पंजाब में शिअद व भाजपा ने खेला दलित कार्ड, कैप्टन अमरिंदर बोले- बेतुका चुनावी हथकंडा

कैप्‍टन अमरिंदर सिंह, सुखबीर सिंह बादल और भाजपा रोष्‍ट्रीय महासचिव तरुण चुघ की फाइल फोटो।

पंजाब में शिअद और भाजपा ने अगले विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार कर ली है। दोनों पार्टियों ने राज्‍य मे दलित कार्ड खेला है। दूसरी ओर राज्‍य के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने इसे बेतुका चुनावी हथकंडा करार दिया है।

Sunil Kumar JhaThu, 15 Apr 2021 01:32 PM (IST)

चंडीगढ़, जेएनएन। पंजाब में 2022 में होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। अभी भले ही सियासी रैलियों पर पाबंदी लगाई गई है लेकिन दलितों को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने 'दलित कार्ड' खेलना शुरू कर दिया है तो कांग्रेस भी सतर्क हो गई है। शिअद प्रधान सुखबीर बादल ने एलान किया है कि अकाली दल की सरकार बनी तो उप मुख्यमंत्री दलित नेता होगा। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी एक कदम आगे बढ़ गई है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने एलान किया कि भाजपा की सरकार बनने पर दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इन दोनों पार्टियों के दावों और वादों को बेतुका चुनावी हथकंडा करार दिया है।

शिअद ने कहा सरकार बनी तो उप मुख्यमंत्री दलित होगा, भाजपा का दलित नेता को सीएम बनाने का वादा

शिअद और भाजपा का गठबंधन भले ही टूट गया हो लेकिन दोनों ही पार्टियों ने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को लेकर अपना कार्ड खेला है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि शिअद और भाजपा ने अपने शासन के दौरान एससी भाईचारे के लिए कुछ भी नहीं किया। दलित भाईचारे को लेकर इन दोनों पार्टियों का रिकार्ड बुरा ही रहा है। इसे देखते हुए यह साफ है कि शिरोमणि अकाली दल और भाजपा 10 वर्ष के दौरान राज्य में दलितों का कल्याण यकीनी बनाने में नाकाम रही हैं और अब 2022 के चुनाव पर नजर रखते हुए दलित भाईचारे को मोह लेने के लिए सियासी ड्रामेबाजी पर उतर आई हैं।

कैप्‍टन अमरिंदर सिंह बोले- इस तरह के वादे लोगों को गुमराह करने की सियासी चाल

सुखबीर के एलान पर कैप्टन ने कहा कि यह वादा वोट के लिए लोगों को गुमराह करने की एक सियासी चाल के अलावा कुछ भी नहीं है। भाजपा पर चुटकी लेते हुए कैप्टन ने कहा कि जिस तरह किसानों के मुद्दे पर राज्य के लोगों में भाजपा के खिलाफ गुस्सा है, उसे देखते हुए पार्टी के लिए एक भी विजेता उम्मीदवार ढूंढना चुनौती होगा।

बता दें कि पंजाब विधानसभा की 117 में से 34 आरक्षित सीटें राज्य में सरकार बनाने में अहम भूमिका अदा करती हैैं। राज्य की कुल आबादी में से 34 फीसद दलित वोट हैैं और दलित वोट बैैंक के लिए पहले भी सभी राजनीतिक पार्टियां अलग-अलग दांव खेलती रही हैं।

कैप्टन अमरिंदर ने गिनवाईं दलितों को लेकर कांग्रेस की उपलब्धियां

कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि उनकी सरकार ने 2002 में अपने पहले कार्यकाल में शगुन स्कीम की राशि 2006 में 5100 रुपये से बढ़ाकर 5100 रुपए से बढ़ाकर 15000 रुपये की। इसके बाद 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार रही तो उन्होंने इसमें कोई वृद्धि नहीं की। जब कांग्रेस सरकार 2017 में दोबारा सत्ता में आई तो यह राशि बढ़ाकर 51,000 रुपये (एक जुलाई, 2021 से लागू) कर दी गई।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन कांग्रेस सरकार ने 1992-97 के कार्याकाल में 100 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये की गई। फिर 2006 में उनकी सरकार ने इसे 250 रुपये कर दिया। 2016-17 के दौरान अकाली-भाजपा सरकार ने इसे 500 रुपये किया लेकिन वर्तमान सरकार ने पहले इसे 750 रुपये किया और वृद्धि करके यह राशि 1500 रुपये कर दी गई है। इसी तरह प्री मैट्रिक एससी स्कालरशिप और एससी परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसी योजनाएं भी शामिल हैैंस जिन्हें पंजाब सरकार ने लागू किया।

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