Punjab New Ministers List: ये है पंजाब का नया मंत्रिमंडल, जानें किस मंत्री का कैसा रहा राजनीतिक सफर

Punjab New Ministers List पंजाब मंत्रिमंडल का गठन हो गया है। चन्नी मंत्रिमंडल में छह नए चेहरे शामिल किए गए हैं। इनमें परगट सिंह राजकुमार वेरका संगत सिंह गिलजियां अमरिंदर सिंह राजा वडिंग परगट सिंह काका रणदीप सिंह गुरप्रीत कोटली व राणा गुरजीत शामिल हैं।

Kamlesh BhattSun, 26 Sep 2021 05:03 PM (IST)
पंजाब की चन्नी सरकार की नई कैबिनेट।

जेएनएन, चंडीगढ़। Punjab New Ministers List: पंजाब मंत्रिमंडल का गठन हो गया है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ सुखजिंदर सिंह रंधावा व ओपी सोनी पहले ही शपथ ले चुके हैं। दोनों उपमुख्यमंत्री होंगे। आज नए चेहरों में डा. राजकुमार वेरका, संगत सिंह गिलजियां, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, परगट सिंह, काका रणदीप सिंह, गुरप्रीत कोटली व राणा गुरजीत ने शपथ ली। इसके अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल में शामिल रहे सबसे वरिष्ठ मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा, मनप्रीत सिंह बादल, तृप्त राजिंदर बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, अरुणा चौधरी, रजिया सुल्ताना, विजय इंदर सिंगला, भारत भूषण आशु को भी चन्नी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। आइए जानते हैं सीएम व उनके मंत्रियों के राजनीतिक सफर के बारे में...

मुख्यमंत्री: चरणजीत सिंह चन्नी

15 मार्च 1963 को जन्मे चरणजीत सिंह चन्नी खरड़ नगर परिषद में तीन बार पार्षद रहे। दो बार वह मेयर बने। वर्ष 2007 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव निर्दलीय के तौर पर लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उन्होंने इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर 2012 व 2017 में लगातार जीत दर्ज की और कैप्टन मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे। कैप्टन के इस्तीफे के बाद चन्नी को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया।

उपमुख्यमंत्री: सुखजिंदर सिंह रंधावा

सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अब तक चार बार विधानसभा का चुनाव लड़े, जिसमें से तीन में उन्होंने जीत दर्ज की। 2002 में उन्होंने फतेहगढ़ चूड़ियां में अकाली दल के निर्मल सिंह काहलों को हराया। 2007 में वह निर्मल सिंह काहलों से हार गए। 2012 व 2017 में उन्हें डेरा बाबा नानक से टिकट मिला और उन्होंने अकाली के सुच्चा सिंह लंगाह को पराजित किया। कैप्टन मंत्रिमंडल में वह सहकारिता और जेल मंत्री रहे। 

उपमुख्यमंत्री: ओपी सोनी

ओमप्रकाश सोनी कांग्रेस का हिंदू चेहरा हैं। सोनी वर्ष 1991 में अमृतसर के मेयर बने। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सोनी 1997, 2002, 2007, 2012 और 2017 में विधायक चुने गए। कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में भी सोनी कैबिनेट मंत्री रहे हैं।  

ये नए चेहरे

डा. राजकुमार वेरका

वर्ष 1963 में जन्मे डा. राजकुमार वेरका पहली बार वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव में उतरे। वह हलका वेरका से अकाली दल के प्रत्याशी दलबीर सिंह को हराकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद  2007 में वह दलबीर से चुनाव हार गए। इसके बाद वेरका हलका खत्म हो गया और इसका नाम विधानसभा हलका पूर्वी हो गया। राजकुमार ने विधानसभा हलका पश्चिमी में 2012 और 2017 में भाजपा के राकेश गिल को हराया। वह 2010 से 2016 तक एससी/एसटी कमीशन के वाइस चेयरमैन रहे हैं। 

