PSEB ने कक्षा के सेक्शन में अतिरिक्त दाखिले पर जुर्माना का लिया फैसला, रासा यूके ने किया विरोध

रासा यूके ने पीएसइबी के उस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। जिसके तहत दसवीं और बारहवीं कक्षाओं के सेक्शन में निजी स्कूलों की ओर से निर्धारित सीमा से अधिक दाखिले करने पर जुर्माना लगाया गया है। किसी भी कक्षा के सेक्शन में अतिरिक्त दाखिले पर पीएसइबी जुर्माना लगाएगा।

Vinay KumarTue, 27 Jul 2021 03:23 PM (IST)
रासा यूके ने पीएसईबी के फैसले का विरोध किया है।

जागरण संवाददाता, मोहाली। मान्यता प्राप्त एवं एफिलेटिड स्कूल एसोसिएशन रासा यूके ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसइबी) के उस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। जिसके तहत दसवीं और बारहवीं कक्षाओं के सेक्शन में निजी स्कूलों की ओर से निर्धारित सीमा से अधिक दाखिले करने पर जुर्माना लगाया गया है। किसी भी कक्षा के सेक्शन में अतिरिक्त दाखिले पर पीएसइबी जुर्माना लगाएगा। रासा ने निजी स्कूलों की अकादमिक काउंसिल में शामिल सदस्यों से स्पष्टीकरण की मांग की है। रासा यूके ने इस कदम पर निजी स्कूलों की अकादमिक काउंसिल में शामिल सदस्यों से स्पष्टीकरण की मांग की है।

रासा यूके के चेयरमैन हरपाल सिंह यूके ने बोर्ड के इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि बोर्ड के फैसले निजी स्कूलों पर बोझ बनते जा रहे हैं। हरपाल सिंह ने बताया कि खेल नीति-2021 के तहत निजी स्कूलों से स्पोट्र्स फंड इकट्ठा किया गया। जिसके खिलाफ रासा और स्कूल फेडरेशन ने संयुक्त रूप से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुधीर मित्तल ने दलीलें सुनने के बाद बोर्ड को आदेश जारी किए हैं कि वर्ष 2020-21 के बकाया स्पोट्र्स फंड के लिए किसी निजी स्कूल को विवश नहीं किया जाएगा। हरपाल सिंह यूके ने बताया कि बोर्ड ने दसवीं के लिए एक सेक्शन में 50 विद्यार्थियों की अनुमति थी। जिस पर बोर्ड ने 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी यानि 60 विद्यार्थियों तक के लिए छूट दी थी।

इसी तरह बारहवीं के आट्र्स ग्रुप में 60 विद्यार्थियों पर 20 फीसदी की छूट के साथ 72 विद्यार्थी, कॉमर्स के सेक्शन में 50 विद्यार्थियों पर 20 प्रतिशत की छूट के साथ 60 विद्यार्थियों और साइंस के लिए 50 विद्यार्थियों पर 10 प्रतिशत की छूट के साथ 55 विद्यार्थियों की सीमा अकादमिक सत्र 2020-21 के लिए निर्धारित किया था। रासा ने कहा कि बाद में एफिलेटिड और एसोसिएटेड स्कूलों से इन अतिरिक्त दाखिलों के चलते विद्यार्थियों के सर्टिफिकेट रोक लिए गए और उन पर 5000 रुपये प्रति विद्यार्थी जुर्माना लगा दिया।

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