चंडीगढ़ में आसमान छू रहे नारियल पानी का दाम, रेट सुन रह जाएंगे हैरान, शहरवासी कर रहे शिकायत

कोरोना संक्रमण के बीच नारियल पानी की डिमांड बढ़ गई है। इसके चलते नारियल पानी के दामों में कई गुना इजाफा हुआ है। कोरोना काल का कई वेंडर्स भरपूर फायदा उठा रहे हैं और मजबूर शहरवासियों से मनमर्जी दाम वसूल रहे हैं।

Ankesh ThakurSun, 09 May 2021 09:18 AM (IST)
चंडीगढ़ में आसमान छू रहे नारियल पानी का दाम।

चंडीगढ़, जेएनएन। कोरोना संक्रमण के बीच नारियल पानी की डिमांड बढ़ गई है। इसके चलते नारियल पानी के दामों में कई गुना इजाफा हुआ है। कोरोना काल का कई वेंडर्स भरपूर फायदा उठा रहे हैं और मजबूर शहरवासियों से मनमर्जी दाम वसूल रहे हैं। आम दिनों में नारियल पानी के दाम 30 से 40 रुपये थे लेकिन अब एक पानी वाले नारियल को 120 रुपये में बेचा जा रहा है।

इसकी शिकायत चंडीगढ़ के मेयर रविकांत शर्मा के पास पहुंची है। डड्डूमाजरा से कांग्रेस महिला नेत्री और सेक्टर-24 के एक रेजिडेंट्स ने फोन करके शिकायत दी है कि पानी वाला एक नारियल 120 रुपये में बिक रहा है। लगातार आ रही शिकायतों के बाद मेयर ने कमिश्नर केके यादव और डीसी मंदीप सिंह बराड़ को फोन किया। मेयर ने कहा कि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि शनिवार से पहले की तरह सरकारी रेट मार्केट कमेटी की ओर से तय करने का सिस्टम शुरू हो जाएगा। इस समय कोरोना के मामले बढ़ने के कारण नारियल पानी की मांग सबसे ज्यादा है। ऐसे में 120 रुपये वाजिब मूल्य नहीं है।

मेयर ने बताया किपिछले साल की तरह प्रशासन ने अपने स्तर पर हर फल और सब्जी का सरकारी रिटेल रेट तय किए थे उसी तरह से अब हर दिन रेट तय होने चाहिए, ताकि शहरवासियों को महंगी चीजों से राहत मिल सके। जो महंगे रेट पर सब्जी और फल बेच रहे हैं ऐसे वेंडर्स पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस समय कोरोना मरीज नारियल पानी का सेवन कर रहे हैं। डॉक्टर भी उन्हें ज्यादा से ज्यादा नारियल पानी पीने की सलाह दे रहे हैं।

कोरोना के मामले कम होने पर बंद कर दिया था सिस्टम

पिछले साल लॉकडाउन के दौरान नगर निगम ने सब्जी और फलों के सरकारी रिटेल तय किए थे। फिर कोरोना के मामले कम होने पर दिसंबर में यह सिस्टम बंद कर दिया गया था। शहरवासी इसे रेगुलर चाह रहे थे। अब वेंडर्स ही अपने स्तर पर दाम तय करके सब्जियां और फल बेच रहे हैं। कोरोना में ज्यादा से ज्यादा वेंडर्स को सब्जियां और फल बेचने की मंजूरी दी गई। मार्केट कमेटी द्वारा सब्जियों और फल के जो सरकारी रेट तय किए जाते थे उनकी सूची अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से शहरवासियों के वाट्सएप ग्रुपों में भी जानकारी के लिए शेयर की जाती थी।

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