पीयू खेल रत्न अवार्ड के लिए जब मिल्खा सिंह ने भरी हामी : प्रो. अरुण ग्रोवर

उड़न सिख पद्मश्री मिल्खा सिंह ने कभी यूनिवर्सिटी लेवल पर पढ़ाई नहीं की थी वह तो दसवीं पास होने के बाद ही फौज में भर्ती हो गए थे। पंजाब यूनिवर्सिटी ने 2016 में पहली बार खिलाड़ियों के लिए खेल रत्न अवार्ड की शुरुआत की थी।

JagranSat, 19 Jun 2021 09:53 PM (IST)
पीयू खेल रत्न अवार्ड के लिए जब मिल्खा सिंह ने भरी हामी : प्रो. अरुण ग्रोवर

जासं,चंडीगढ़, चंडीगढ़

उड़न सिख पद्मश्री मिल्खा सिंह ने कभी यूनिवर्सिटी लेवल पर पढ़ाई नहीं की थी, वह तो दसवीं पास होने के बाद ही फौज में भर्ती हो गए थे। पंजाब यूनिवर्सिटी ने 2016 में पहली बार खिलाड़ियों के लिए खेल रत्न अवार्ड की शुरुआत की थी। ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर को पंजाब यूनिवर्सिटी ने पहले खेल रत्न अवार्ड से नवाजा था। अगली बार जब किसी खिलाड़ी के नाम पर विचार हुआ तो वह मिल्खा सिंह ही थे। अवार्ड की घोषणा से पहले मैं खुद उनसे मिला तो उन्होंने कहा कि मेरा तो यूनिवर्सिटी से कोई ताल्लुक नहीं है। यह बात मिल्खा सिंह ने पीयू के पूर्व कुलपति प्रो.अरुण ग्रोवर से कही थी।

दैनिक जागरण से बातचीत मे प्रो.ग्रोवर ने बताया कि मिल्खा सिंह में अवार्ड पाने की कोई चाहत नहीं दिखी। जब उन्हें बताया गया कि बलबीर सिंह सीनियर को पहला खेल रत्न अवार्ड पंजाब यूनिवर्सिटी ने दिया है। अवार्ड के बारे में पूरी जानकारी अपने स्तर पर जुटाने के बाद ही मिल्खा सिंह ने यस की थी। चार मार्च 2018 को पीयू के 67 वें दीक्षा समारोह में मिल्खा सिंह को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के हाथों खेल रत्न अवार्ड से नवाजा गया। पीयू देगा मिल्खा सिंह को खास सम्मान

पंजाब यूनिवर्सिटी भी आने वाले दिनों में मिल्खा सिंह की याद में बड़ी घोषणा कर सकता है। सूत्रों के अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी स्थित खेल विभाग में मिल्खा सिंह के नाम का पोट्रेट लगाया जा सकता है। उधर पंजाब यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस स्थित तैयार हो रहे नार्थ रीजन के सबसे बड़े ऑडिटोरियम का नाम उड़न सिख मिल्खा सिंह के नाम पर रखा जा सकता है। पीयू स्पो‌र्ट्स ग्राउंड में बनने वाले एथलेटिक्स ट्रैक भी मिल्खा सिंह को समर्पित किया जा सकता है। मिल्खा सिंह आने वाली पीढि़यों को हमेशा मोटिवेट करते रहेंगे। पीयू के लिए यह सम्मान की बात है कि 2018 में उन्होंने खेल रत्न अवार्ड को स्वीकार किया था। मिल्खा के परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।

- प्रो.राजकुमार ,कुलपति पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़

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