नेता जी के किया अपना बखान तो रावत बोले- दो दाने देखकर ही पता चल जाता है चावल पके हैं या कच्चे

पंजाब और चंडीगढ़ कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने शहर में अपनी गतिविधि बढ़ा दी हैं। (File Photo)
Publish Date:Mon, 26 Oct 2020 01:35 PM (IST) Author: Vikas_Kumar

चंडीगढ़, [जेएनएन]। पंजाब और चंडीगढ़ कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने शहर में अपनी गतिविधि बढ़ा दी हैं। इस कारण वह हर सीनियर से लेकर जूनियर नेता और कार्यकर्ता को भी मिल रहे हैं। हाल ही में जब रावत पंजाब भवन में आए तो उनसे मिलने के लिए पंजाब का एक नेता अखबारों में छपी अपनी खबरों और कार्यक्रमों की फाइल बनाकर पहुंचा। रावत को फाइल के सभी पन्ने दिखाने के बाद भी वह नेता नहीं रुका। उस समय हरीश रावत के साथ चंडीगढ़ कांग्रेस के एक युवा नेता भी बैठे थे। पंजाब का नेता जब बार-बार अपना बखान करने से नहीं रुक रहा था तब रावत को कहना ही पड़ा भाई दो दाने देखकर ही पता चल जाता है कि पूरे चावल पक गए हैं या कच्चे हैं। ऐसे में उन्हें पता लग गया है कि उन्होंने कांग्रेस के लिए पिछले दिनों अच्छा काम किया है।

शहर डूब जाएगा

नगर निगम के चीफ इंजीनियर का ऐसा स्वभाव है कि वह दिनभर काम में ही व्यस्त रहते हैं। इसलिए ज्यादतर लोग उनके कमरे में बिना पर्ची दिए ही दाखिल हो जाते हैं। इस बात पर चीफ इंजीनियर शेलेंद्र सिंह ने कभी नाराजगी भी जाहिर नहीं की। हाल ही में एक समाजसेवी उनके कमरे में आया और आते ही एनचो और सुखना चो की गंदगी का हवाला देते हुए कहने लग गए कि चंडीगढ़ शहर कभी डूब जाएगा। बरसाती पानी इन्हीं एनचो से निकलता है। इस पर चीफ इंजीनियर शेलेंद्र सिंह ने हंसते हुए जवाब दिया कि ऐसा नहीं होगा। जब तक वह हैं ऐसा नहीं होने देंगे। चीफ इंजीनियर ने यह भी कहा कि यह समाजसेवी उन्हें रोज सुबह कोई न कोई समस्या पर मैसेज जरूर भेजते हैं। चीफ इंजीनियर ने कहा कि कई बार उनकी सुबह की शुरुआत भी इस समाजसेवी द्वारा भेजे गए मैसेज से होती है।

हाफिज हो गए नाराज

पानी के बढ़े हुए रेट्स के विरोध में कांग्रेस बीते सप्ताह निगम के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेता हाफिज अनवर उल हक एक युवा नेता पर खासा नाराज हो गए। क्योंकि युवा नेता ने अपने संबोधन में सभी सीनियर नेताओं का नाम लिया लेकिन हाफिज का नाम नहीं लिया। इस पर हाफिज अनवर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह पार्टी में सिर्फ मान सम्मान के लिए आए हैं। न तो उन्हें कोई पद चाहिए और न ही टिकट। हाफिज पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ही बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इस दौरान हाफिज ने पार्टी छोड़ने की धमकी बी दी। इस घटना के बाद सभी पार्टी नेता उस युवा नेता को सलाह दे रहे हैं कि भविष्य में भाषण में वह सिर्फ बंसल और छाबड़ा का ही नाम ले और किसी अन्य नेता का नाम न ले।

पार्षदों को टिकट कटने का डर

भाजपा पार्षदों में इस समय खटपट चल रही है। इस कारण पार्षद अपनी ही मेयर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए वचरुअल सदन की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। कई पार्षद इसके लिए तैयार नहीं थे लेकिन उन्हें अगले साल होने वाले निगम चुनाव में टिकट कटने का डर सताने लगा। सदन की बैठक का बहिष्कार करने के लिए जिन दो पार्षदों ने मुहिम शुरू की थी उन दोनों पार्षदों ने ही अन्य भाजपा और मनोनीत पार्षदों को बैठक में शामिल न होने के लिए प्रेरित किया था। उक्त दोनों पार्षद भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद के करीबी हैं। पार्षदों को लगा कि बहिष्कार न किया तो कहीं अध्यक्ष नाराज न हो जाए और अगले साल होने वाले चुनाव में अध्यक्ष ही टिकट बांटेंगे। पार्षदों की एक बैठक में भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद ने बोला था कि मेयर तो उनका भी फोन नहीं उठाती।

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