संगत सिंह गिलजियां

गिलजियां ने अपनी बलबूते पर सियासी जमीन तैयार की। वह टांडा उड़मुड़ से विधायक हैं। उन्होंने पहली बार कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2002 में चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गए। सन् 2012 में पार्टी ने एक बार फिर उन्हें टिकट दिया, जिसमें उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। 2017 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 

अमरिंदर सिंह राजा वडिंग

राजा वड़िंग श्री मुक्तसर साहिब जिले के विधानसभा हलका गिद्दड़बाहा से दूसरी बार विधायक बने हैं। पहली बार वर्ष 2012 में पीपीपी से प्रत्याशी मनप्रीत सिंह बादल को हराकर विधायक बने थे, जबकि दूसरी बार 2017 में शिअद के हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों को हराकर विधायक बने। करीब 43 वर्षीय राजा वड़िंग आल इंडिया यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

परगट सिंह

परगट सिंह ने वर्ष 2012 में सियासत में कदम रखा। अकाली दल में शामिल हुए और जालंधर के कैंट विधानसभा हलके से जीत दर्ज की। 2016 में वह मंत्री न बनाए जाने से नाराज होकर अकाली दल को छोड़ गए। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए।

काका रणदीप सिंह

फतेहगढ़ साहिब जिले के अमलोह क्षेत्र से विधायक हैं। इनके दादा जनरल शिवदेव सिंह सेहत मंत्री थे। पिता गुरदर्शन सिंह चार बार विधायक और दो बार मंत्री बने। माता सतिंदर कौर पंजाब महिला कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रहे। खुद दो बार नाभा और दो बार अमलोह से विधायक चुने गए

गुरकीरत सिंह कोटली

गुरकीरत सिंह कोटली को सियासत विरासत में मिली। दादा बेअंत सिंह 1992 में पंजाब के मुख्यमंत्री बने। बाद में एक बम धमाके में उनकी हत्या कर दी गई। पिता तेज प्रकाश सिंह कोटली 2002 की कैप्टन सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री रहे। चचेरे भाई रवनीत सिंह बिट्टू लुधियाना से मौजूदा सांसद हैं। गुरकीरत सिंह 2012 में पहली बार खन्ना से विधानसभा चुनाव लड़े। उन्होंने शिअद के रणजीत सिंह तलवंडी को हराया। 2017 में उन्होंने आप के अनिल दत्त फल्ली को हराया। कैप्टन सरकार के दूसरे कैबिनेट विस्तार में जगह नहीं मिलने पर वे नाराज हो गए थे। सिद्धू  के पंजाब कांग्रेस प्रधान बनते ही उनका खुलकर समर्थन किया।

राणा गुरजीत

राणा गुरजीत सिंह पहली बार 2002 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते। साल 2004 में कांग्रेस ने राणा को जालंधर लोकसभा से उम्मीदवार बनाया। यहां भी उन्होंने जीत दर्ज की। साल 2009 में राणा गुरजीत सिंह खडूर साहिब से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2012 व 2017 में वह फिर कपूरथला से विधायक बने।

ये मंत्री बचा गए कुर्सी

ब्रह्म मोहिंदरा

ब्रह्म मोहिंदरा कैप्टन अमरिंदर सिंह मंत्रिमंडल में सबसे वरिष्ठ थे। वह पार्टी का हिंदू चेहरा हैं। पटियाला देहाती से वह छह बार जीत दर्ज कर चुके हैं। शांत व कम बोलने वालेमोहिंदरा पहली बार 1980 में पटियाला शहरी से चुनाव जीते थे। उसके बाद इसी सीट से 1985 और 1992 का चुनाव जीते। ब्रह्म मोहिंदरा 2007 में समाना और 2012 व 2017 में पटियाला देहाती से जीते।

मनप्रीत सिंह बादल

मनप्रीत बादल पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के भतीजे हैं। वह 1995 में पहली बार अकाली दल के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े थे और जीत हासिल की थी। मनप्रीत ने 1997, 2002 और 2007 में जीत की हैट्रिक लगाई। मनप्रीत अकाली-भाजपा सरकार में वर्ष 2007 से 2010 तक वित्त मंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई, लेकिन पार्टी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव से पहले मनप्रीत कांग्रेस में शामिल हो गए और बठिंडा से लोकसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 में वह बठिंडा शहरी सीट से जीते और कैप्टन सरकार में वित्त मंत्री रहे।

तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा 

तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का जन्म 23 फरवरी 1943 को पाकिस्तान के गांव कोटली बाजवा, तहसीलदार नारोवाल, जिला सियालकोट में हुआ था, जबकि अब उनका घर कादियां में है। उनके पिता का नाम गुरबचन सिंह बाजवा और माता का बेअंत कौर है। उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा रविनंदन सिंह बाजवा जिला परिषद गुरदासपुर के चेयरमैन है। बाजवा विधानसभा हलका फतेहगढ़ चूड़ियां से चुनाव लड़ते हैं। वह चार बार विधायक बने हैं। सबसे पहले वह 1992 में चुनाव जीते। इसके बाद 2002, 2012 और 2017 में कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनाव जीते। इससे पहले उनके पास ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग था।

सुखबिंदर सिंह सरकारिया

31 मार्च 1956 को जन्मे सुखबिंदर सिंह सरकारिया राजासांसी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। सरकारिया कैप्टन मंत्रिमंडल में भी शामिल रहे हैं। 1997 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। हालांकि तब वह चुनाव हार गए थे। 2007, 2012 और 2017 में उन्होंने विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। 

अरुणा चौधरी

अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाली अरुणा चौधरी कैप्टन अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल में भी मंत्री रही हैं। वह अब तक चार विधानसभा चुनाव लड़ी हैं जिसमें तीन बार उन्होंने जीत दर्ज की। दीनानगर विधानसभा सीट से वह 2002 में पहली बार विधानसभा पहुंचीं। 

विजय इंदर सिंगला

पूर्व सांसद मरहूम संत राम सिंगला के पुत्र विजयइंद्र सिंगला सन 2009-2014 तक लोकसभा हलका संगरूर से पहली बार सांसद बने। 2017 में विधानसभा हलका संगरूर से विधायक चुने गए। सरकार दौरान उन्हें लोक निर्माण विभाग का मंत्री बनाया गया। कैबिनेट मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग भी सौंपा गया। राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले विजय इंदर सिंगला नेशनल कांग्रेस के प्रवक्ता भी हैं।

रजिया सुल्ताना

विधानसभा हलका मालेरकोटला से विधायक रजिया सुल्ताना पूर्व डीजीपी (ह्यूमनराइट्स) मोहम्मद मुस्तफा की पत्नी है। वर्ष 2002 दौरान पहली बार कांग्रेस से मालेरकोटला की विधायक बनी। 2007 दौरान लगातार दूसरी बार मालेरकोटला से ही उन्होंने जीत दर्ज की। वर्ष 2012 दौरान अकाली उम्मीदवार फरजाना आलम के मुकाबले वह चुनाव में पराजित रही। वर्ष 2017 दौरान तीसरी बार फिर उन्हें मालेरकोटला में जीत मिली। इसके बाद उन्हें ट्रांसपोर्ट, जल सप्लाई व सेनिटेशन विभाग का मंत्री बनाया गया है। कैबिनेट मंत्री रहते हुए उन्होंने मालेरकोटला को जिला बनाने का वादा भी पूरा किया।

भारत भूषण आशु

पहली बार 1997 में कौंसलर बने। तीन बार पार्षद रहे। 2012 तक नगर निगम में बतौर पार्षद रहे। 2012 में कांग्रेस ने उन्हें लुधियाना पश्चिमी से टिकट दी और विधायक बने। कांग्रेस विपक्ष में थी तो पार्टी उन्हें कांग्रेस विधायक दल का उप नेता बनाया। 2017 में फिर से पार्टी ने लुधियाना पश्चिमी से उन्हें टिकट दी और इस बार भी वह बड़े अंतर से जीते। 2018 में कैप्टन सरकार में उन्हें फूड एवं सिविल सप्लाई मंत्री की अहम जिम्मेदारी दी गई।

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