपुर में परेशानी ज्यादा है। इन स्कूलों में बने हुए कमरों में 25 से 30 स्टूडेंट्स एक समय में बैठ सकते हैं। कोरोना नियमों का पालन करने के लिए एक कमरे में 15 से 18 स्टूडेंट्स को बिठाना है ऐसे में यदि सारे स्टूडेंट्स स्कूल आते हैं तो उन्हें बिठाने से लेकर पढ़ाई कराने वाले टीचर्स की सबसे ज्यादा कमी है।  

कोरोना काल में बढ़े है 20 हजार स्टूडेंट्स

कोरोना काल में शहर के 114 सरकारी स्कूलों में 20 हजार के करीब स्टूडेंट्स की बढ़ोतरी हुई है। यह स्टूडेंट्स प्राइवेट स्कूल को छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिट हुए है। स्टूडेंट्स पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक पढ़ाई करेंगे। ऐसे में विभाग के आगे परेशानी ज्यादा बढ़ी है।

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