श्रद्धा के साथ स्वास्थ्य का संदेश, कोरोना बचाव के लिए नियमों का पाठ पढ़ा रही चंडीगढ़ की रामलीला कमेटियां

कोरोना महामारी ने इंसान के जीवन में कई बदलाव किए। उसी का एक रूप देखने को मिल रहा है चंडीगढ़ की श्रीरामलीला एंड दशहरा कमेटी के लिए चंदा इकट्ठा करने वाली पर्ची पर। शहर के विभिन्न रामलीला कमेटियां रामलीला और दशहरा करने के लिए हर साल चंदा जुटाती है।

Ankesh ThakurSun, 19 Sep 2021 02:57 PM (IST)
रामलीला कमेटियों द्वारा जारी की गई चंदा इकट्ठा करने वाली पर्चियां।

सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। कोरोना महामारी ने इंसान के जीवन में कई बदलाव किए। उसी का एक रूप देखने को मिल रहा है चंडीगढ़ की श्रीरामलीला एंड दशहरा कमेटी के लिए चंदा इकट्ठा करने वाली पर्ची पर। शहर के विभिन्न रामलीला कमेटियां रामलीला और दशहरा करने के लिए हर साल चंदा जुटाती है। यह चंदा रामलीला शुरू होने से करीब एक महीने पहले इकट्ठा करने का सिलसिला शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार चंदा जुटाने वाली पर्चियों का स्वरूप बदल गया है।

पहले पर्ची के एक तरफ भगवान श्रीराम के परिवार की फोटो उकेरी गई होती थी, लेकिन इस बार भगवान की फोटो की जगह कोरोना बचाव के नियमों को डिस्प्ले किया गया है। जिसमें वैक्सीनेशन, सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना, हाथ धोना और सेनिटाइजर का इस्तेमाल करना, मास्क पहनना और प्रकृति व पानी को बचाने का संदेश दिया गया है। 

कोरोना से पहले पर्चियों पर भगवान श्रीराम की फोटो लगाई जाती थी।

आजाद ड्रामेटिक रामलीला क्लब ने की शुरुआत

चंदा जुटाने वाली पर्ची बनने के बाद चंदा इकट्ठा होना शुरू हो चुका है। जानकारी देते हुए आजाद ड्रामेटिक रामलीला क्लब के डायरेक्टर अमित कुमार ने बताया कि जब भी हम भगवान की फोटो वाली पर्ची काटते थे तो कई लोग आपत्ति जताते थे कि बाद में इन पर्चियों का संभालकर नहीं रख पाते और वह कूड़े में या फिर पैरों के नीचे आती है, जो कि गलत है। भगवान की फोटो पैरों में नहीं होनी चाहिए। उसी को देखते हुए हमने उस फोटो को हटाकर कोरोना बचाव, प्रकृति और जल संरक्षण का संदेश देते हुए फोटो को लगाया है ताकि यह पर्ची गिरे भी ताे लोगों की श्रद्धा को कोई ठेस न लगे बल्कि जो देखे उसे कुछ बेहतर संदेश मिले।

भक्तों की आती थी शिकायत- अशोक कुमार

आजाद ड्रामेटिक रामलीला क्लब में रावण की भूमिका अभिनीत करने वाले अशोक कुमार ने बताया कि सैकड़ों लोग चंदा देने के लिए सामने आते थे लेकिन जब भी हम पर्ची काटते थे तो वह बिना पर्ची के ही पैसे देने की बात करते थे जो कि नियमों के विरूद्ध था, इसलिए इस बार हमने भगवान श्रीराम के परिवार की फोटो को हटाकर समाजिक संदेश देते हुए फोटो लगाए है ताकि किसी को पर्ची कटवाने में भी कोई परेशानी न आए और कमेटियों का काम भी बेहतर तरीके से चलता रहे।

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