चंडीगढ़ के दक्षिणी सेक्टरों की सफाई के नए टेंडर पर सियासत, कांग्रेस का आरोप, लायंस कंपनी के फेवर में भाजपा

कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चावला का कहना है कि लायंस कंपनी को भाजपा के नेता ही फेवर कर रहे हैं। वह ही इस कंपनी को लेकर आए थे। वह चाहते हैं कि लायंस कंपनी इस समय काम करती रही। हर साल 54 करोड़ रुपये का भुगतान कंपनी को किया जाता है।

Ankesh ThakurWed, 13 Oct 2021 08:49 AM (IST)
30 नवंबर को लायंस कंपनी का टेंडर खत्म हो रहा है।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। दक्षिणी सेक्टरों की सफाई का टेंडर खत्म होने से पहले नया ठेका अलाट न करने को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस पार्षद अब तक टेंडर न बनने को लेकर निगम अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। असल में जानबूझकर समय पर नया टेंडर नहीं निकाला गया है, ताकि लायंस कंपनी को फायदा मिल सके और वह टेंडर खत्म होने के बावजूद भी काम करती रहे और ऐसा ही हो रहा है। ऐसे में अब न चाहते हुए भी लायंस कंपनी को ही एक्सटेंशन देनी पड़ेगी। क्योंकि 30 नवंबर को लायंस कंपनी का टेंडर खत्म हो रहा है और इतनी जल्द नई कंपनी को टेंडर अलॉट नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चावला का कहना है कि लायंस कंपनी को भाजपा के नेता ही फेवर कर रहे हैं। वह ही इस कंपनी को लेकर आए थे और वह चाहते हैं कि लायंस कंपनी इस समय काम करती रही। हर साल 54 करोड़ रुपये का भुगतान कंपनी को किया जाता है। भाजपा के कहने पर ही अधिकारियों ने नए टेंडर नहीं बनाया है। राजनीतिक दलों को भी शहर से कोई मतलब नहीं है उन्हें अपनी राजनीति से मतबल है। वहीं नगर निगम इस प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है कि उतरी सेक्टर की सफाई का काम भी ठेके पर दे दिया जाए, जबकि इस समय यहां पर स्थायी सफाई कर्मचारी तैनात हैं। 

 

भाजपा के पार्षद आपस में बंट गए थे

सदन की बैठक में बहुमत से यह प्रस्ताव पास किया गया कि नवंबर के बाद फिर से यहां की सफाई के लिए टेंडर फिर से निकाला जाएगा। लायंस कंपनी का अनुबंध न बढ़ाने का फैसला लिया गया था। उस समय भाजपा के पार्षद इस मुद्दे पर बंट गए थे।दक्षिणी सेक्टरों के भाजपा पार्षदों ने लायंस कंपनी की कारगुजारी पर संतुष्टता जाहिर करते हुए जमकर समर्थन करते हुए कहा था कि इस कोरोना काल में लायंस कंपनी का अनुबंध आगे बढ़ाया जाना चाहिए। नया टेंडर नहीं निकालना चाहिए। फिर से टेंडर निकालने का प्रस्ताव पास होने के बाद भाजपा पार्षद गुरप्रीत ढिल्लो ने अपनी नाराजगी भी मेयर रविकांत शर्मा के समक्ष जाहिर की थी।

30 को खत्म होगा टेंडर

नगर निगम के अनुसार लायंस कंपनी को दो तरह के टेंडर अलॉट थे जिनमें से मैनअुल स्वीपिंग के टेंडर का कार्यकाल इस माह की 30 तारीख को समाप्त हो रहा है जबकि दूसरा मेकैनिकल स्वीपिंग का टेंडर अगले साल के फरवरी में समाप्त हो रहा है। कमिश्नर को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि जानबूझकर देरी की गई है। ऐसे में इसकी जांच होनी चाहिए कि क्यों नहीं सदन के फैसले को लागू किया गया। सदन में प्रस्ताव पास होने के चार माह बीत जाने के बाद भी फिर से टेंडर नहीं निकाला गया। भाजपा पार्षद एवं सेनिटेशन कमेटी के पूर्व चेयरमैन शक्तिदेव शाली का आरोप है कि नगर निगम को नुकसान पहुंचाकर किसी व्यक्ति एवं कंपनी को लाभ देने का प्रयास किया गया है।

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