Punjab Post Matric Scam: 14 महीने बाद 63.91 करोड़ रुपये के घोटाले में 5 अधिकारी चार्जशीट

कैबिनेट मंत्री राजकुमार वेरका ने वर्ष 2020 में हुए पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप घोटाले में पांच अधिकारियों परमिंदर सिंह गिल डिप्टी डायरेक्टर चरणजीत सिंह डीसीएफए मुकेश भाटिया एसओ राजिंदर चोपड़ा सुपरीटेंडेंट राकेश अरोड़ा सीनियर असिस्टेंट को चार्जशीट किया है।

Pankaj DwivediMon, 11 Oct 2021 01:41 PM (IST)
पंजाब में वर्ष 2020 के पोस्ट मैट्रिक घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है।

कैलाश नाथ, चंडीगढ़। एससी विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार से आने वाले पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप घोटाले में पंजाब में 14 महीने बाद कड़ा कदम उठाया है। सामाजिक न्याय, सशक्तिकरण व अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री डा. राजकुमार वेरका ने 63.91 करोड़ रुपये के इस घोटाले में पांच अधिकारिकों को चार्जशीट किया है। चार्जशीट किए गए अधिकारियों में डिप्टी डायरेक्टर स्तर के भी अधिकारी है। विभाग के पूर्व कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत से जुड़े इस बहुचर्चित घोटाले की जांच सीबीआइ भी कर रही है।

बता दें कि दैनिक जागरण ने अगस्त 2020 में इस घोटाले का खुलासा किया था। जिसके बाद से पंजाब का राजनीतिक पारा चढ़ गया था। पूरे पंजाब में पूर्व कैबिनेट कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत को कैबिनेट से बर्खास्त करके उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठी थी। इस घोटाले के 14 महीने के बाद पहली बार पंजाब सरकार ने किसी के ऊपर कोई कार्रवाई की है।

डा. राजकुमार वेरका ने बताया कि बहुचर्चित पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप घोटाले में डिप्टी डायरेक्टर परमिंदर सिंह गिल, डीसीएफए चरणजीत सिंह, एसओ मुकेश भाटिया, सुपरीटेंडेंट राजिंदर चोपड़ा, सीनियर सहायक राकेश अरोड़ा को चार्जशीट किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन कालेजों ने री आडिट करवा कर 16.91 करोड़ रुपये अतिरिक्त लिए है। उन कालेजों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की जाएगी।

जिन संस्थानों से वसूलने थे 8 करोड़, उलटा जारी कर दिए 16.91 करोड़

63.91 करोड़ रुपये के इस घोटाले में अनिमित्ताओं की सारी सीमाओं को पार कर दिया गया था। जिन निजी संस्थानों से विभाग को 8 करोड़ रुपये वसूलने थे, उन विभागों का री आडिट करवाकर उन्हें 16.91 करोड़ रुपये और जारी कर दिए गए थे। एडीशनल चीफ सेक्रेटरी कृपा शंकर सरोज ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी विनी महाजन को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा करने से पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप का 24.91 करोड़ रुपये की चपत लगी है। विभाग के पास 39 करोड़ रुपये का रिकार्ड नहीं था और 24.91 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान से यह घोटाला 63.91 हो जाता है।

री-आडिट के नाम पर हुई थी‘लूट’

सामाजिक न्याय सशक्तिकरण व अल्पसंख्यक विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सरबजिंदर सिंह रंधावा ने दिसंबर 2019 में 8 कालेजों की जांच की थी। इस जांच रिपोर्ट में निकल कर सामने आया कि पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के लिए इन कालेजों का आडिट करवाने के लिए मुख्यमंत्री व वित्त विभाग के निर्देशों की उल्लंघना की गई। एक ऐसा भी कालेज जांच में सामने आया है। जिसने एससी के अलावा सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए एससी स्कालरशिप फंड लेता रहा। विभाग में मिलीभगत करके 8 कालेज जिनका आडिट हो चुका था। इनसे 8 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी। लेकिन यह दर्शाया गया कि इनका आडिट ही नहीं हुआ। इन कालेजों का आडिट करवा कर जिन कालेजों की रिकवरी कई लाखों में थी, उन्हें लाखों में बदल कर 16.91 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे।

इन कालेजों में हुआ घालमेल

-सरस्वती पालीटेक्निक कालेज बठिंडा

वित्त विभाग की आडिट में 1.85 करोड़ रुपये की रिकवरी निकाली गई थी। डायरेक्टोरेट द्वारा 23 जुलाई 2019 को किए गए री-आडिट में रिकवरी को घटा कर 12 लाख रुपये कर दिया था। 2 अगस्त 2019 को कालेज को 90 लाख रुपये और जारी कर दिए गए थे।

-रीजनल पालीटेक्निक कालेज बठिंडा

आडिट में 87.45 लाख रुपये की रिकवरी थी। कालेज द्वारा 2011-12,12-13 और 14-15 का रिकार्ड न उपलब्ध करवाने के कारण 1.19 करोड़ की अतिरिक्त रिकवरी डाली गई। कालेज से कुल 2.07 करोड़ रुपये रिकवरी करनी थी। डायरेक्टोरेट की टीम ने री-आडिट की और 87.45 लाख की रिकवरी को कम करके 6.11 लाख रुपये कर दिया। री-आडिट में 1.19 करोड़ रुपये का जिक्र ही नहीं किया गया। जिससे इस कालेज को 3.15 करोड़ रुपये का लाभ मिला था।

-लार्ड कृष्णा पालीटेक्निक कालेज, कपूरथला

विभाग ने 16 अप्रैल 2018 की रिपोर्ट में कालेज से लगभग 1.11 करोड़ रुपये की रिकवरी दिखाई। रिपोर्ट को तकनीकि शिक्षा विभाग को भेजा गया। जिसने रिकवरी को 85.12 लाख रुपये बताया गया पर डायरेक्टोरेट ने री-आडिट के बाद इस कालेज को 1.17 करोड़ के अनुमान के लिए योग्य करार दिया। जिससे राज्य सरकार को 2.03 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

-मार्डन कालेज और एजुकेशन संगरूर

2014 से 17 के बीच कालेज ने कुल 90 लाख रुपये मांगे थे। वित्त विभाग ने 58.66 लाख की रिकवरी दिखाई। हायर एजुकेशन विभाग ने इसे कम करके सिर्फ 6 लाख रुपये कर दिया और 2 अगस्त 2019 को कालेज को 41.48 लाख रुपये और जारी कर दिया गया। कालेज को 13 सितंबर 2019 41.48 लाख रुपये की रकम दोबारा ट्रेजरी से दे दिया गया।

सीजीसी टेक्निकल कैंपस झंझेरी मोहाली

इस कालेज से 55 लाख रुपये की रिकवरी थी। जिसे री-आडिट में 10 लाख रुपये कर दिया गया और रिकवरी के बावजूद कालेज को 1.32 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए।

यूनिवर्सल एजुकेशनल सोसाइटी ग्रुप आप इंस्टीट्यूशंस

कालेज से 41.34 लाख रुपये की रिकवरी होनी थी। री-आडिट करके 21 लाख रुपये कर दिया गया। बिना किसी अधिकारी से मंजूरी के बिना इस कालेज को 31.36 लाख रुपये जारी कर दिए गए।

एनएनएस इंस्टीच्यूट आफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलाजी, पठानकोट

वित्त विभाग ने 14.26 लाख रुपये की रिकवरी निकाली थी पर री-आडिट के बाद इसे ट्रेजरी से 8 लाख रुपये और जारी कर दिए गए।

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